ITR Refund Delay: रिफंड नहीं मिला तो इन 5 गलतियों की करें जांच, ऐसे चेक करें स्टेटस

ITR Refund Delay: ITR भरने के बाद भी Income Tax Refund नहीं मिला है तो TDS mismatch, पुरानी Tax Demand, बैंक अकाउंट और ITR प्रोसेसिंग समेत इन 5 वजहों की जांच करें। जानें Refund Status कैसे चेक करें।

ITR Refund Delay: रिफंड नहीं मिला तो इन 5 गलतियों की तुरंत करें जांच, ऐसे चेक करें स्टेटस

ITR Refund Delay: नई दिल्ली। Income Tax Refund Delay: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने और उसका ई-वेरिफिकेशन पूरा करने के बाद भी अगर आपको रिफंड नहीं मिला है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। कई बार रिफंड आने में समय लग सकता है, लेकिन कुछ मामलों में करदाता की छोटी-सी गलती या लंबित कार्रवाई के कारण भी रिफंड अटक सकता है। ऐसे में सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि आपका ITR किस स्टेज पर है और रिफंड में देरी की वजह क्या है।

ITR Refund Delay: आकलन वर्ष 2026-27 के लिए बड़ी संख्या में करदाताओं ने ITR दाखिल किया है। आयकर विभाग के अनुसार, ITR के ई-वेरिफिकेशन के बाद रिफंड जारी होने में सामान्य तौर पर कुछ सप्ताह का समय लग सकता है। हालांकि, हर करदाता के मामले में प्रोसेसिंग का समय अलग हो सकता है। अगर आपका रिफंड अभी तक नहीं आया है, तो इन 5 प्रमुख वजहों को जरूर जांचें।

1. ITR की प्रोसेसिंग अभी पूरी नहीं हुई

ITR दाखिल करने के बाद केवल रिटर्न फाइल करना ही पर्याप्त नहीं है। उसका ई-वेरिफिकेशन भी पूरा होना जरूरी है। ई-वेरिफिकेशन के बाद आयकर विभाग रिटर्न की प्रोसेसिंग करता है और उसमें दर्ज आय, टैक्स भुगतान, TDS और अन्य जानकारियों का उपलब्ध रिकॉर्ड से मिलान करता है। अगर प्रोसेसिंग अभी पूरी नहीं हुई है, तो रिफंड जारी नहीं होगा। इसलिए सबसे पहले ITR का स्टेटस चेक करें।.ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करने के बाद e-File > Income Tax Returns > View Filed Returns पर जाकर रिटर्न की स्थिति देखी जा सकती है। यहां यह पता चल सकता है कि ITR वेरिफाइड है या नहीं, प्रोसेसिंग पूरी हुई है या अभी लंबित है।

2. TDS या Tax Credit में हो सकता है अंतर

रिफंड में देरी की एक महत्वपूर्ण वजह ITR में दर्ज टैक्स क्रेडिट और आयकर विभाग के रिकॉर्ड में उपलब्ध जानकारी के बीच अंतर होना भी हो सकता है।

उदाहरण के लिए, अगर आपकी सैलरी या अन्य आय से TDS काटा गया है, लेकिन ITR में दर्ज TDS और विभाग के रिकॉर्ड में उपलब्ध TDS में अंतर है, तो रिटर्न की प्रोसेसिंग प्रभावित हो सकती है। ऐसे में करदाता को अपने Form 26AS, AIS और TIS में उपलब्ध जानकारी की जांच करनी चाहिए। इन दस्तावेजों में आय और टैक्स से जुड़ी जानकारी का मिलान ITR में दी गई जानकारी से करें।

अगर किसी TDS या Tax Credit में अंतर दिखाई देता है, तो संबंधित संस्था या नियोक्ता से रिकॉर्ड ठीक कराने की जरूरत पड़ सकती है।

3. पुरानी Tax Demand के कारण रिफंड हो सकता है Adjust

अगर पिछले किसी Assessment Year की टैक्स डिमांड बकाया है, तो इसका असर मौजूदा साल के रिफंड पर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में आयकर विभाग की ओर से करदाता को बकाया मांग के संबंध में सूचना दी जा सकती है। यदि करदाता समय पर जवाब नहीं देता है, तो लागू नियमों के तहत उपलब्ध रिफंड को बकाया टैक्स डिमांड के विरुद्ध समायोजित किया जा सकता है।

पुरानी टैक्स डिमांड की स्थिति देखने के लिए ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें। इसके बाद Pending Actions > Response to Outstanding Demand में जाकर संबंधित जानकारी जांची जा सकती है। अगर आपको लगता है कि डिमांड गलत है, तो निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपना जवाब और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराएं।

4. Bank Account की जानकारी में गलती

कई बार ITR की प्रोसेसिंग पूरी होने के बावजूद बैंक खाते से जुड़ी समस्या के कारण रिफंड सफलतापूर्वक क्रेडिट नहीं हो पाता।

इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे:

बैंक अकाउंट का प्री-वैलिडेट या वेरिफाइड न होना

गलत बैंक डिटेल

गलत IFSC

बैंक अकाउंट बंद होना

बैंक रिकॉर्ड और PAN में नाम से जुड़ा अंतर

ITR Refund Delay: रिफंड क्रेडिट होने में बैंक स्तर पर समस्या

इसलिए ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपने बैंक अकाउंट की जानकारी जरूर जांचें। जरूरत पड़ने पर बैंक अकाउंट को दोबारा वैलिडेट कराया जा सकता है। अगर पहले जारी किया गया रिफंड फेल हो गया है, तो पोर्टल पर उपलब्ध विकल्प के अनुसार रिफंड दोबारा जारी कराने की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है।

5. Income Tax Department के Email, SMS और Notice को नजरअंदाज करना

कई करदाता रिफंड का इंतजार करते रहते हैं, लेकिन आयकर विभाग की ओर से भेजे गए ईमेल, SMS या पोर्टल पर उपलब्ध सूचना पर ध्यान नहीं देते। यह भी रिफंड में देरी का कारण बन सकता है। अगर विभाग को ITR में कोई विसंगति दिखाई देती है या किसी अतिरिक्त जानकारी की जरूरत होती है, तो करदाता को सूचना या नोटिस भेजा जा सकता है। ऐसी स्थिति में निर्धारित समयसीमा के भीतर जवाब देना जरूरी होता है। इसलिए रिफंड का इंतजार करते समय अपने ई-फाइलिंग अकाउंट, रजिस्टर्ड ईमेल और मोबाइल पर आने वाले संदेशों को नियमित रूप से चेक करें।

ITR Refund Delay: Refund का Status कैसे चेक करें?

अगर आपने ITR दाखिल कर दिया है और रिफंड का इंतजार कर रहे हैं, तो सबसे पहले ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपना ITR स्टेटस देखें। यह जांचें कि:

ITR सफलतापूर्वक वेरिफाइड है या नहीं।

रिटर्न की प्रोसेसिंग पूरी हुई है या नहीं।

Refund निर्धारित हुआ है या नहीं।

Refund जारी हुआ है या नहीं।

Refund किसी कारण से फेल हुआ है या नहीं।

कोई पुरानी टैक्स डिमांड लंबित तो नहीं है।

विभाग की ओर से कोई नोटिस या अतिरिक्त कार्रवाई लंबित तो नहीं है।

ITR Refund Delay: रिफंड नहीं आया तो क्या करें?

अगर ITR दाखिल और ई-वेरिफाई करने के बाद कई सप्ताह बीत चुके हैं और रिफंड नहीं मिला है, तो सिर्फ इंतजार करने के बजाय पूरी जानकारी की जांच करें। सबसे पहले ITR प्रोसेसिंग स्टेटस देखें। इसके बाद Form 26AS, AIS और TIS में TDS का मिलान करें। साथ ही पुरानी टैक्स डिमांड और बैंक अकाउंट की जानकारी भी जांचें।

यदि विभाग की ओर से कोई नोटिस या सूचना आई है, तो उसका समय पर जवाब देना जरूरी है। इस तरह रिफंड में देरी की वास्तविक वजह का पता लगाया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर उचित कार्रवाई की जा सकती है।

ध्यान रखें: ITR दाखिल करने के बाद रिफंड की प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है। इसलिए केवल कुछ दिनों की देरी को रिफंड फंसना नहीं माना जाना चाहिए। लेकिन लंबे समय तक स्थिति में बदलाव न हो तो ऊपर बताए गए सभी बिंदुओं की जांच करना उपयोगी है।

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