Local Self Government : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में स्थानीय स्वशासन पर एक दिवसीय संगोष्ठी आयोजित हुई। प्रो. ए.के. त्यागी ने ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों को अधिक प्रभावी, जवाबदेह एवं जनोन्मुख बनाने पर जोर दिया।
Local Self Government : काशी विद्यापीठ में ‘स्थानीय स्वशासनः उपलब्धियां, चुनौतियां एवं भविष्य की दिशा’ विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी, पंचायतों और नगरीय निकायों को सशक्त बनाने पर हुआ मंथन

Local Self Government : वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के राजनीति विज्ञान विभाग की ओर से गुरुवार को ‘स्थानीय स्वशासनः उपलब्धियां, चुनौतियां एवं भविष्य की दिशा’ विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। सामाजिक विज्ञान संकाय के स्मार्ट कक्ष में आयोजित इस संगोष्ठी में स्थानीय लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका, उनकी उपलब्धियों, वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विशेषज्ञों ने विस्तार से विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने स्थानीय स्वशासन की नीतियों और वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोकतांत्रिक संस्थाओं को सशक्त बनाने की दिशा में देश में कई महत्वपूर्ण प्रयास किए गए हैं, लेकिन अभी भी इन संस्थाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।
Local Self Government : प्रो. त्यागी ने कहा कि ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों को अधिक प्रभावी, उत्तरदायी एवं जनोन्मुख बनाने के लिए सतत प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक मजबूती तभी सुनिश्चित हो सकती है, जब शासन-व्यवस्था में आम जनता की भागीदारी बढ़े और स्थानीय स्तर पर लोगों को निर्णय प्रक्रिया से जोड़ा जाए।
Local Self Government : 73वें और 74वें संविधान संशोधन ने स्थानीय लोकतंत्र को दी मजबूती
संगोष्ठी के मुख्य अतिथि प्रो. चन्द्रशेखर प्राण, पंचपरमेश्वर विद्यापीठ, प्रयागराज ने स्थानीय स्वशासन की संरचना, कार्यप्रणाली और समकालीन चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने स्थानीय स्वशासन के तीनों स्तरों—ग्राम पंचायत, क्षेत्र (ब्लॉक) पंचायत और जिला पंचायत—की संरचना, शक्तियों एवं दायित्वों को विस्तारपूर्वक समझाया। प्रो. प्राण ने कहा कि संविधान के 73वें और 74वें संशोधनों के माध्यम से स्थानीय स्वशासन को संवैधानिक मान्यता प्रदान की गई। इससे देश में लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की प्रक्रिया को मजबूती मिली और स्थानीय स्तर पर जनता की भागीदारी को संस्थागत आधार प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं ने ग्रामीण विकास, जनकल्याण और लोकतांत्रिक सहभागिता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आज भी इन संस्थाओं को वास्तविक अर्थों में पर्याप्त शक्तियों का हस्तांतरण नहीं हो सका है। स्थानीय संस्थाओं को अधिकारों, संसाधनों और जिम्मेदारियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है।
Local Self Government : स्थानीय स्वशासन लोकतंत्र की आधारशिला : प्रो. सतीश कुमार
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता प्रो. सतीश कुमार ने स्थानीय स्वशासन की अवधारणा, उसके ऐतिहासिक विकास, संवैधानिक आधार और वर्तमान चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्वशासन लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है, जो शासन को जनता के करीब लाने के साथ-साथ जनसहभागिता को भी मजबूत करता है। उन्होंने 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि इन संशोधनों ने पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों को संवैधानिक मान्यता देकर लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की प्रक्रिया को मजबूत किया। प्रो. सतीश कुमार ने स्थानीय स्वशासन संस्थाओं की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन संस्थाओं ने ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय और स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि बदलते सामाजिक और प्रशासनिक परिवेश में स्थानीय निकायों के सामने नई चुनौतियां भी सामने आई हैं, जिनसे निपटने के लिए संस्थागत क्षमता और जवाबदेही को और मजबूत करने की जरूरत है।
Local Self Government : शोधार्थियों और छात्रों ने प्रस्तुत किए शोधपत्र
संगोष्ठी के तकनीकी सत्र में विश्वविद्यालय के शोधार्थियों एवं छात्रों ने स्थानीय स्वशासन से जुड़े विभिन्न विषयों पर शोधपत्र प्रस्तुत किए। इस दौरान स्थानीय शासन की कार्यप्रणाली, लोकतांत्रिक सहभागिता, पंचायतों की भूमिका तथा स्थानीय निकायों के समक्ष मौजूद चुनौतियों जैसे विषयों पर विचार रखे गए। तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो. शमीम राईन, सकलडीहा पीजी कॉलेज ने की। उन्होंने शोधार्थियों द्वारा प्रस्तुत शोधपत्रों पर चर्चा करते हुए स्थानीय स्वशासन के अध्ययन में अकादमिक शोध की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम में अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत कार्यक्रम संयोजक एवं राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. मोहम्मद आरिफ ने किया। संगोष्ठी का संचालन डॉ. विजय कुमार सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रेशम लाल ने प्रस्तुत किया।
Local Self Government : इस अवसर पर डॉ. विजय कुमार, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. ज्योति त्रिपाठी, डॉ. सी.के. मणि पाण्डेय, डॉ. ज्ञान प्रकाश पाण्डेय सहित विभाग के शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र उपस्थित रहे। संगोष्ठी में विशेषज्ञों के विचारों के माध्यम से स्थानीय स्वशासन को और अधिक मजबूत, पारदर्शी, जवाबदेह तथा जनकेंद्रित बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।