Dr Shambhunath Singh Birth Anniversary Seminar : डॉ. शंभूनाथ सिंह की 110वीं जयंती पर संगोष्ठी आयोजित, नवगीत और भारतीय काव्य परंपरा पर हुई विस्तृत चर्चा

Dr Shambhunath Singh Birth Anniversary Seminar : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में डॉ. शंभूनाथ सिंह की 110वीं जयंती पर आयोजित संगोष्ठी में भारतीय काव्य परंपरा, नवगीत और साहित्य में छंद की भूमिका पर विद्वानों ने विस्तार से विचार रखे। इस अवसर पर नवगीत पुरस्कार भी प्रदान किए गए।

Dr Shambhunath Singh Birth Anniversary Seminar : भारतीय साहित्य की आत्मा संवेदनाओं और मानवीय मूल्यों में निहित : प्रो. आनन्द कुमार त्यागी

Dr Shambhunath Singh Birth Anniversary Seminar : वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के महामना मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान एवं डॉ. शंभूनाथ शोध संस्थापन व सृजन पीठ के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को प्रख्यात साहित्यकार एवं नवगीत आंदोलन के अग्रदूत डॉ. शंभूनाथ सिंह की 110वीं जयंती के अवसर पर ‘भारतीय काव्य परंपरा, नवगीत और शंभूनाथ सिंह’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी तथा ‘डॉ. शंभूनाथ सिंह नवगीत पुरस्कार समारोह’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन काशी विद्यापीठ के डॉ. भगवान दास केंद्रीय पुस्तकालय स्थित समिति कक्ष में हुआ।

Dr Shambhunath Singh Birth Anniversary Seminar : कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने कहा कि कविता ऊर्जा का ऐसा स्वरूप है जिसे कभी समाप्त नहीं किया जा सकता, उसका केवल रूपांतरण होता है। उन्होंने कहा कि भारतीय साहित्य की मूल आत्मा भावनाओं, संवेदनाओं और मानवीय मूल्यों में निहित है, इसलिए भारतीय समाज ने छंद की नवीन कलात्मकता को सहजता से स्वीकार किया है।

Dr Shambhunath Singh Birth Anniversary Seminar : प्रो. त्यागी ने कहा कि आधुनिक दौर में छंद-विहीन कविता को भी महत्व मिला है, लेकिन कविता में छंद का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने छंद की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि यह कविता में उसी प्रकार कार्य करता है, जैसे किसी रासायनिक अभिक्रिया में उत्प्रेरक (कैटलिस्ट) कार्य करता है। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिमी विचारधाराओं और साहित्यिक परंपराओं के प्रभाव के बावजूद भारतीय काव्य परंपरा में छंदों ने कविता को नए आयाम और नवीन स्वरूप प्रदान किए हैं।

हिंदी कविता के महान साधक थे डॉ. शंभूनाथ सिंह : प्रो. देवी प्रसाद द्विवेदी

Dr Shambhunath Singh Birth Anniversary Seminar : कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य पद्मभूषण प्रो. देवी प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि कवि होना सामान्य बात नहीं है और कविता रचना उससे भी अधिक कठिन साधना का विषय है। उन्होंने कहा कि सच्चा कवि जन्मजात प्रतिभा लेकर आता है, जिसे निरंतर अभ्यास और साधना से निखारता है।

डॉ. शंभूनाथ सिंह को स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि वे हिंदी कविता के महान साधक थे, जिन्होंने हिंदी काव्य को नई दिशा और नया स्वरूप प्रदान किया। उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ कविता वही है, जो पाठक या श्रोता को उसके आसपास की दुनिया से कुछ समय के लिए अलग कर सीधे कविता के संसार में ले जाए।

Dr Shambhunath Singh Birth Anniversary Seminar : नवगीत भारतीय काव्य परंपरा की निरंतरता : डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र

विशिष्ट अतिथि और वरिष्ठ नवगीतकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने कहा कि हजारों वर्षों तक भारतीय ज्ञान परंपरा मौखिक रही और पाणिनी के सूत्रों से लेकर अनेक प्राचीन ग्रंथ छंदों में ही रचे गए। उन्होंने कहा कि जो लोग यह मानते हैं कि कविता छंदों के बिना भी हो सकती है, उन्हें भारतीय काव्य परंपरा की गहराई को समझना चाहिए।

Dr Shambhunath Singh Birth Anniversary Seminar : उन्होंने कहा कि नवगीत कोई अलग धारा नहीं, बल्कि भारतीय गीत परंपरा का ही आधुनिक विस्तार है। डॉ. मिश्र ने काशी विद्यापीठ की सराहना करते हुए कहा कि नवगीत साहित्य के संरक्षण और संवर्धन में विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

Dr Shambhunath Singh Birth Anniversary Seminar : नवगीत कविता का जीवंत और सशक्त रंग : डॉ. नीरजा माधव

वरिष्ठ कथाकार डॉ. नीरजा माधव ने कहा कि कविता के विशाल कैनवास पर नवगीत एक अत्यंत चटख और जीवंत रंग है। उन्होंने कहा कि सृष्टि स्वयं परमात्मा का काव्य है और कवि अपने भाव, रस और विवेक के माध्यम से उसे अभिव्यक्त करता है। उन्होंने कहा कि नवगीत को परिपक्वता और व्यापक पहचान दिलाने में डॉ. शंभूनाथ सिंह का योगदान अविस्मरणीय है।

Dr Shambhunath Singh Birth Anniversary Seminar : वहीं, विद्याश्री न्यास के अध्यक्ष डॉ. दयानिधि मिश्र ने कहा कि नवगीत की जड़ें वैदिक ऋचाओं तक जाती हैं। उन्होंने डॉ. शंभूनाथ सिंह के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि नवगीत सृजन से अलग नहीं है और जब तक गीत जीवित है, कविता का अस्तित्व भी बना रहेगा।

नवगीत पुरस्कार से सम्मानित हुईं चर्चित कृतियां

इस अवसर पर वर्ष 2026 का डॉ. शंभूनाथ सिंह स्मृति नवगीत पुरस्कार लखनऊ के वरिष्ठ नवगीतकार डॉ. रविशंकर पाण्डेय की कृति ‘समय से रहती ठनी’ तथा प्रयागराज के साहित्यकार यश मालवीय की कृति ‘काशी नहीं जुलाहे की’ को प्रदान किया गया।

Dr Shambhunath Singh Birth Anniversary Seminar : विद्वानों ने रखे विचार, कवियों ने किया काव्यपाठ

उद्घाटन सत्र के बाद आयोजित विभिन्न अकादमिक सत्रों में प्रो. उमेश प्रसाद सिंह, प्रो. रामसुधार सिंह, हिमांशु उपाध्याय, प्रो. ओमप्रकाश सिंह (जेएनयू), डॉ. शैलेन्द्र सिंह, प्रो. वन्दना मिश्र, प्रो. रेनू सिंह (अमरकंटक), प्रो. सुरेन्द्र प्रताप तथा पुरुषार्थ सिंह सहित अनेक विद्वानों ने नवगीत, भारतीय काव्य परंपरा और डॉ. शंभूनाथ सिंह के साहित्यिक योगदान पर अपने विचार व्यक्त किए।

Dr Shambhunath Singh Birth Anniversary Seminar : कार्यक्रम के अंतिम सत्र ‘नवगीत दुपहरिया’ में डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र की अध्यक्षता और पुरुषार्थ सिंह के संचालन में संस्कृति मिश्रा, यश मालवीय, डॉ. अशोक सिंह, ओम धीरज, हिमांशु उपाध्याय, शिव कुमार गुप्त ‘पराग’, डॉ. रविशंकर पाण्डेय, डॉ. इन्दीवर तथा सुरेन्द्र वाजपेयी ने अपनी रचनाओं का प्रभावशाली काव्यपाठ प्रस्तुत किया।

बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी रहे उपस्थित

Dr Shambhunath Singh Birth Anniversary Seminar : कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत महामना मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक डॉ. नागेन्द्र कुमार सिंह ने किया। बीज वक्तव्य नवगीतकार एवं समीक्षक डॉ. इन्दीवर ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन फाउंडेशन के महासचिव राजीव कुमार सिंह ने तथा धन्यवाद ज्ञापन सृजन पीठ के प्रभारी प्रो. अनुराग कुमार ने किया।

Dr Shambhunath Singh Birth Anniversary Seminar : इस अवसर पर नरेन्द्रनाथ मिश्र, गौतम अरोरा, मंजरी पाण्डेय, संजय सिंह, डॉ. रोली, चन्द्रबली, दीक्षा, राजश्री, शशांक, अदिति, अनिकेत, रोहित सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।

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