Himanta Biswa Sarma Oath Ceremony: असम में NDA की प्रचंड जीत के बाद हिमंता बिस्वा सरमा ने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह मौजूद रहे, जबकि कांग्रेस ने समारोह का बहिष्कार किया।

Himanta Biswa Sarma Oath Ceremony: असम में NDA की ऐतिहासिक जीत के बाद हिमंता बिस्वा सरमा ने दूसरी बार ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, कांग्रेस ने किया बहिष्कार
Himanta Biswa Sarma Oath Ceremony: असम की राजनीति में मंगलवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ, जब Himanta Biswa Sarma ने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर नया राजनीतिक अध्याय रच दिया। हाल ही में संपन्न हुए असम विधानसभा चुनाव में NDA की प्रचंड जीत के बाद बीजेपी नेतृत्व ने एक बार फिर हिमंता सरमा पर भरोसा जताया। राजधानी दिसपुर में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री Narendra Modi, केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah, रक्षा मंत्री Rajnath Singh समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

Himanta Biswa Sarma Oath Ceremony: राज्यपाल Lakshman Prasad Acharya ने हिमंता बिस्वा सरमा को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके साथ ही बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के चार वरिष्ठ नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ लेकर नई सरकार का हिस्सा बने।
Himanta Biswa Sarma Oath Ceremony: इन नेताओं को भी मिली कैबिनेट में जगह
नई कैबिनेट में बीजेपी और सहयोगी दलों के नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। शपथ लेने वालों में बीजेपी नेता और केंद्र सरकार में पूर्व राज्य मंत्री Rameswar Teli, पूर्व वित्त मंत्री Ajanta Neog, असम गण परिषद के अध्यक्ष Atul Bora और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के नेता Chandan Brahma शामिल रहे। शपथ ग्रहण समारोह को बीजेपी ने पूर्वोत्तर में अपनी राजनीतिक ताकत के बड़े प्रदर्शन के रूप में प्रस्तुत किया।
Himanta Biswa Sarma Oath Ceremony: NDA की रिकॉर्ड जीत ने बदली असम की राजनीति

असम विधानसभा चुनाव 2026 में NDA ने 126 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटों पर जीत दर्ज कर ऐतिहासिक बहुमत हासिल किया। बीजेपी अकेले 82 सीटें जीतने में सफल रही, जो राज्य में पार्टी का अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन माना जा रहा है। बीजेपी ने पहली बार अपने दम पर स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा पार किया, जबकि सहयोगी दल AGP और BPF को 10-10 सीटें मिलीं। इस जीत के साथ हिमंता बिस्वा सरमा असम में लगातार दो कार्यकाल तक मुख्यमंत्री रहने वाले पहले गैर-कांग्रेसी नेता बन गए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह जीत केवल चुनावी सफलता नहीं बल्कि पूर्वोत्तर में बीजेपी की दीर्घकालिक रणनीति की बड़ी कामयाबी है।
Himanta Biswa Sarma Oath Ceremony: पूर्वोत्तर में बीजेपी का सबसे मजबूत चेहरा बने हिमंता

2021 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद से हिमंता बिस्वा सरमा ने पूर्वोत्तर राज्यों में बीजेपी के विस्तार में अहम भूमिका निभाई है। संगठनात्मक क्षमता, आक्रामक चुनावी रणनीति और प्रशासनिक फैसलों के कारण वे बीजेपी नेतृत्व के सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते हैं। विश्लेषकों के मुताबिक, असम में NDA की लगातार तीसरी सरकार इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में भी पूर्वोत्तर की राजनीति में बीजेपी की पकड़ मजबूत बनी रह सकती है। पार्टी अब असम मॉडल को अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में भी मजबूत करने की तैयारी में है।
Himanta Biswa Sarma Oath Ceremony: सरकार के पहले 100 दिनों पर रहेगा खास फोकस
सूत्रों के अनुसार, नई सरकार अपने पहले 100 दिनों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, निवेश बढ़ाने, रोजगार, भूमि सुधार, कानून व्यवस्था और स्वदेशी समुदायों के अधिकारों पर विशेष ध्यान दे सकती है। राज्य में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और उद्योग से जुड़े कई बड़े फैसलों की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा सरकार बाढ़ प्रबंधन, सीमावर्ती इलाकों के विकास और पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए भी नई योजनाओं की घोषणा कर सकती है।
Himanta Biswa Sarma Oath Ceremony: कांग्रेस ने किया समारोह का बहिष्कार
जहां बीजेपी इस जीत को बड़े राजनीतिक उत्सव के रूप में मना रही थी, वहीं कांग्रेस ने शपथ ग्रहण समारोह से दूरी बनाए रखी। असम कांग्रेस अध्यक्ष Gaurav Gogoi ने आरोप लगाया कि संवैधानिक कार्यक्रम को राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन में बदल दिया गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ऐसे “महंगे राजनीतिक आयोजन” का हिस्सा नहीं बन सकती। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को केवल 19 सीटों पर जीत मिली, जिसे पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
Himanta Biswa Sarma Oath Ceremony: पूर्वोत्तर की राजनीति में BJP की बढ़ती पकड़
असम में NDA की इस प्रचंड जीत को केवल सत्ता में वापसी नहीं बल्कि पूरे पूर्वोत्तर में बीजेपी की मजबूत होती राजनीतिक स्थिति के रूप में देखा जा रहा है। हिमंता बिस्वा सरमा की वापसी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बीजेपी आने वाले समय में पूर्वोत्तर की राजनीति में अपनी पकड़ और मजबूत करने की रणनीति पर तेजी से आगे बढ़ेगी।