Chaitra Navratri Maa Kalratri Puja : चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा का विशेष महत्व है। वाराणसी में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी, जानिए मां कालरात्रि की पूजा विधि, महत्व और धार्मिक मान्यताएं।
Chaitra Navratri Maa Kalratri Puja : चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन सप्तमी तिथि पर मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। धर्म नगरी वाराणसी में इस अवसर पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। मंदिरों में देर रात से ही भक्तों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। मंगला आरती के बाद माता के दरबार को दर्शन के लिए खोल दिया गया, जहां दिनभर भक्तों का तांता लगा रहा। श्रद्धालु मां के चरणों में शीश झुकाकर सुख-समृद्धि और कष्टों से मुक्ति की कामना कर रहे हैं।
Chaitra Navratri Maa Kalratri Puja : मां कालरात्रि का स्वरूप और महत्व
मां कालरात्रि का स्वरूप भले ही अत्यंत विकराल प्रतीत होता है, लेकिन वे अपने भक्तों के लिए अत्यंत सौम्य और कल्याणकारी मानी जाती हैं। चार भुजाओं वाली मां का यह रूप बुराई और अज्ञान का नाश करने वाला है। धार्मिक मान्यता है कि उनके दर्शन मात्र से ही नकारात्मक शक्तियां, भय और बाधाएं दूर हो जाती हैं।
Chaitra Navratri Maa Kalratri Puja : तांत्रिक साधना के लिए विशेष दिन
नवरात्रि की सप्तमी तिथि तांत्रिक साधना करने वाले साधकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन मध्यरात्रि में विशेष विधि से मां की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस रात को ‘सिद्धियों की रात’ कहा जाता है, जब साधक अपनी साधना से विशेष शक्तियां प्राप्त करते हैं।
कुंडलिनी जागरण की साधना करने वाले साधक इस दिन सहस्त्रार चक्र को जागृत करने का प्रयास करते हैं, जो आध्यात्मिक उन्नति का सर्वोच्च स्तर माना जाता है।
Chaitra Navratri Maa Kalratri Puja : पूजा विधि और धार्मिक मान्यता
सप्तमी के दिन मां कालरात्रि की पूजा के बाद भगवान शिव और ब्रह्मा जी की आराधना करना भी शुभ माना गया है। भक्त विधि-विधान से पूजा कर जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।