Indian Rupee record-low : भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 95.20 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंचा। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक तनाव के चलते शेयर बाजार में भी भारी गिरावट दर्ज की गई।

Indian Rupee record-low : भारतीय मुद्रा बाजार में गुरुवार को बड़ी हलचल देखने को मिली, जब रुपया शुरुआती कारोबार में ही टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.20 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। यह गिरावट निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि इसके पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारक एक साथ सक्रिय दिखाई दे रहे हैं।
Indian Rupee record-low : शुरुआती कारोबार में ही टूटा रुपया
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.01 प्रति डॉलर पर खुला, लेकिन कुछ ही समय में यह 32 पैसे की गिरावट के साथ 95.20 तक फिसल गया। इससे पहले बुधवार को भी रुपया 20 पैसे कमजोर होकर 94.88 पर बंद हुआ था।
Indian Rupee record-low : गिरावट के पीछे ये हैं मुख्य कारण

रुपये में इस भारी कमजोरी के पीछे कई अहम कारण बताए जा रहे हैं। अमेरिकी डॉलर की मजबूती: वैश्विक बाजार में डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव बढ़ा है। फेडरल रिजर्व का रुख- अमेरिका के केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में बदलाव न करने से डॉलर की मांग बढ़ी है। भू-राजनीतिक तनाव: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव की स्थिति ने निवेशकों को सुरक्षित विकल्पों की ओर धकेला है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: ब्रेंट क्रूड की कीमत 3% से ज्यादा बढ़कर 121.76 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है, जो भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए चिंता बढ़ाने वाला संकेत है।
Indian Rupee record-low : शेयर बाजार पर भी पड़ा असर

रुपये की गिरावट का असर घरेलू शेयर बाजार में भी साफ दिखाई दिया। सेंसेक्स 821.79 अंक गिरकर 76,674.57 पर पहुंच गया। निफ्टी 287.3 अंक टूटकर 23,890.35 पर आ गया। इस गिरावट के पीछे विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी एक बड़ा कारण रही। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बुधवार को 2,468.42 करोड़ रुपये की निकासी की।
Indian Rupee record-low : आने वाले समय की चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं और वैश्विक तनाव बना रहा, तो रुपये पर दबाव और बढ़ सकता है। इससे आयात महंगा होगा। महंगाई बढ़ सकती है। शेयर बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।
Indian Rupee record-low : रुपये की यह गिरावट केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने खड़ी चुनौतियों का संकेत है। वैश्विक परिस्थितियों में सुधार और विदेशी निवेश की वापसी ही रुपये को स्थिरता दे सकती है। फिलहाल निवेशकों और नीति निर्माताओं दोनों की नजर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर बनी हुई है।