BHU Trauma Centre: बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में घायल छात्र के इलाज को लेकर छात्रों ने कथित लापरवाही और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया। विरोध के दौरान छात्रों और प्रॉक्टोरियल बोर्ड के बीच धक्कामुक्की हुई। घायल छात्र को दोबारा भर्ती कर 29 टांके लगाए गए।
BHU Trauma Centre: घायल छात्र के इलाज को लेकर हंगामा, छात्रों और प्रॉक्टोरियल बोर्ड में धक्कामुक्की
वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के बिड़ला ‘स’ छात्रावास के एक छात्र के सड़क हादसे में घायल होने के बाद ट्रॉमा सेंटर में इलाज को लेकर विवाद खड़ा हो गया। छात्रों ने घायल छात्र के इलाज में कथित लापरवाही और ट्रॉमा सेंटर के कर्मचारियों द्वारा दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि छात्रों और प्रॉक्टोरियल बोर्ड के अधिकारियों के बीच धक्कामुक्की की स्थिति बन गई।
BHU Trauma Centre: छात्रों का आरोप है कि सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद छात्र को बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, लेकिन करीब 12 घंटे बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। छात्रों का कहना है कि उस समय घायल छात्र को पर्याप्त उपचार नहीं मिला था। बाद में छात्र घायल युवक को स्ट्रेचर पर लेकर ट्रॉमा सेंटर से बाहर आ गए, जिसके बाद विवाद और बढ़ गया।
BHU Trauma Centre: स्ट्रेचर पर घायल छात्र को लेकर बाहर आए छात्र
घायल छात्र के इलाज को लेकर नाराज छात्रों ने ट्रॉमा सेंटर में विरोध जताया। मामला बढ़ने पर छात्र घायल युवक को स्ट्रेचर पर लेकर ट्रॉमा सेंटर के बाहर आ गए। पोर्टिको के पास छात्रों और प्रॉक्टोरियल बोर्ड के अधिकारियों के बीच कहासुनी के बाद धक्कामुक्की शुरू हो गई। स्थिति हाथापाई तक पहुंचने की नौबत आने पर कुछ समय के लिए तनाव का माहौल बना रहा। इसके बाद कई छात्र ट्रॉमा सेंटर के बाहर धरने पर बैठ गए। इस दौरान घायल छात्र स्ट्रेचर पर ही लेटा रहा। छात्रों ने इलाज में कथित लापरवाही और कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर सवाल उठाए।
BHU Trauma Centre: दोबारा भर्ती कराया गया, छात्र के घाव पर लगे 29 टांके
विवाद के बीच छात्रों और विश्वविद्यालय अधिकारियों के बीच काफी देर तक बातचीत हुई। इसके बाद घायल छात्र को दोबारा बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। छात्रों के अनुसार, बाद में उसके घाव पर 29 टांके लगाए गए।
छात्रों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को उसकी स्थिति के अनुसार तत्काल और आवश्यक चिकित्सा सुविधा मिलना जरूरी है।
BHU Trauma Centre: सड़क हादसे में घायल हुआ था एमए द्वितीय वर्ष का छात्र
जानकारी के मुताबिक, बीएचयू के फ्रेंच विभाग में एमए द्वितीय वर्ष में पढ़ने वाला छात्र राम शनिवार देर रात सड़क दुर्घटना में घायल हो गया था। दुर्घटना के बाद उसे रविवार की रात करीब 12 बजे बीएचयू ट्रॉमा सेंटर लाया गया।
छात्रों का आरोप है कि ट्रॉमा सेंटर पहुंचने के बाद भी उसे जरूरी प्राथमिक उपचार समय पर नहीं मिला। उनका दावा है कि घायल छात्र के घाव पर कई घंटों तक टांके नहीं लगाए गए। इलाज को लेकर रविवार सुबह कथित तौर पर कर्मचारियों की ओर से धमकी भरे लहजे में बात किए जाने का भी छात्रों ने आरोप लगाया।
BHU Trauma Centre: छात्रों के मुताबिक, इलाज को लेकर कथित तौर पर यह तक कहा गया कि इलाज नहीं करेंगे, जो कर पाओ कर लेना। हालांकि, ये आरोप छात्रों की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
BHU Trauma Centre: छात्रों ने मेडिकल रिकॉर्ड और इलाज की टाइमलाइन जांचने की मांग की
छात्रों ने मामले की विस्तृत जांच के लिए कई मांगें रखी हैं। इनमें घायल छात्र के ट्रॉमा सेंटर पहुंचने से लेकर डिस्चार्ज और दोबारा भर्ती किए जाने तक की पूरी मेडिकल टाइमलाइन की जांच शामिल है। छात्रों का कहना है कि अस्पताल के रिकॉर्ड, डॉक्टरों द्वारा किए गए परीक्षण, उपचार की प्रक्रिया और डिस्चार्ज से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच होनी चाहिए। इसके अलावा छात्रों ने ट्रॉमा सेंटर के कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों पर लगाए गए कथित दुर्व्यवहार के आरोपों की जांच की मांग भी की है। उनका कहना है कि घायल छात्र को उसकी वास्तविक मेडिकल स्थिति के अनुसार पूर्ण और आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए थी।
BHU Trauma Centre: ट्रॉमा सेंटर प्रभारी ने लापरवाही के आरोपों से किया इनकार
वहीं, बीएचयू ट्रॉमा सेंटर के प्रभारी प्रो. अजीत सिंह ने इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही के आरोप से इनकार किया है। उनका कहना है कि घायल छात्र के ट्रॉमा सेंटर पहुंचने की जानकारी मिलते ही डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के माध्यम से उसका इलाज शुरू कर दिया गया था। प्रो. अजीत सिंह ने कहा, “ट्रॉमा सेंटर में छात्र के आने की जैसे ही जानकारी मिली, डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के माध्यम से तत्काल इलाज किया गया। इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती गई।”
फिलहाल, छात्रों की ओर से लगाए गए आरोप और ट्रॉमा सेंटर प्रशासन के पक्ष में अंतर है। ऐसे में मेडिकल रिकॉर्ड और पूरे घटनाक्रम की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घायल छात्र के इलाज में किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी या नहीं।