SEBI Share Buyback : SEBI ने बदले शेयर बायबैक के नियम- 1 अगस्त 2026 से कंपनियां फिर खरीद सकेंगी अपने ही शेयर, जानिए निवेशकों पर क्या होगा असर

SEBI Share Buyback : SEBI ने 1 अगस्त 2026 से ओपन मार्केट शेयर बायबैक को फिर से लागू करने का फैसला किया है। जानिए नए नियम, 66 कार्य दिवस की समयसीमा, 15% सीमा, मर्चेंट बैंकर से जुड़ी राहत और निवेशकों पर इसका क्या असर पड़ेगा।

SEBI Share Buyback: 1 अगस्त से लागू होंगे नए नियम, कंपनियां फिर खरीद सकेंगी अपने ही शेयर

भारतीय शेयर बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण नियामकीय बदलाव करते हुए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने ओपन मार्केट के माध्यम से शेयर बायबैक (Share Buyback) की व्यवस्था को दोबारा लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। यह नया नियम 1 अगस्त 2026 से प्रभावी होगा। इसके बाद सूचीबद्ध कंपनियां सामान्य ट्रेडिंग सिस्टम के जरिए बाजार से अपने ही शेयरों की खरीद (Buyback) कर सकेंगी।

SEBI Share Buyback : सेबी का मानना है कि संशोधित व्यवस्था से शेयर बायबैक की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और निवेशकों के हितों के अनुरूप बनेगी। साथ ही कंपनियों को अतिरिक्त नकदी के बेहतर उपयोग और पूंजी प्रबंधन (Capital Allocation) का प्रभावी विकल्प मिलेगा।

SEBI Share Buyback : आखिर क्या होता है शेयर बायबैक?

शेयर बायबैक वह प्रक्रिया है जिसमें कोई सूचीबद्ध कंपनी अपने ही जारी किए गए शेयर बाजार से वापस खरीदती है। इससे बाजार में उपलब्ध शेयरों की संख्या घटती है और कई मामलों में प्रति शेयर आय (EPS) तथा शेयरधारकों के मूल्य (Shareholder Value) में सुधार देखने को मिलता है। कंपनियां आमतौर पर तब बायबैक करती हैं जब उनके पास अतिरिक्त नकदी होती है या उन्हें लगता है कि उनका शेयर वास्तविक मूल्य से कम कीमत पर कारोबार कर रहा है।

SEBI Share Buyback : पहले क्यों बंद कर दी गई थी ओपन मार्केट बायबैक व्यवस्था?

वर्ष 2025 में सेबी ने चरणबद्ध तरीके से ओपन मार्केट शेयर बायबैक पर रोक लगा दी थी। नियामक का मानना था कि इस व्यवस्था में सभी निवेशकों को समान अवसर नहीं मिल पाता था। इसके अलावा टैक्स से जुड़ी कुछ असमानताओं और पारदर्शिता संबंधी चिंताओं के कारण इस प्रणाली को बंद किया गया था। अब संशोधित नियमों और अतिरिक्त सुरक्षा उपायों के साथ इसे फिर से लागू किया गया है।

SEBI Share Buyback : नए नियमों की प्रमुख बातें

1. बायबैक की अधिकतम सीमा 15 प्रतिशत

ओपन मार्केट के जरिए किया जाने वाला शेयर बायबैक कंपनी की चुकता पूंजी (Paid-up Capital) और मुक्त भंडार (Free Reserves) के 15 प्रतिशत तक ही सीमित रहेगा। इसकी गणना कंपनी के स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड दोनों वित्तीय विवरणों के आधार पर की जाएगी।

2. अलग बायबैक विंडो की जरूरत नहीं

अब कंपनियों को शेयर बायबैक के लिए अलग से विशेष ट्रेडिंग विंडो बनाने की आवश्यकता नहीं होगी। वे सामान्य ट्रेडिंग सिस्टम के माध्यम से ही अपने शेयर खरीद सकेंगी।

3. 66 कार्य दिवस में पूरी होगी प्रक्रिया

नई व्यवस्था के तहत सार्वजनिक घोषणा के चार कार्य दिवस के भीतर बायबैक शुरू करना होगा और पूरी प्रक्रिया 66 कार्य दिवस के अंदर समाप्त करनी होगी। पहले यह अवधि अधिकतम छह महीने तक हो सकती थी।

4. मर्चेंट बैंकर की अनिवार्यता समाप्त

सेबी ने बायबैक प्रक्रिया में मर्चेंट बैंकर नियुक्त करना अनिवार्य नहीं रखा है। यदि कंपनी मर्चेंट बैंकर नियुक्त नहीं करती है, तो उसकी जिम्मेदारियां कंपनी, अनुपालन अधिकारी, वैधानिक ऑडिटर, सचिवीय ऑडिटर और संबंधित स्टॉक एक्सचेंज मिलकर निभाएंगे।

5. ऑडिटर और अनुपालन अधिकारी की भूमिका बढ़ी

नई व्यवस्था में वैधानिक ऑडिटर एस्क्रो खाते की निगरानी करेगा, जबकि कंपनी का अनुपालन अधिकारी यह सुनिश्चित करेगा कि बायबैक के तहत खरीदे गए सभी शेयर नियमानुसार निरस्त (Extinguish) किए जाएं।

6. न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता का पालन अनिवार्य

सेबी ने स्पष्ट किया है कि कोई भी कंपनी ऐसा बायबैक नहीं कर सकेगी जिससे न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (Minimum Public Shareholding – MPS) के नियमों का उल्लंघन हो। साथ ही दो बायबैक ऑफर के बीच न्यूनतम अंतर अब कंपनी अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अनुसार होगा।

SEBI Share Buyback : निवेशकों पर क्या होगा असर?

विशेषज्ञों के अनुसार, ओपन मार्केट बायबैक की वापसी से निवेशकों को कई सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। बाजार में गिरावट के दौरान कंपनियां अपने शेयर खरीदकर कीमतों को सहारा दे सकती हैं। अतिरिक्त नकदी का बेहतर उपयोग होने से शेयरधारकों का विश्वास मजबूत हो सकता है। शेयरों की संख्या कम होने पर प्रति शेयर आय (EPS) में सुधार संभव है।

SEBI Share Buyback : समयबद्ध और पारदर्शी प्रक्रिया से निवेशकों को अधिक भरोसेमंद व्यवस्था मिलेगी। कंपनियों को पूंजी प्रबंधन में अधिक लचीलापन प्राप्त होगा। हालांकि निवेशकों को केवल बायबैक की घोषणा के आधार पर निवेश निर्णय लेने के बजाय कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, नकदी स्थिति और दीर्घकालिक संभावनाओं का भी मूल्यांकन करना चाहिए।

SEBI Share Buyback : क्यों महत्वपूर्ण है SEBI का यह फैसला?

पूंजी बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे सूचीबद्ध कंपनियों को अतिरिक्त नकदी के बेहतर उपयोग का विकल्प मिलेगा और बाजार में अस्थिरता के समय शेयरों को समर्थन भी मिल सकेगा। साथ ही नए नियम प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध बनाएंगे। यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो इससे कंपनियों और निवेशकों—दोनों को दीर्घकालिक लाभ मिलने की संभावना है।

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