Tina Yadav Ganga Aarti Varanasi : वाराणसी- दशाश्वमेध घाट पर मां गंगा की आरती में शामिल हुईं टीना यादव, अदिति यादव और सांसद प्रिया सरोज

Tina Yadav Ganga Aarti Varanasi : वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर गंगा सेवा निधि की विश्व प्रसिद्ध मां गंगा आरती में अखिलेश यादव की पुत्री टीना यादव, अदिति यादव और मछलीशहर सांसद प्रिया सरोज ने वैदिक रीति से मां गंगा का पूजन किया। टीना यादव ने विजिटर बुक में गंगा स्वच्छता का संदेश भी लिखा।

Tina Yadav Ganga Aarti Varanasi : वाराणसी। विश्व प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट पर गंगा सेवा निधि द्वारा आयोजित होने वाली मां गंगा की दैनिक भव्य आरती में सोमवार को उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पुत्री टीना यादव, अदिति यादव तथा मछलीशहर से सांसद प्रिया सरोज शामिल हुईं। तीनों ने वैदिक विधि-विधान से मां गंगा का पूजन-अर्चन किया और श्रद्धाभाव से मां गंगा की दिव्य आरती का दर्शन किया।

Tina Yadav Ganga Aarti Varanasi : गंगा आरती के दौरान घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं के बीच आध्यात्मिक और भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। शंखनाद, वैदिक मंत्रोच्चार और दीपों की अलौकिक छटा के बीच तीनों अतिथि पूरी श्रद्धा के साथ आरती में शामिल रहीं। लगभग एक घंटे तक वे दशाश्वमेध घाट पर मौजूद रहकर धार्मिक अनुष्ठानों का हिस्सा बनीं।

Tina Yadav Ganga Aarti Varanasi : विजिटर बुक में लिखा गंगा स्वच्छता का संदेश

आरती के उपरांत टीना यादव ने गंगा सेवा निधि की विजिटर बुक में अपने भाव व्यक्त करते हुए लिखा कि “भगवती मां गंगा की आरती ने मंत्रमुग्ध कर दिया। हम सभी को उनकी स्वच्छता के लिए कार्य करना चाहिए। भगवती मां गंगा मां स्वरूप हैं।” उनके इस संदेश को उपस्थित लोगों ने सराहा और इसे गंगा संरक्षण के प्रति जागरूकता का महत्वपूर्ण संदेश बताया।

Tina Yadav Ganga Aarti Varanasi : गंगा सेवा निधि ने किया सम्मान

इस अवसर पर गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्रा एवं कोषाध्यक्ष आशीष तिवारी ने टीना यादव, अदिति यादव और सांसद प्रिया सरोज का अंगवस्त्र, प्रसाद एवं स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत एवं सम्मान किया। 

Tina Yadav Ganga Aarti Varanasi : गंगा सेवा निधि के पदाधिकारियों ने कहा कि मां गंगा की आरती केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और गंगा संरक्षण का वैश्विक संदेश देने का माध्यम भी है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु प्रतिदिन इस दिव्य आरती के साक्षी बनते हैं, जिससे काशी की आध्यात्मिक पहचान और अधिक सशक्त होती है।

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