Kashi Vidyapith National Seminar : काशी विद्यापीठ में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ, कबीर की विरासत और सामाजिक समरसता पर मंथन

Kashi Vidyapith National Seminar : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के इतिहास विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का लहरतारा स्थित कबीर प्राकट्य स्थल पर शुभारंभ हुआ। संगोष्ठी में कबीर की विरासत, सामाजिक समरसता, इतिहास, लोक परंपरा और राष्ट्र रत्न शिव प्रसाद गुप्त के योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई।

Kashi Vidyapith National Seminar : काशी विद्यापीठ में ‘काशी की विरासत: काशी से मगहर तक’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

Kashi Vidyapith National Seminar : वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के इतिहास विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘काशी की विरासत: काशी से मगहर तक, इतिहास, स्मृति और लोक परम्परा’ का शुभारंभ रविवार को श्री सतगुरु कबीर प्राकट्य स्थल, लहरतारा में हुआ। संगोष्ठी में देशभर से आए शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विद्वानों ने संत कबीर की विचारधारा, काशी की सांस्कृतिक विरासत तथा इतिहास और लोक परंपरा के विविध आयामों पर गंभीर विमर्श किया। 

Kashi Vidyapith National Seminar : इस अवसर पर विश्वविद्यालय के संस्थापक राष्ट्र रत्न बाबू शिव प्रसाद गुप्त की जयंती भी श्रद्धापूर्वक मनाई गई तथा उनके राष्ट्रनिर्माण एवं शिक्षा के क्षेत्र में दिए गए योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

Kashi Vidyapith National Seminar : कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चिकित्सा विज्ञान संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के निदेशक प्रो. एस.एन. संखवार ने कहा कि संत कबीर ने समाज में व्याप्त अंधविश्वास, भेदभाव और सामाजिक कुरीतियों को दूर करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कबीर का उद्देश्य केवल आध्यात्मिक चेतना जगाना नहीं था, बल्कि मानव जीवन को बेहतर बनाना और समाज में समानता एवं सद्भाव स्थापित करना भी था। उनका मानना था कि जब समाज स्वस्थ और समरस होगा, तभी वास्तविक विकास संभव होगा।

Kashi Vidyapith National Seminar : मुख्य वक्ता हिन्दी विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रो. सत्यपाल शर्मा ने कहा कि आज के समय में भी कबीर के विचार पूरी तरह प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि कबीर सभी धर्मों और वर्गों के बीच प्रेम, समरसता और मानवीय मूल्यों की स्थापना का संदेश देते हैं। वे केवल ज्ञानमार्ग के ही नहीं, बल्कि प्रेममार्ग के भी महान मार्गदर्शक थे।

Kashi Vidyapith National Seminar : बीज वक्ता विवेकनाथ महाराज ने कहा कि प्राचीन समय में शिक्षा कुछ विशेष वर्गों तक सीमित थी, लेकिन कबीर ने शिक्षा और समाज को समावेशी बनाने का प्रयास किया। उन्होंने कबीर के व्यक्तित्व की महत्ता बताते हुए कहा कि उनके ज्ञान और आचरण से प्रभावित होकर गुरु रामानंद ने भी उनके प्रति गहरी श्रद्धा व्यक्त की थी।

Kashi Vidyapith National Seminar : प्रो. बी. राम ने अपने विचार रखते हुए कहा कि कबीर की विरासत किसी एक क्षेत्र या समाज तक सीमित नहीं है। आज पूरी दुनिया उनके विचारों और जीवन-दर्शन को आत्मसात कर रही है। उन्होंने कहा कि ‘कबीर’ का वास्तविक अर्थ इंद्रियों पर विजय प्राप्त करना है और यही उनके जीवन का मूल संदेश भी है।

Kashi Vidyapith National Seminar : संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि कबीर का संदेश स्पष्ट था कि यदि व्यक्ति को सच्चे ज्ञान की प्राप्ति हो जाए, तो काशी और मगहर जैसे स्थानों का भेद समाप्त हो जाता है तथा मोक्ष कहीं भी प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कबीर केवल एक संत या व्यक्ति नहीं, बल्कि एक व्यापक विचारधारा और सामाजिक चेतना के प्रतीक हैं, जिनकी महिमा का वर्णन जितना किया जाए, उतना कम है।

Kashi Vidyapith National Seminar : संगोष्ठी के तकनीकी सत्र में विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों से आए लगभग 30 शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। शोधपत्रों में काशी की सांस्कृतिक विरासत, संत कबीर का दर्शन, लोक परंपराएं, इतिहास और सामाजिक परिवर्तन जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

Kashi Vidyapith National Seminar : कार्यक्रम में इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. आनंद शंकर चौधरी ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अंजना वर्मा ने किया, जबकि डॉ. रविंद्र कुमार गौतम ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

Kashi Vidyapith National Seminar : इस अवसर पर डॉ. विजय रंजन, डॉ. बृजेश शुक्ला, डॉ. ऋषभ कुमार, डॉ. आनंद श्रीवास्तव, डॉ. संतोष कुमार यादव, डॉ. विमल कुमार, डॉ. वीरेंद्र प्रताप, डॉ. अंजू, डॉ. प्रिया श्रीवास्तव, डॉ. सारिका गौतम, डॉ. संदीप, डॉ. मनोज कुमार सिंह, डॉ. प्रियंका सिंह, शशि प्रताप यादव, प्रीति यादव, भरत कुमार शाह, अनीश कुमार, रंजीत कुमार, प्रीति पाल, गुंजन ओझा, कृष्णकांत सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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