Trump Tariff on Generic Medicines: भारतीय जेनेरिक दवाओं पर 200% तक टैरिफ का ऐलान, अमेरिका को निर्यात पर बड़ा असर

Trump Tariff on Generic Medicines: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जेनेरिक दवाओं पर 200% तक टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। इस फैसले से भारत के 9.7 अरब डॉलर के दवा निर्यात और भारतीय फार्मा कंपनियों पर बड़ा असर पड़ सकता है। जानें पूरी खबर।

Trump Tariff on Generic Medicines: भारतीय जेनेरिक दवाओं पर 200% तक टैरिफ का ट्रंप का ऐलान, 9.7 अरब डॉलर के निर्यात पर मंडराया खतरा

Trump Tariff on Generic Medicines: अमेरिका में दवा निर्माण बढ़ाने के लिए नई नीति, भारतीय फार्मा कंपनियों के सामने बढ़ी चुनौती

Trump Tariff on Generic Medicines: वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जेनेरिक दवाओं के आयात को लेकर बड़ा ऐलान करते हुए अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध तरीके से 200 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की घोषणा की है। ट्रंप ने कहा कि इस नीति का उद्देश्य दवा निर्माण को दोबारा अमेरिका में स्थापित करना, विदेशी आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू फार्मास्युटिकल उद्योग को मजबूत बनाना है।

Trump Tariff on Generic Medicines: ट्रंप की इस घोषणा का सबसे अधिक असर भारत पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि भारत अमेरिका को जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा निर्यातक है। भारतीय दवा कंपनियों का बड़ा कारोबार अमेरिकी बाजार पर निर्भर है और यदि यह नीति लागू होती है तो अरबों डॉलर के निर्यात पर असर पड़ सकता है।

Trump Tariff on Generic Medicines: चरणबद्ध तरीके से लागू होगा टैरिफ

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर जानकारी देते हुए बताया कि प्रस्तावित नीति के तहत 1 अगस्त 2026 से नई व्यवस्था लागू होगी। हालांकि शुरुआती दो वर्षों तक अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर कोई अतिरिक्त टैरिफ नहीं लगाया जाएगा, ताकि कंपनियों को अमेरिका में उत्पादन इकाइयां स्थापित करने का पर्याप्त समय मिल सके।

Trump Tariff on Generic Medicines: इसके बाद तीसरे वर्ष से आयातित जेनेरिक दवाओं पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा, जिसे आगे बढ़ाकर 200 प्रतिशत तक किया जाएगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि निर्धारित समयसीमा के भीतर अमेरिका में उत्पादन शुरू नहीं करने वाली कंपनियों के खिलाफ आर्थिक दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।

Trump Tariff on Generic Medicines: अमेरिका में दवा निर्माण को बढ़ावा देना है उद्देश्य

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि कोविड-19 महामारी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका को दवाओं के मामले में विदेशी देशों पर अत्यधिक निर्भर नहीं रहना चाहिए। नई नीति के जरिए घरेलू स्तर पर दवा उत्पादन बढ़ाकर स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने की योजना बनाई गई है। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव केवल जेनेरिक दवाओं पर केंद्रित है। पेटेंटेड, ब्रांडेड और इनोवेटिव दवाओं से जुड़ी मौजूदा नीति में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा।

Trump Tariff on Generic Medicines: भारत पर क्यों पड़ सकता है बड़ा असर?

भारत को दुनिया की “फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड” कहा जाता है। देश बड़ी मात्रा में कम लागत वाली उच्च गुणवत्ता की जेनेरिक दवाओं का उत्पादन कर दुनिया के कई देशों को निर्यात करता है। इनमें अमेरिका सबसे बड़ा बाजार है।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने अमेरिका को 9.7 अरब डॉलर मूल्य की दवाओं का निर्यात किया। यह भारत के कुल 25.8 अरब डॉलर के वैश्विक दवा निर्यात का लगभग 38 प्रतिशत है। वहीं अमेरिकी जेनेरिक दवा बाजार में भारतीय कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत मानी जाती है।

Trump Tariff on Generic Medicines: ऐसे में यदि प्रस्तावित टैरिफ लागू होता है तो भारतीय फार्मा कंपनियों की लागत बढ़ सकती है, प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रभावित हो सकती है और अमेरिकी बाजार में दवाओं की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।

Trump Tariff on Generic Medicines: भारतीय फार्मा कंपनियों के सामने बढ़ सकती हैं चुनौतियां

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कंपनियां अमेरिका में विनिर्माण इकाइयां स्थापित करती हैं तो उन्हें भारी निवेश करना होगा। वहीं जो कंपनियां ऐसा नहीं करेंगी, उन्हें ऊंचे टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में कारोबार करना महंगा हो सकता है।

Trump Tariff on Generic Medicines: हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह प्रस्ताव अंतिम रूप में कब और किस स्वरूप में लागू होगा। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि क्या इस नीति में भारत सहित अन्य देशों के लिए कोई विशेष प्रावधान या छूट दी जाती है।

Trump Tariff on Generic Medicines: भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर रहेगी नजर

गौरतलब है कि फरवरी 2026 में भारत और अमेरिका के बीच हुई व्यापार वार्ता में जेनेरिक दवाओं से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर सहमति बनी थी। ऐसे में ट्रंप की नई घोषणा के बाद भारतीय सरकार और फार्मा उद्योग की निगाहें अमेरिका की आगामी व्यापार नीति और दोनों देशों के बीच संभावित वार्ता पर टिकी रहेंगी।

यदि यह टैरिफ बिना किसी संशोधन के लागू होता है तो भारतीय दवा उद्योग के लिए यह हाल के वर्षों की सबसे बड़ी व्यापारिक चुनौतियों में से एक साबित हो सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *