Dr Bhagwan Das : काशी विद्यापीठ में प्रथम कुलपति भारतरत्न डॉ. भगवान दास की पुण्यतिथि पर विशिष्ट व्याख्यान हुआ। कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने उनके चिंतन को आत्ममंथन, कर्तव्यबोध और समग्र शिक्षा की प्रेरणा बताया।
Dr Bhagwan Das : काशी विद्यापीठ में डॉ. भगवान दास की पुण्यतिथि पर विशिष्ट व्याख्यान, कुलपति बोले- उनका चिंतन आज भी आत्ममंथन और कर्तव्यबोध की देता है प्रेरणा
Dr Bhagwan Das : वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के दर्शन एवं योग विज्ञान विभाग की ओर से विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति, दर्शन विषय के प्रथम शिक्षक और भारतरत्न डॉ. भगवान दास की पुण्यतिथि पर शुक्रवार को विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय ‘भारतरत्न डॉ. भगवान दास : समय के साथ और समय के पार’ रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने की।
Dr Bhagwan Das : कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने कहा कि डॉ. भगवान दास की स्मृति का अवसर केवल श्रद्धांजलि देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्ममंथन और कर्तव्यबोध का भी अवसर है। उन्होंने कहा कि किसी भी जीवंत ज्ञान-परंपरा का विकास अपने अतीत से संवाद करते हुए ही संभव है। डॉ. भगवान दास का चिंतन भारतीय परंपरा को जड़ रूप में स्वीकार करने के बजाय उसके विवेकपूर्ण पुनर्पाठ और समकालीन संदर्भों में पुनर्सृजन की प्रेरणा देता है।
Dr Bhagwan Das : शिक्षा और समाज के समग्र विकास पर दिया जोर
प्रो. त्यागी ने कहा कि डॉ. भगवान दास, आचार्य नरेंद्र देव और बाबू शिवप्रसाद गुप्त जैसे मनीषियों की शिक्षा-दृष्टि में मानवीय, राष्ट्रीय और मूल्यपरक सरोकार दिखाई देते हैं। ये सरोकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की मूल भावना से भी गहरे स्तर पर जुड़े हैं। उनके विचार शिक्षा को केवल सूचना या कौशल अर्जित करने का माध्यम न मानकर व्यक्ति और समाज के समग्र विकास की प्रक्रिया के रूप में देखने की दृष्टि प्रदान करते हैं।
Dr Bhagwan Das : प्रपौत्र डॉ. पुष्कर रंजन ने साझा कीं स्मृतियां
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं भारतरत्न डॉ. भगवान दास के प्रपौत्र डॉ. पुष्कर रंजन ने अपने संबोधन में डॉ. भगवान दास के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने उनके जीवन से जुड़ी स्मृतियों और अनेक आत्मीय प्रसंगों को साझा करते हुए उनके विचारों और जीवन-दृष्टि को वर्तमान संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया।
Dr Bhagwan Das : डॉ. भगवान दास की रचनाओं में भविष्य के भारत का संकल्प : प्रो. शर्मा
मुख्य वक्ता अखिल भारतीय दर्शन परिषद के अध्यक्ष एवं हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर (मध्य प्रदेश) के दर्शनशास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. अंबिकादत्त शर्मा ने डॉ. भगवान दास के चिंतन की व्यापकता और उनकी रचनाओं में निहित भविष्य-दृष्टि पर विस्तार से चर्चा की।
प्रो. शर्मा ने कहा कि डॉ. भगवान दास की रचनाओं में भावी भारत का संकल्पबोध निहित है। उनकी रचनाएं समग्र भारत के आलोचनात्मक विवेक को अभिव्यक्त करती हैं और भारतीय परंपराओं के आत्मपरीक्षण एवं परिष्कार की संभावनाओं को सामने लाती हैं। उन्होंने डॉ. भगवान दास के समन्वयवादी चिंतन को रेखांकित करते हुए कहा कि उनके दर्शन में विभिन्न ज्ञान-परंपराओं के बीच संवाद और संतुलन की दृष्टि दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि डॉ. भगवान दास ने भारत में समाज-विज्ञानपरक चिंतन की आधारभूमि तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही भारतीय ज्ञान-परंपरा के चतुष्पदीय स्वरूप को समझने के लिए महत्वपूर्ण वैचारिक आधार भी प्रस्तुत किया।
Dr Bhagwan Das : वार्षिक शैक्षणिक गतिविधियों का प्रकाशन
कार्यक्रम के दौरान दर्शन एवं योग विज्ञान विभाग की ओर से शैक्षणिक सत्र 2025-26 की वार्षिक शैक्षणिक गतिविधियों और विद्यार्थियों की उपलब्धियों का संकलन भी प्रकाशित किया गया। विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक प्रो. नंदिनी सिंह ने बताया कि इस प्रकाशन में विभाग की वर्षभर की शैक्षणिक, शोध, सह-पाठ्यचर्या एवं विद्यार्थी-केंद्रित गतिविधियों का दस्तावेजीकरण किया गया है। कार्यक्रम में शाह परिवार से समीरकांत और प्रिया समीर, भारतेन्दु हरिश्चंद्र परिवार से राज कृष्ण एवं दीपाली राजकृष्ण तथा भारतेंदु भवन से दीपेश चंद्र चौधरी की उपस्थिति रही।
Dr Bhagwan Das : विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं अधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम का स्वागत एवं संचालन विभागाध्यक्ष तथा कार्यक्रम संयोजक प्रो. नंदिनी सिंह ने किया। इस अवसर पर कुलानुशासक एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अम्बरीष राय, मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. राजेश कुमार मिश्र, वाणिज्य एवं प्रबंधशास्त्र संकायाध्यक्ष प्रो. सुधीर कुमार शुक्ल, विधि संकायाध्यक्ष प्रो. रंजन कुमार, ललित कला विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा, निदेशक आउटरीच प्रो. संजय, प्रो. नलिनी श्याम कामिल, रैंकिंग एवं एक्रेडिटेशन निदेशक प्रो. हंसा जैन, प्रो. अजीत कुमार शुक्ल, प्रो. पितांबर दास, मुख्य गृहपति डॉ. नागेंद्र कुमार सिंह, प्रो. संगीता घोष, डॉ. धनंजय विश्वकर्मा, डॉ. आयुष, प्रो. ममता गुप्ता, डॉ. ममता यादव, डॉ. गणेश जायसवाल, डॉ. संतोष कुमार सिंह, डॉ. कविता कुमारी, डॉ. प्रियंका कुमारी, डॉ. चंद्रमणि सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं अन्य लोग उपस्थित रहे।