Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि 2026 में घटस्थापना कैसे करें? जानें कलश स्थापना की सही विधि, शुभ दिशा, जौ बोने, नारियल और शंख रखने के नियम और कलश के ऊपर दीपक जलाना चाहिए या नहीं।
Shardiya Navratri 2026: नवरात्रि में घटस्थापना कैसे करें? जानें कलश, जौ, नारियल और शंख रखने के नियम
Shardiya Navratri 2026 Kalash Sthapana: शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026 से हो रही है। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ घटस्थापना या कलश स्थापना की जाती है। हिंदू धार्मिक परंपरा में कलश स्थापना को शुभता, पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि विधि-विधान से घटस्थापना करने के बाद ही नौ दिनों तक चलने वाली देवी आराधना का शुभारंभ होता है। नवरात्रि में कलश स्थापना करते समय पूजा स्थल की दिशा, कलश में जल भरने, जौ बोने, नारियल रखने और दीपक जलाने जैसे नियमों का ध्यान रखा जाता है। आचार्य इंदु प्रकाश द्वारा बताई गई पूजा-विधि के अनुसार, आइए जानते हैं कि शारदीय नवरात्रि में घटस्थापना कैसे करें, कलश के ऊपर नारियल और शंख रखने का क्या नियम है और क्या कलश के ऊपर दीपक जलाना चाहिए।
Shardiya Navratri 2026: कलश स्थापना के लिए कौन-सी दिशा है शुभ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में कलश स्थापना के लिए घर का ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा शुभ मानी जाती है। सबसे पहले इस स्थान की अच्छी तरह सफाई करें। इसके बाद पूजा स्थल पर जल छिड़ककर उसे पवित्र करें। अब वहां मिट्टी या बालू की एक परत बिछाएं। मिट्टी की परत पर जौ डालें और उसके ऊपर मिट्टी या बालू की दूसरी परत बिछा दें। इसके बाद थोड़ा जल छिड़कें, ताकि जौ के अंकुरण के लिए पर्याप्त नमी बनी रहे। ध्यान रखें कि मिट्टी में जरूरत से ज्यादा पानी न डालें। नवरात्रि में जौ बोने की परंपरा का विशेष धार्मिक महत्व है। श्रद्धालु नौ दिनों तक जौ के अंकुरों की वृद्धि देखते हैं और इसे अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभता, समृद्धि तथा उन्नति से जोड़ते हैं।
Shardiya Navratri 2026: कलश में जल भरते समय इन बातों का रखें ध्यान
जौ बोने के बाद तैयार स्थान पर मिट्टी या धातु का स्वच्छ कलश स्थापित करें। कलश में साफ जल भरें और उसमें एक सिक्का डालें। यदि उपलब्ध हो, तो गंगाजल या किसी अन्य पवित्र नदी के जल की कुछ बूंदें भी मिला सकते हैं।
इसके बाद कलश के मुख पर दाहिना हाथ रखकर पवित्र नदियों का आह्वान करने वाला मंत्र पढ़ें।
Shardiya Navratri 2026: पवित्र नदियों के आह्वान का मंत्र
“गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥”
इस मंत्र में गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिंधु और कावेरी नदियों का स्मरण किया जाता है। यदि मंत्र याद न हो, तो श्रद्धापूर्वक इन नदियों का ध्यान कर सकते हैं। इसके बाद धार्मिक परंपरा के अनुसार कलश में वरुण देव का आह्वान किया जाता है। कलश स्थापना करते समय ध्यान रखें कि पूजा सामग्री स्वच्छ हो और कलश ऐसी जगह रखा जाए, जहां वह स्थिर रहे तथा गलती से गिरने की आशंका न हो।
Shardiya Navratri 2026: कलश के ऊपर नारियल कैसे रखें?
कलश में जल भरने और पूजा करने के बाद उसके मुख पर कलावा बांधें। इसके ऊपर मिट्टी की कटोरी या पात्र रखा जा सकता है। कटोरी में जौ भरें। यदि जौ उपलब्ध न हों, तो कुछ पूजा-पद्धतियों में चावल का उपयोग भी किया जाता है। अब जटा वाले नारियल को लाल कपड़े में लपेटें और कलावे से बांध दें। इसके बाद नारियल को कटोरी के ऊपर सावधानी से स्थापित करें। ध्यान रखें कि नारियल अच्छी तरह स्थिर हो और पूजा के दौरान उसके गिरने की आशंका न रहे। नारियल को हिंदू धार्मिक परंपरा में शुभता और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि में कलश के ऊपर नारियल रखने की परंपरा देवी आराधना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालांकि, नारियल रखने के तरीके में अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की पूजा-पद्धति के अनुसार अंतर हो सकता है।
Shardiya Navratri 2026: क्या कलश के ऊपर दीपक जलाना चाहिए?
नवरात्रि में घटस्थापना के दौरान कई श्रद्धालुओं के मन में सवाल रहता है कि क्या कलश के ऊपर रखी कटोरी में घी का दीपक जलाया जा सकता है? आचार्य इंदु प्रकाश द्वारा बताई गई विधि के अनुसार, कलश के ऊपर दीपक जलाना उचित नहीं माना गया है। धार्मिक मान्यताओं में कलश स्थापना के लिए ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा और दीपक रखने के लिए आग्नेय कोण यानी दक्षिण-पूर्व दिशा को उपयुक्त बताया जाता है। इसलिए कलश के ऊपर दीपक रखने के बजाय पूजा स्थल पर अलग से दीपक जलाना चाहिए। दीपक को ऐसी सुरक्षित जगह पर रखें, जहां उसके आसपास कपड़ा, कागज या अन्य ज्वलनशील सामग्री न हो। पूजा के दौरान दीपक की लौ पर भी ध्यान रखें।
Shardiya Navratri 2026: कलश पर शंख रखने का क्या है नियम?
नवरात्रि में कुछ श्रद्धालु कलश के ऊपर रखी कटोरी में चावल भरकर उसके ऊपर शंख स्थापित करते हैं। बताई गई पूजा-विधि के अनुसार, दक्षिणावर्ती शंख रखने और उसका मुख ऊपर की ओर रखने की परंपरा का उल्लेख मिलता है। कुछ विधियों में शंख की चोंच अपनी ओर रखने की बात भी कही जाती है। धार्मिक परंपराओं में शंख को पवित्रता और शुभता से जोड़कर देखा जाता है। पूजा में शंख का उपयोग आरती और धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान भी किया जाता है।
हालांकि, कलश पर शंख रखने की विधि सभी स्थानों पर एक जैसी नहीं है। इसलिए यदि आपके परिवार में कलश पर नारियल रखने की परंपरा है, तो उसी के अनुसार पूजा करें। शंख स्थापित करने को लेकर संदेह होने पर अपने कुल पुरोहित या स्थानीय पंडित से मार्गदर्शन ले सकते हैं।
Shardiya Navratri 2026: नवरात्रि में नवार्ण मंत्र का जाप क्यों है महत्वपूर्ण?
मां दुर्गा की आराधना में नवार्ण मंत्र का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु नवरात्रि के नौ दिनों में इस मंत्र का जाप करते हैं। कलश स्थापना और देवी पूजा के दौरान भी श्रद्धापूर्वक इसका जाप किया जा सकता है।
नवार्ण मंत्र
“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।”
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस मंत्र के जाप से साधक मां दुर्गा का स्मरण करता है और उनसे शक्ति, साहस तथा कल्याण की कामना करता है। मंत्र का जाप अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार किया जा सकता है।
Shardiya Navratri 2026: घटस्थापना की पूरी विधि: इन 12 चरणों में करें पूजा
नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना करते समय नीचे दिए गए क्रम का पालन कर सकते हैं। अलग-अलग परंपराओं में कुछ चरणों का क्रम बदल सकता है।
1. पूजा स्थल की सफाई करें: घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में स्वच्छ स्थान चुनें और वहां जल छिड़कें।
2. मिट्टी या बालू बिछाएं: पूजा स्थल पर मिट्टी या बालू की पहली परत तैयार करें।
3. जौ बोएं: मिट्टी के ऊपर जौ डालें और उन्हें हल्की मिट्टी से ढक दें।
4. हल्का जल छिड़कें: जौ के अंकुरण के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाए रखें।
5. कलश स्थापित करें: तैयार स्थान पर स्वच्छ कलश रखें और पूजा करें।
6. कलश में जल भरें: कलश में साफ जल और एक सिक्का डालें। चाहें तो गंगाजल की कुछ बूंदें मिला सकते हैं।
7. पवित्र नदियों का स्मरण करें: गंगा सहित पवित्र नदियों के आह्वान का मंत्र पढ़ें और वरुण देव का स्मरण करें।
8. कलावा बांधें: कलश के मुख पर कलावा बांधें और अपनी पूजा-पद्धति के अनुसार ऊपर पात्र रखें।
9. कटोरी में जौ या चावल रखें: परंपरा के अनुसार पात्र में जौ या चावल भरें।
10. नारियल तैयार करें: जटा वाले नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलावे से बांधें।
11. नारियल या शंख स्थापित करें: अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार नारियल रखें या शंख स्थापित करें। दोनों को रखने की विधि में स्थानीय परंपराओं का ध्यान रखें।
12. मंत्र जाप और दीपक जलाएं: नवार्ण मंत्र का जाप करें और पूजा स्थल पर कलश से अलग सुरक्षित स्थान पर दीपक जलाएं। पूजा पूरी होने के बाद मां दुर्गा की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य तथा कल्याण की कामना करें।
नवरात्रि में कलश स्थापना का क्या है महत्व?
हिंदू धर्म में कलश को पवित्रता, शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। शारदीय नवरात्रि में घटस्थापना के साथ मां दुर्गा की नौ दिनों तक चलने वाली आराधना शुरू होती है। इन नौ दिनों में श्रद्धालु देवी के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं और जीवन में सुख-शांति तथा समृद्धि की कामना करते हैं। कलश स्थापना के दौरान जौ बोना, कलश में जल भरना, नारियल रखना और मंत्र जाप करना पूजा के महत्वपूर्ण अंग माने जाते हैं। इन धार्मिक परंपराओं के पीछे श्रद्धा और आध्यात्मिक भाव प्रमुख हैं।
ध्यान रखें: शारदीय नवरात्रि 2026 में घटस्थापना का शुभ मुहूर्त जानने के लिए स्थानीय पंचांग और अपने शहर के सूर्योदय के समय के अनुसार जानकारी लें। तिथि और मुहूर्त की गणना स्थान के अनुसार अलग हो सकती है। पूजा की विधि में भी क्षेत्रीय तथा पारिवारिक परंपराओं के अनुसार अंतर संभव है। नवरात्रि में सबसे महत्वपूर्ण है कि पूजा स्वच्छता, श्रद्धा और अपनी परंपरा के अनुसार की जाए। यदि किसी विशेष विधि को लेकर संशय हो, तो योग्य पुरोहित से परामर्श लेना उचित रहेगा।