Buddha Purnima Sarnath 2026 : सारनाथ में उमड़ा आस्था का सागर: बुद्ध पूर्णिमा पर 2570वीं जयंती, अस्थि दर्शन और 5000 दीपों से जगमगाएगा मूलगंध कुटी विहार

Buddha Purnima Sarnath 2026 : उत्तर प्रदेश के वाराणसी के ऐतिहासिक सारनाथ में बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।

Buddha Purnima Sarnath 2026 : गौतम बुद्ध की 2570वीं जयंती के अवसर पर यहां स्थित मूलगंध कुटी विहार में हजारों श्रद्धालु पवित्र अस्थि अवशेषों के दर्शन के लिए उमड़ पड़े हैं। सुबह 6:30 बजे से दर्शन की शुरुआत हुई, जिसमें देश-विदेश से आए बौद्ध अनुयायियों और पर्यटकों ने भाग लिया। निर्धारित समय तक दर्शन के बाद पवित्र अवशेषों को पुनः सुरक्षित स्थान पर रख दिया जाएगा।

Buddha Purnima Sarnath 2026 : बुद्ध पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व

बुद्ध पूर्णिमा बौद्ध धर्म में सबसे पवित्र दिन माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन गौतम बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण हुआ था। इस अवसर पर मंदिर परिसर में विश्व शांति के लिए विशेष पूजा-अर्चना और प्रार्थना सभाएं आयोजित की गईं, जिनमें बड़ी संख्या में भिक्षु और श्रद्धालु शामिल हुए।

Buddha Purnima Sarnath 2026 : 5000 दीपों से रोशन होगा विहार

शाम के समय मूलगंध कुटी विहार को 5000 दीपों से सजाया जाएगा, जिससे पूरा परिसर दिव्य रोशनी से आलोकित हो उठेगा। यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।

Buddha Purnima Sarnath 2026 : धम्म यात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रम

दोपहर बाद कचहरी क्षेत्र से एक भव्य धम्म यात्रा निकाली जाएगी, जो सारनाथ स्थित मंदिर तक पहुंचेगी। इसके बाद धम्म सभा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और धम्मदेशना का आयोजन किया जाएगा, जिससे बौद्ध धर्म के संदेशों का प्रसार होगा।

Buddha Purnima Sarnath 2026 : 70 हजार श्रद्धालुओं के लिए भोजन व्यवस्था

इस विशेष अवसर पर लगभग 70 हजार बौद्ध अनुयायियों के लिए भोजन (भोजन दान) की व्यवस्था की गई है। महाबोधि सोसाइटी परिसर के पास सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक भोजन वितरण किया जा रहा है, जिससे दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

Buddha Purnima Sarnath 2026 : 1931 से सुरक्षित हैं पवित्र अस्थि अवशेष

इतिहास के अनुसार, गौतम बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद उनकी अस्थियों को विभिन्न स्तूपों में स्थापित किया गया था। बाद में सम्राट अशोक ने इन अवशेषों को विभाजित कर देशभर में स्थापित कराया। इन्हीं में से एक पवित्र अवशेष वर्ष 1931 में सारनाथ लाया गया, जो आज भी मूलगंध कुटी विहार में सुरक्षित है और विश्वभर के बौद्ध अनुयायियों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

Buddha Purnima Sarnath 2026 : सारनाथ का ऐतिहासिक महत्व

सारनाथ बौद्ध धर्म के चार प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। माना जाता है कि ज्ञान प्राप्ति के बाद गौतम बुद्ध ने यहीं अपना पहला उपदेश दिया था, जिसे “धर्मचक्र प्रवर्तन” कहा जाता है। यह स्थान बौद्ध और जैन दोनों धर्मों के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है।

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