Demographic Panel India : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की पहल पर केंद्र सरकार ने देश में अवैध घुसपैठ और जनसंख्या संरचना में बदलावों की जांच के लिए हाई-लेवल डेमोग्राफिक पैनल का गठन किया है। जानिए समिति के सदस्य, उद्देश्य और सरकार की बड़ी योजना।

Demographic Panel India : देश में बढ़ते अवैध आप्रवास और तेजी से बदल रहे जनसंख्या संतुलन को लेकर केंद्र सरकार अब बड़े स्तर पर रणनीति तैयार करने में जुट गई है। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah की पहल पर केंद्र सरकार ने एक विशेष हाई-लेवल ‘डेमोग्राफिक पैनल’ का गठन किया है। इस समिति का मुख्य उद्देश्य देश में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों, अवैध घुसपैठ और उससे जुड़े सुरक्षा व सामाजिक प्रभावों का गहराई से अध्ययन करना है। सरकार का मानना है कि सीमावर्ती और कई शहरी क्षेत्रों में तेजी से बदल रहे डेमोग्राफिक पैटर्न का असर राष्ट्रीय सुरक्षा, स्थानीय संसाधनों, सामाजिक संतुलन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह पैनल वैज्ञानिक तरीके से आंकड़ों का विश्लेषण कर केंद्र सरकार को ठोस नीतिगत सुझाव देगा।
Demographic Panel India : सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज को मिली कमान

सरकार ने इस हाई-लेवल समिति की जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश Justice Prakash Prabhakar Naolekar को सौंपी है। उनके नेतृत्व में प्रशासन, सुरक्षा और आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ इस पैनल में शामिल किए गए हैं। समिति में पूर्व आईएएस अधिकारी Durga Shankar Mishra, पूर्व आईपीएस अधिकारी Balaji Srivastava और अर्थशास्त्री Shamika Ravi को सदस्य बनाया गया है। इसके अलावा भारत के जनगणना आयुक्त को भी पैनल में शामिल किया गया है।
Demographic Panel India : एक साल में तैयार होगी रिपोर्ट
केंद्र सरकार ने इस समिति को अपनी विस्तृत रिपोर्ट और कार्ययोजना तैयार करने के लिए एक वर्ष का समय दिया है। इस दौरान समिति देशभर के विभिन्न राज्यों और सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसंख्या बदलावों का अध्ययन करेगी।

Demographic Panel India : पैनल मुख्य रूप से तीन बड़े मुद्दों पर काम करेगा।
- असामान्य जनसंख्या बदलावों की जांच
समिति यह पता लगाएगी कि किन क्षेत्रों और समुदायों में जनसंख्या संरचना में असामान्य बदलाव हुए हैं और उसके पीछे क्या कारण रहे हैं। इसके लिए जनगणना, प्रवासन और स्थानीय प्रशासनिक आंकड़ों का अध्ययन किया जाएगा।
- अवैध प्रवासियों की पहचान और कार्रवाई
कमिटी भारत में अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान, हिरासत और निर्वासन के लिए मजबूत कानूनी ढांचे का सुझाव देगी। साथ ही फर्जी दस्तावेजों के जरिए नागरिक पहचान हासिल करने के मामलों की भी समीक्षा होगी।
- सीमा सुरक्षा को मजबूत करने की तैयारी
भविष्य में अवैध घुसपैठ रोकने के लिए सीमा प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था को और सख्त बनाने पर भी समिति काम करेगी। इसके तहत सीमा सुरक्षा एजेंसियों और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की योजना बनाई जाएगी।
Demographic Panel India : कौन हैं कमिटी के प्रमुख सदस्य?
Demographic Panel India : बालाजी श्रीवास्तव: सुरक्षा और खुफिया मामलों के विशेषज्ञ

1988 बैच के रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव दिल्ली पुलिस, मिजोरम और पुडुचेरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल, इंटेलिजेंस और इकोनॉमिक ऑफेंस विंग जैसे अहम विभागों का नेतृत्व किया है। सुरक्षा और खुफिया मामलों में उनके अनुभव को इस पैनल के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Demographic Panel India : दुर्गा शंकर मिश्रा: प्रशासनिक सुधारों का लंबा अनुभव

उत्तर प्रदेश कैडर के 1984 बैच के आईएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा केंद्र सरकार में आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव रह चुके हैं। वे स्मार्ट सिटी मिशन और AMRUT जैसी प्रमुख योजनाओं से जुड़े रहे हैं। इसके अलावा वे उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और Delhi Metro Rail Corporation के चेयरमैन भी रह चुके हैं।
Demographic Panel India : डॉ. शमिका रवि: आर्थिक और सामाजिक डेटा की विशेषज्ञ

डॉ. शमिका रवि वर्तमान में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य हैं। वे Brookings Institution और Observer Research Foundation जैसी संस्थाओं से भी जुड़ी रही हैं। आर्थिक और सामाजिक आंकड़ों के विश्लेषण में उनकी विशेषज्ञता समिति के काम में अहम भूमिका निभाएगी।
Demographic Panel India : क्यों महसूस हुई इस कमिटी की जरूरत?
पिछले कुछ वर्षों में Assam, West Bengal, Manipur, Tripura और Nagaland जैसे सीमावर्ती राज्यों में जनसंख्या बदलाव और अवैध घुसपैठ को लेकर लगातार बहस होती रही है। इसके अलावा Bihar, Delhi, Gujarat, Maharashtra और Uttar Pradesh में भी इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं तेज हुई हैं।
Demographic Panel India : कई क्षेत्रों में अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेजों के जरिए बसने और स्थानीय संसाधनों पर दबाव बढ़ने के आरोप लगते रहे हैं। सरकार का मानना है कि इसका असर रोजगार, सामाजिक ढांचे, सांस्कृतिक पहचान और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर भी पड़ सकता है। इसी वजह से केंद्र सरकार अब पूरे देश में डेमोग्राफिक बदलावों का संस्थागत और वैज्ञानिक अध्ययन कराना चाहती है, ताकि भविष्य की नीतियां वास्तविक आंकड़ों और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर तैयार की जा सकें।