Kashi Sanskriti Sansad 2026 : काशी संस्कृति संसद में सात हजार से अधिक युवा और करीब तीन हजार संत शामिल होंगे। जेन-जी कॉन्क्लेव, मनुस्मृति पर विमर्श, महारुद्राभिषेक और अंतरराष्ट्रीय कला शिविर होंगे प्रमुख आकर्षण।
Kashi Sanskriti Sansad 2026 : काशी में सजेगा संस्कृति और सनातन का महाकुंभ, 7 हजार जेन-जी और 3 हजार संतों की होगी भागीदारी; कला-संस्कृति का दिखेगा वैश्विक संगम
Kashi Sanskriti Sansad 2026 : वाराणसी। धर्म, अध्यात्म और भारतीय संस्कृति की प्राचीन नगरी काशी एक बार फिर संस्कृति और सनातन परंपराओं के विराट संगम की साक्षी बनने जा रही है। यहां आयोजित होने वाली संस्कृति संसद में इस बार संतों, धर्माचार्यों, विद्वानों और कलाकारों के साथ नई पीढ़ी की भागीदारी विशेष आकर्षण का केंद्र होगी। आयोजन में देशभर से सात हजार से अधिक युवाओं ने पंजीकरण कराया है, वहीं करीब तीन हजार संत-महात्माओं की सहभागिता प्रस्तावित है। संस्कृति संसद के माध्यम से भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं, सामाजिक विषयों और समकालीन चुनौतियों पर व्यापक विमर्श किया जाएगा।
Kashi Sanskriti Sansad 2026 : इस बार संस्कृति संसद में जेन-जी (Gen-Z) की सक्रिय भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है। इसके तहत आयोजित होने वाले जेन-जी कॉन्क्लेव में 90 प्रतिशत वक्ता युवा होंगे, जबकि 10 प्रतिशत विशेषज्ञ और मार्गदर्शक के रूप में अपनी भूमिका निभाएंगे। इसका उद्देश्य युवाओं को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने के साथ उन्हें अपने विचार रखने, सवाल पूछने और सामाजिक एवं सांस्कृतिक विषयों पर खुलकर चर्चा करने का मंच उपलब्ध कराना है।
Kashi Sanskriti Sansad 2026 : जेन-जी कॉन्क्लेव में युवा रखेंगे अपनी बात, मनुस्मृति पर भी होगा विमर्श
संस्कृति संसद का जेन-जी कॉन्क्लेव इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण होगा। इसमें युवाओं को केवल श्रोता के रूप में शामिल नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें विचार-विमर्श की प्रक्रिया का सक्रिय हिस्सा बनाया जाएगा। युवा भारतीय सभ्यता, सनातन परंपरा, सामाजिक व्यवस्था, सांस्कृतिक पहचान और आधुनिक समय में भारतीय मूल्यों की प्रासंगिकता जैसे विषयों पर अपनी बात रखेंगे।
आयोजन के दौरान मनुस्मृति से जुड़े विवादों और विभिन्न दृष्टिकोणों पर चर्चा के लिए समिति गठित करने की योजना भी है। इसके साथ ही हिंदू आचार संहिता तैयार करने के प्रस्ताव पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। इन विषयों के माध्यम से धार्मिक, सामाजिक और वैचारिक पहलुओं को समझने तथा अलग-अलग विचारों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जाएगा।
Kashi Sanskriti Sansad 2026 : संत-महात्माओं और प्रमुख हस्तियों का लगेगा जमावड़ा
संस्कृति संसद में देश के कई प्रमुख संत, धर्माचार्य, सामाजिक कार्यकर्ता और सांस्कृतिक क्षेत्र की प्रतिष्ठित हस्तियां शामिल होंगी। इनमें पद्मश्री स्वामी प्रदीप्तानंद, विष्णु शंकर जैन, महंत रवीन्द्र पुरी महाराज, स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, स्वामी चिदानंद सरस्वती, स्वामी ब्रह्मेशानंदाचार्य, मिलिंद परांडे और आलोक कुमार समेत कई प्रमुख नाम शामिल हैं। करीब तीन हजार संतों की भागीदारी से आयोजन को व्यापक धार्मिक और आध्यात्मिक स्वरूप मिलने की उम्मीद है। संतों के मार्गदर्शन में सनातन परंपरा, भारतीय ज्ञान परंपरा, धर्म और सामाजिक जीवन से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी।
Kashi Sanskriti Sansad 2026 : संस्कृति उत्सव में दिखेगी भारत की विविधता, लोक संगीत से शास्त्रीय नृत्य तक होंगी प्रस्तुतियां
संस्कृति संसद केवल वैचारिक और धार्मिक विमर्श तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसके साथ भारतीय कला, संगीत, नृत्य और लोक परंपराओं का भव्य उत्सव भी आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम के तहत प्रतिदिन शाम पांच बजे से रात नौ बजे तक संस्कृति उत्सव का आयोजन होगा। इसमें लोक संगीत, शास्त्रीय संगीत, पारंपरिक नृत्य और विभिन्न क्षेत्रों की लोककलाओं की प्रस्तुतियां होंगी। बनारस के स्थानीय कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे, वहीं पुडुचेरी से आने वाली मार्शल आर्ट्स टीम भी अपनी पारंपरिक कला का प्रदर्शन करेगी।
आयोजन में राष्ट्रीय चित्रकला और फोटोग्राफी प्रदर्शनी भी विशेष आकर्षण रहेगी। इसमें देश-विदेश के कलाकार अपनी कलाकृतियों के माध्यम से भारतीय सभ्यता, धार्मिक आस्था, तीर्थस्थलों और सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत करेंगे। रंगोली और बाल चित्रकला प्रतियोगिताओं के जरिए बच्चों को भी अपनी रचनात्मक प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।
Kashi Sanskriti Sansad 2026 : काशी विश्वनाथ धाम में होगा महारुद्राभिषेक, संत करेंगे बाबा का अभिषेक
संस्कृति संसद के मुख्य आयोजन से पहले दो नवंबर को श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में विशेष धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया जाएगा। इसमें देशभर से आने वाले संत-महात्मा बाबा विश्वनाथ का महारुद्राभिषेक करेंगे। इस धार्मिक अनुष्ठान के साथ संस्कृति, अध्यात्म और सनातन परंपराओं से जुड़े कार्यक्रमों का शुभारंभ होगा।
काशी विश्वनाथ धाम में होने वाला यह आयोजन काशी की धार्मिक पहचान और आध्यात्मिक परंपरा को भी विशेष रूप से रेखांकित करेगा। देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले संतों की उपस्थिति इसे और महत्वपूर्ण बनाएगी।
Kashi Sanskriti Sansad 2026 : अंतरराष्ट्रीय चित्रकला शिविर में 50 चित्रकारों ने दिखाई प्रतिभा
संस्कृति संसद और राज्य ललित कला अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय चित्रकला शिविर भी आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है। शिविर के दूसरे दिन 50 चित्रकारों के साथ बीएचयू, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ सहित सात कॉलेजों के 40 से अधिक जेन-जी और जेन-अल्फा प्रतिभागियों ने अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस शिविर में पद्मश्री दुलारी देवी, श्याम शर्मा, अद्वैत गडनायक और राजेश यादव जैसे प्रतिष्ठित कलाकारों ने हिस्सा लिया। वहीं श्रीलंका की सहाना इहतिसाम समेत अंतरराष्ट्रीय कलाकारों की मौजूदगी ने इसे वैश्विक स्वरूप प्रदान किया। मॉरीशस और बांग्लादेश के कलाकारों की भागीदारी से भारतीय कला और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर भी मिला।
Kashi Sanskriti Sansad 2026 : परंपरा और आधुनिकता के बीच संवाद का बनेगा मंच
संस्कृति संसद का व्यापक उद्देश्य भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और नई पीढ़ी के बीच संवाद को मजबूत करना है। एक ओर जहां संत-महात्मा और धर्माचार्य भारतीय ज्ञान परंपरा तथा आध्यात्मिक मूल्यों पर मार्गदर्शन देंगे, वहीं दूसरी ओर युवा समकालीन सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर अपनी राय रखेंगे। कला प्रदर्शनियों, सांस्कृतिक उत्सवों, चित्रकला शिविर और विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से भारतीय विरासत के विविध आयाम सामने आएंगे। सात हजार से अधिक युवाओं, करीब तीन हजार संतों और देश-विदेश के कलाकारों की सहभागिता के साथ काशी का यह आयोजन आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक विविधता और पीढ़ियों के बीच संवाद का महत्वपूर्ण मंच बनने जा रहा है।