Sonam Wangchuk Ultimatum : दिल्ली में CJP नेताओं की हिरासत पर सोनम वांगचुक ने 11 अक्टूबर तक रिहाई नहीं होने पर अनशन या पदयात्रा की चेतावनी दी थी। नेताओं की रिहाई की खबर के बाद जानिए पूरा मामला।
Sonam Wangchuk Ultimatum : जंतर-मंतर प्रदर्शन और गिरफ्तारियों पर सोनम वांगचुक का अल्टीमेटम, CJP नेताओं की रिहाई के बाद क्या करेंगे?
Sonam Wangchuk Ultimatum : दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन से पहले CJP नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने नाराजगी जताई। उन्होंने चेतावनी दी थी कि 11 अक्टूबर तक नेताओं को रिहा नहीं किया गया तो वह अनशन या पदयात्रा शुरू करने पर विचार करेंगे। वांगचुक ने देश के मौजूदा हालात को ‘अघोषित आपातकाल’ जैसा बताया। हालांकि, 11 अक्टूबर को CJP के प्रमुख नेताओं की रिहाई की खबर सामने आई, जिसके बाद वांगचुक के अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी हैं।
Sonam Wangchuk Ultimatum : प्रदर्शन से पहले दिल्ली में हिरासत में लिए गए CJP नेता
नई दिल्ली। दिल्ली में 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले पुलिस ने CJP (Cockroach Janta Party) के कई नेताओं, कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं, जिससे चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
Sonam Wangchuk Ultimatum : प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी के कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। जंतर-मंतर तक प्रदर्शनकारियों को पहुंचने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई और विभिन्न स्थानों से लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस शुरू हो गई।
Sonam Wangchuk Ultimatum : सोनम वांगचुक ने दी अनशन या पदयात्रा की चेतावनी
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर हिरासत में लिए गए नेताओं की रिहाई की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन से पहले उन्होंने सभी समूहों से एकजुट रहने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की थी। वांगचुक ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि इतनी बड़ी संख्या में नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि रविवार, 11 अक्टूबर तक हिरासत में लिए गए नेताओं को रिहा नहीं किया गया, तो वह अनशन या पदयात्रा जैसे कदम उठाने पर विचार करेंगे। हालांकि, वांगचुक ने तत्काल अनशन शुरू करने की घोषणा नहीं की थी। उनकी चेतावनी को हिरासत में लिए गए नेताओं की रिहाई की मांग से जोड़कर देखा गया।
Sonam Wangchuk Ultimatum : चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन क्यों कर रही थी CJP?
CJP और उससे जुड़े प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि मतदाता सूची में संशोधन के दौरान गड़बड़ियां हुई हैं और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। ये आरोप प्रदर्शनकारियों के हैं। चुनावी प्रक्रिया में पक्षपात के आरोपों को चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ भाजपा की ओर से खारिज किया गया है। ऐसे में इस विवाद के बीच प्रदर्शनकारियों की मांग, पुलिस की कार्रवाई और हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई प्रमुख मुद्दे बने रहे।
Sonam Wangchuk Ultimatum : वांगचुक ने मौजूदा हालात को बताया ‘अघोषित आपातकाल’
सोनम वांगचुक ने नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने पर चिंता जताते हुए देश के हालात को ‘अघोषित आपातकाल’ जैसा बताया। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। उनकी चेतावनी के बाद यह सवाल उठने लगा था कि यदि तय समयसीमा तक नेताओं की रिहाई नहीं हुई, तो क्या वह अनशन शुरू करेंगे या पदयात्रा के जरिए विरोध दर्ज कराएंगे।
Sonam Wangchuk Ultimatum : 11 अक्टूबर को CJP नेताओं की रिहाई की खबर
11 अक्टूबर को सामने आई खबरों के मुताबिक, CJP के प्रमुख नेताओं अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद हिरासत से रिहा कर दिया गया। रिपोर्टों में बताया गया कि रिहाई के साथ एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त रखी गई।
यह घटनाक्रम वांगचुक की तय समयसीमा वाले दिन सामने आया। हालांकि, उनकी ओर से अनशन या पदयात्रा को लेकर आगे कोई कदम उठाए जाने की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। हिरासत में लिए गए लोगों की कुल संख्या और रिहाई को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े बताए गए। इसलिए पूरे घटनाक्रम की तस्वीर स्पष्ट करने के लिए आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।