MGKVP : काशी विद्यापीठ के 6 विद्यार्थियों ने रूस की मिनिन यूनिवर्सिटी के शोध सम्मेलन में लिया हिस्सा

MGKVP : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के अंग्रेजी विभाग के छह विद्यार्थियों ने रूस की मिनिन यूनिवर्सिटी के अंतरराष्ट्रीय शोध सम्मेलन में भाग लेकर भारतीय इतिहास, संस्कृति और विरासत पर शोध पत्र प्रस्तुत किए।

MGKVP : काशी विद्यापीठ के छह विद्यार्थियों ने रूस की मिनिन यूनिवर्सिटी के अंतरराष्ट्रीय शोध सम्मेलन में लिया हिस्सा, भारतीय इतिहास और विरासत पर प्रस्तुत किए शोध पत्र

MGKVP : वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के अंग्रेजी विभाग के छह विद्यार्थियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया है। विद्यार्थियों ने रूस की मिनिन यूनिवर्सिटी की ओर से आयोजित युवा शोधकर्ताओं के वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक सम्मेलन में प्रतिभाग कर भारत की समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया। सम्मेलन का मुख्य विषय ‘ऐतिहासिक स्मृति अनुसंधान के अंतःविषयक पहलू’ रहा।

MGKVP : अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. नीरज धनकड़ ने बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विभाग में रूसी भाषा के डिप्लोमा एवं एडवांस डिप्लोमा पाठ्यक्रम में अध्ययनरत छह विद्यार्थियों ने भाग लिया। सम्मेलन में विद्यार्थियों ने अपने शोध पत्रों के माध्यम से भारत के विभिन्न ऐतिहासिक शहरों, प्राचीन विश्वविद्यालयों, धार्मिक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को प्रस्तुत किया।

MGKVP : सम्मेलन में अनुराग यादव ने ‘लखनऊ का इतिहास’ विषय पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने लखनऊ की ऐतिहासिक पहचान और उससे जुड़ी स्मृतियों को रेखांकित किया। वहीं, प्रियंशी मिश्रा ने प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के गौरवशाली इतिहास और उसके विनाश से जुड़ी ऐतिहासिक स्मृतियों पर अपना शोध प्रस्तुत किया। उनके शोध में भारत की प्राचीन शिक्षा व्यवस्था और ज्ञान परंपरा के महत्वपूर्ण पक्ष सामने आए।

MGKVP : इसी क्रम में अमन यादव ने ‘द इंटरनल फ्लेम ऑफ मणिकर्णिका इन द सिटी ऑफ वाराणसी’ विषय के माध्यम से काशी के मणिकर्णिका घाट की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्ता को प्रस्तुत किया। उन्होंने वाराणसी की विशिष्ट पहचान और उससे जुड़ी ऐतिहासिक स्मृतियों को अपने शोध का आधार बनाया।

MGKVP : सुंदरी मौर्य ने ‘राम- कल, आज, हमेशा : एक भारतीय के दिल में बसी एक तस्वीर’ विषय पर शोध पत्र प्रस्तुत किया। इसमें भारतीय समाज और जनमानस में भगवान राम से जुड़ी सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक स्मृतियों को अभिव्यक्त किया गया। वहीं, निशार अहमद ने ‘बौद्ध धर्म की शिक्षाओं और परंपराओं का इतिहास’ विषय पर अपना शोध प्रस्तुत करते हुए बौद्ध धर्म की शिक्षाओं, परंपराओं और ऐतिहासिक विकास के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।

MGKVP : आकाश यादव ने ‘मुगल इतिहास और ऐतिहासिक स्मृतियों के स्रोत: बाबरनामा और अकबरनामा का तुलनात्मक अध्ययन’ विषय पर शोध पत्र प्रस्तुत किया। इसमें मुगलकालीन इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण ऐतिहासिक ग्रंथों बाबरनामा और अकबरनामा की उपयोगिता एवं ऐतिहासिक स्रोतों के रूप में उनकी भूमिका का तुलनात्मक अध्ययन किया गया।

MGKVP : डॉ. नीरज धनकड़ ने बताया कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य विभिन्न देशों और क्षेत्रों के ऐतिहासिक शहरों, महत्वपूर्ण स्थलों, उनसे जुड़ी घटनाओं तथा सांस्कृतिक विरासत का अंतःविषयक दृष्टिकोण से अध्ययन एवं प्रस्तुतीकरण करना था। इस मंच पर काशी विद्यापीठ के विद्यार्थियों ने अपने शोध के माध्यम से भारत की विविधतापूर्ण ऐतिहासिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों के सामने रखा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक आयोजनों में विद्यार्थियों की भागीदारी से उन्हें वैश्विक स्तर पर अपने शोध और विचार प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है। साथ ही विभिन्न देशों की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को समझने, अकादमिक संवाद स्थापित करने और शोध के नए आयामों से जुड़ने का अवसर भी प्राप्त होता है।

MGKVP : इस सम्मेलन में काशी विद्यापीठ के छह विद्यार्थियों की सहभागिता विश्वविद्यालय के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक गतिविधियों में बढ़ती भागीदारी और भारतीय ज्ञान, इतिहास एवं संस्कृति को वैश्विक मंच पर पहुंचाने के प्रयासों को भी नई पहचान मिली है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *