Mother’s Day Emotional Story : मदर्स डे पर बेटी ने मां को दिया कंधा, आखिरी सफर में भी अकेले निभाया बेटे का फर्ज

Mother’s Day Emotional Story : वाराणसी में मदर्स डे पर सामने आई एक भावुक कहानी ने सभी की आंखें नम कर दीं। बेटी सुनीता ने आर्थिक तंगी और अकेलेपन के बीच अपनी मां को कंधा दिया और मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार कर बेटे का फर्ज निभाया।

Mother’s Day Emotional Story : मदर्स डे पर नम कर देने वाली कहानी- बेटी ने मां को दिया कंधा, आखिरी सफर में भी अकेले निभाया बेटे का फर्ज

Mother’s Day Emotional Story : वाराणसी। मदर्स डे पर वाराणसी से सामने आई एक भावुक कहानी ने हर किसी की आंखें नम कर दीं। यह कहानी है सूजाबाद पड़ाव की रहने वाली सुनीता की, जिसने जिंदगीभर संघर्षों से लड़ते हुए अपनी मां का सहारा बनने का फर्ज निभाया और आखिर में उनकी अर्थी को कंधा देकर बेटे की जिम्मेदारी भी निभाई। कबीरचौरा अस्पताल में मां के शव के पास बैठी सुनीता लगातार रोते हुए लोगों से मदद की गुहार लगा रही थी। उसकी जुबान पर बस एक ही बात थी — “भईया… मेरी मां का प्रवाह करवा दीजिए… मेरे पास पैसे नहीं हैं।”

Mother’s Day Emotional Story : पिता और पति का साथ छूटा, मां ही बनी जिंदगी का सहारा

सुनीता की जिंदगी संघर्षों से भरी रही। पहले पिता का साया सिर से उठ गया। शादी हुई तो लगा जिंदगी संभल जाएगी, लेकिन कुछ समय बाद पति ने भी साथ छोड़ दिया। इसके बाद वह मायके लौट आई, जहां मां और भाई ही उसकी दुनिया थे। लेकिन किस्मत ने यहां भी उसे अकेला कर दिया। कुछ साल पहले भाई की भी मौत हो गई। इसके बाद मां और बेटी एक-दूसरे का सहारा बनकर जिंदगी काट रही थीं।

Mother’s Day Emotional Story : दूसरों के घरों में काम कर चलाती थी घर

सुनीता ने बताया कि बीते दो वर्षों से वह अपनी बीमार मां के साथ पड़ाव इलाके में किराए के छोटे से मकान में रह रही थी। घर चलाने और मां का इलाज कराने के लिए वह लोगों के घरों में झाड़ू-पोछा और घरेलू काम करती थी। दिनभर मेहनत के बाद जो थोड़े बहुत पैसे मिलते, उसी से दवा, इलाज और दोनों का गुजारा चलता था। मां की तबीयत लगातार खराब रहती थी और सुनीता हर पल उनकी सेवा में लगी रहती थी।

Mother’s Day Emotional Story : बीमारी के चलते मां की मौत, टूट गई बेटी

शुक्रवार रात कबीरचौरा अस्पताल में इलाज के दौरान सुनीता की मां ने दम तोड़ दिया। मां की मौत के बाद सुनीता पूरी तरह टूट गई। दर्द सिर्फ मां को खोने का नहीं था, बल्कि उसके पास अंतिम संस्कार तक के पैसे नहीं थे। अस्पताल परिसर में वह घंटों शव के पास बैठी रोती रही, लेकिन मदद के लिए कोई अपना सामने नहीं आया।

Mother’s Day Emotional Story : मदद के लिए आगे आए अमन कबीर

इसी बीच गरीबों और जरूरतमंदों की मदद के लिए पहचाने जाने वाले अमन कबीर को इस घटना की जानकारी मिली। सूचना मिलते ही वह तुरंत अस्पताल पहुंचे। सुनीता की हालत देखकर अमन कबीर भी भावुक हो गए। रोते हुए सुनीता ने उनसे कहा, “भईया… मेरी मां का प्रवाह करवा दीजिए…”
यह सुनते ही अमन कबीर ने बिना देर किए पूरी जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली। उन्होंने हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार की व्यवस्था करवाई।

Mother’s Day Emotional Story : बेटी ने मां की अर्थी को दिया कंधा, मुखाग्नि देकर निभाया बेटे का फर्ज

मणिकर्णिका घाट पर एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। सुनीता ने अपनी मां की अर्थी को कंधा दिया और फिर मुखाग्नि देकर बेटे का फर्ज निभाया। घाट पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। हर कोई बेटी के इस साहस और मां के प्रति उसके समर्पण की चर्चा करता नजर आया।

Mother’s Day Emotional Story : “जब कोई अपना नहीं था, तब गैर ने भाई बनकर साथ दिया”

अंतिम संस्कार के बाद सुनीता ने नम आंखों से अमन कबीर का धन्यवाद किया। उसने कहा कि जब उसका कोई अपना साथ देने वाला नहीं था, तब अमन

Mother’s Day Emotional Story : कबीर ने भाई बनकर उसका हाथ थामा।

मदर्स डे पर सामने आई यह कहानी सिर्फ एक बेटी के संघर्ष की नहीं, बल्कि मां-बेटी के अटूट रिश्ते और इंसानियत की मिसाल भी बन गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *