Education and Indian Culture : संस्कृति संसद के समापन सत्र में काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने कहा कि संस्कारों से दूर हुई शिक्षा समाज के पतन का कारण बनती है। उन्होंने बच्चों को मोबाइल के बजाय संस्कार देने और युवाओं को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने की अपील की।
Education and Indian Culture : जब-जब शिक्षा संस्कारों से विरक्त हुई, तब-तब समाज का पतन हुआ : प्रो. आनन्द कुमार त्यागी
Education and Indian Culture : संस्कृति संसद के समापन सत्र में गंगा, भारतीय संस्कृति और संस्कार आधारित शिक्षा पर हुई चर्चा; बच्चों को मोबाइल के बजाय संस्कार देने की अपील
Education and Indian Culture : वाराणसी। सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित तीन दिवसीय संस्कृति संसद का समापन सत्र भारतीय संस्कृति, शिक्षा, संस्कार और गंगा संरक्षण के संदेश के साथ संपन्न हुआ। सत्र में वक्ताओं ने गंगा को देश की अमूल्य विरासत और सांस्कृतिक धरोहर बताते हुए इसके संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की मूल चेतना को सुरक्षित रखने के लिए नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं, ज्ञान और संस्कारों से जोड़ना आवश्यक है।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने शिक्षा और संस्कारों के आपसी संबंध पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जब-जब शिक्षा संस्कारों से विरक्त हुई है, तब-तब पतन हुआ है। वहीं, जहां-जहां शिक्षा के माध्यम से चरित्र निर्माण हुआ है, वहां उन्नति और विकास के नए मार्ग प्रशस्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृति को समझने के साथ-साथ ज्ञान की प्रकृति को समझना भी जरूरी है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री या रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति का चरित्र निर्माण करना है।
Education and Indian Culture : प्रो. त्यागी ने कहा कि चरित्र निर्माण के लिए संस्कृति का ज्ञान आवश्यक है और इस ज्ञान की पहली पाठशाला परिवार होता है। परिवार से ही बच्चों में संस्कारों का विकास होता है। इसलिए बच्चों को प्रारंभ से ही भारतीय संस्कृति, परंपराओं और नैतिक मूल्यों से परिचित कराना चाहिए। संस्कारयुक्त शिक्षा ही एक बेहतर समाज और मजबूत राष्ट्र के निर्माण का आधार बन सकती है।
Education and Indian Culture : बच्चों को मोबाइल के बजाय संस्कार देने की अपील
कुलपति ने देश की माताओं और अभिभावकों से विशेष अपील करते हुए कहा कि छोटे बच्चों को मनोरंजन के नाम पर मोबाइल फोन पकड़ा कर उन्हें उसके भरोसे न छोड़ें। मोबाइल का अत्यधिक इस्तेमाल बच्चों के भविष्य और उनके व्यक्तित्व के विकास को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चों को मोबाइल की आदत लगाने के बजाय उन्हें अच्छे संस्कार दें और सनातन संस्कृति से जोड़ें। परिवार में बच्चों को अपनी परंपराओं, महापुरुषों के जीवन, नैतिक मूल्यों और भारतीय जीवन पद्धति से परिचित कराने की जरूरत है।
Education and Indian Culture : भारतीय ज्ञान को युवाओं तक पहुंचाना जरूरी
प्रो. त्यागी ने कहा कि आज देश के युवाओं को भारतीय ज्ञान परंपरा से परिचित कराना अत्यंत आवश्यक है। भारत का प्राचीन ज्ञान विश्व के विभिन्न देशों तक पहुंचा है। ऐसे में आवश्यकता है कि विदेशों में पहुंचे भारतीय ज्ञान को पुनः संकलित कर भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराया जाए, ताकि देश के युवा अपनी ज्ञान परंपरा से जुड़ सकें। अपनी भाषा में भारतीय ज्ञान और संस्कृति की समझ विकसित होने से युवाओं का भटकाव रोकने में भी मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की मांग है। शिक्षा, परिवार और समाज को मिलकर इस दिशा में प्रयास करना होगा। संस्कारों से युक्त शिक्षा, सांस्कृतिक चेतना और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति सम्मान ही देश के उज्ज्वल भविष्य का आधार बन सकते हैं।
Education and Indian Culture : समापन सत्र में गंगा संरक्षण को भी महत्वपूर्ण विषय के रूप में रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान, आस्था और ऐतिहासिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। इसलिए इसकी निर्मलता और अविरलता बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।