India US Tariff : रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका 100% तक टैरिफ लगाने की तैयारी में है। भारत, चीन समेत 10 देशों को प्रस्तावित अमेरिकी बिल में संभावित कार्रवाई के दायरे में रखा गया है।
India US Tariff : रूस से तेल खरीदना भारत को पड़ेगा महंगा? अमेरिका के नए टैरिफ बिल में भारत-चीन समेत 10 देशों के नाम
India-US Tariff News: रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 को आगे बढ़ाया गया है। इसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति को देने का प्रावधान है। भारत और चीन समेत 10 देशों को संभावित टैरिफ के लिए स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करने वाला संशोधन भी सामने आया है।
India US Tariff : महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत पर अभी 100 प्रतिशत टैरिफ लागू नहीं हुआ है। अमेरिकी संसद में विधेयक की प्रक्रिया जारी है और अंतिम तौर पर कानून बनने तथा राष्ट्रपति द्वारा किसी देश पर टैरिफ लगाने के फैसले के बाद ही इसका वास्तविक असर सामने आएगा।
India US Tariff : रूस से तेल खरीदने पर 100% तक टैरिफ का प्रस्ताव
अमेरिकी संसद में आगे बढ़ रहे विधेयक का मकसद रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार मिल सकता है, जो रूस से ऊर्जा उत्पादों की खरीद जारी रखते हैं। सीनेट से पारित संस्करण में रूस के प्रमुख ऊर्जा खरीदारों पर कार्रवाई का प्रावधान था, लेकिन देशों के नाम सीधे तौर पर नहीं दिए गए थे। अब प्रतिनिधि सभा में पेश किए गए संशोधन में कुछ देशों को स्पष्ट रूप से संभावित टैरिफ के दायरे में रखने का प्रस्ताव है।
India US Tariff : भारत और चीन समेत इन 10 देशों के नाम
कांग्रेस सदस्य स्टेनी होयर के प्रस्तावित संशोधन में जिन 10 देशों को संभावित 100 प्रतिशत तक टैरिफ के लिए पात्र बनाने की बात कही गई है, उनमें शामिल हैं:
भारत
चीन
तुर्किये
अजरबैजान
हंगरी
स्लोवाक रिपब्लिक
संयुक्त अरब अमीरात
सिंगापुर
कजाकिस्तान
किर्गिज रिपब्लिक
हालांकि, इन देशों का नाम संशोधन में शामिल होने का अर्थ यह नहीं है कि इन पर स्वतः 100 प्रतिशत शुल्क लग जाएगा। यह केवल उन्हें प्रस्तावित secondary tariff mechanism के तहत संभावित कार्रवाई के दायरे में रखता है।
India US Tariff : अमेरिका रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर क्यों दबाव बना रहा है?
अमेरिका का तर्क है कि रूस की ऊर्जा बिक्री से मिलने वाला राजस्व उसके युद्ध अभियान को वित्तीय आधार देता है। इसी वजह से अमेरिकी नीति में केवल रूस पर प्रत्यक्ष प्रतिबंध लगाने के बजाय उसके प्रमुख ऊर्जा खरीदारों पर भी दबाव बनाने का विकल्प रखा जा रहा है। प्रस्तावित कानून में रूस के ऊर्जा क्षेत्र के साथ-साथ उन जहाजों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है, जिन पर प्रतिबंधों से बचने में मदद करने का आरोप है।
India US Tariff : भारत के लिए क्यों अहम है यह मामला?
रूस भारत के प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। यूक्रेन युद्ध के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी कच्चे तेल की खरीद में बड़ी भूमिका निभाई है। भारत का पक्ष रहा है कि ऊर्जा आयात देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक जरूरतों से जुड़ा विषय है। अगर भविष्य में अमेरिका भारत पर अतिरिक्त 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का फैसला करता है, तो इसका सीधा प्रभाव अमेरिकी बाजार में भारतीय वस्तुओं के निर्यात की लागत पर पड़ सकता है। ऐसे में भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिहाज से अतिरिक्त चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रस्तावित कानून किस रूप में अंतिम रूप लेता है और अमेरिकी राष्ट्रपति वास्तव में टैरिफ लगाने की शक्ति का इस्तेमाल करते हैं या नहीं।
India US Tariff : अभी भारत पर लागू नहीं हुआ 100% टैरिफ
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि वर्तमान स्थिति में भारत पर नया 100 प्रतिशत टैरिफ लागू नहीं हुआ है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 16 सितंबर को विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए 214-211 के अंतर से प्रक्रिया संबंधी कदम को मंजूरी दी। इसके बाद अंतिम मतदान की प्रक्रिया बाकी है। विधेयक को कानून बनने के लिए प्रतिनिधि सभा की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति के पास जाना होगा। इसके अलावा, अमेरिकी सांसदों के बीच भी इस प्रावधान को लेकर मतभेद हैं। एक अन्य संशोधन में राष्ट्रपति को व्यापक secondary tariff अधिकार देने वाले प्रावधान को हटाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसलिए अंतिम कानून का स्वरूप मौजूदा प्रस्ताव से अलग हो सकता है।
India US Tariff : भारत-अमेरिका व्यापार पर क्या हो सकता है असर?
यदि भविष्य में भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाता है, तो इसका असर केवल रूस से खरीदे जाने वाले तेल तक सीमित नहीं रहेगा। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य रूस के ऊर्जा खरीदारों के साथ उनके अमेरिकी व्यापार पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की शक्ति देना है। इसका संभावित असर भारतीय निर्यातकों, अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की कीमत और दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों पर पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव टैरिफ की दर, लागू होने वाले उत्पादों और अमेरिकी प्रशासन द्वारा बनाए जाने वाले नियमों पर निर्भर करेगा।
India US Tariff : BRICS के बीच भी टैरिफ नीति चर्चा में
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब नई दिल्ली में हुए BRICS शिखर सम्मेलन में वैश्विक व्यापार, संरक्षणवाद और एकतरफा व्यापारिक उपायों पर भी चर्चा हुई। भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग भी व्यापक द्विपक्षीय संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात में दोनों देशों ने रणनीतिक और आर्थिक सहयोग जारी रखने पर जोर दिया था। ऐसे में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी संभावित टैरिफ का मुद्दा भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा, निर्यात और भारत-अमेरिका संबंधों—तीनों स्तरों पर महत्वपूर्ण हो सकता है।
India US Tariff : आगे क्या होगा?
अब निगाहें अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की अंतिम प्रक्रिया पर हैं। इसके बाद यह तय होगा कि रूस के ऊर्जा खरीदारों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने वाला प्रावधान किस रूप में कानून का हिस्सा बनता है। यदि कानून बनता है, तब भी भारत पर टैरिफ लगना स्वतः तय नहीं होगा; अमेरिकी राष्ट्रपति के अगले फैसले की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।