Himanta Biswa Sarma Assam CM : असम में बीजेपी और एनडीए की ऐतिहासिक जीत के बाद हिमंता बिस्वा सरमा को दोबारा विधायक दल का नेता चुना गया। 12 मई को वे दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। जानें चुनाव परिणाम, राजनीतिक सफर और नई सरकार की रणनीति।

Himanta Biswa Sarma Assam CM : असम में फिर चला हिमंता मैजिक- BJP विधायक दल ने दोबारा चुना नेता, 12 मई को लेंगे मुख्यमंत्री पद की शपथ
Himanta Biswa Sarma Assam CM : असम की राजनीति में एक बार फिर हिमंता बिस्वा सरमा का प्रभाव साफ दिखाई दिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और एनडीए विधायक दल ने सर्वसम्मति से उन्हें अपना नेता चुन लिया है। इसके साथ ही हिमंता बिस्वा सरमा लगातार दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 12 मई को आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की संभावना है।

Himanta Biswa Sarma Assam CM : बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद विधायक दल की बैठक में यह फैसला औपचारिक रूप से लिया गया। पार्टी नेताओं और विधायकों ने हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व पर एक बार फिर भरोसा जताते हुए उन्हें राज्य की कमान सौंपने का निर्णय किया।
Himanta Biswa Sarma Assam CM : नड्डा और नायब सैनी की मौजूदगी में हुआ नेता का चुनाव
बीजेपी हाईकमान ने विधायक दल का नेता चुनने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा तथा हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पर्यवेक्षक नियुक्त किया था। दोनों नेताओं की मौजूदगी में हुई बैठक में हिमंता बिस्वा सरमा के नाम पर सर्वसम्मति बनी। बैठक में मौजूद सभी विधायकों ने एक स्वर में उनके नेतृत्व का समर्थन किया।

Himanta Biswa Sarma Assam CM : बता दें कि हिमंता बिस्वा सरमा ने 6 मई को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था और तब से वह कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब विधायक दल की औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद उनके दोबारा मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है।
Himanta Biswa Sarma Assam CM : NDA ने रचा इतिहास, 126 में जीतीं 102 सीटें
असम विधानसभा चुनाव 2026 में बीजेपी और उसके सहयोगी दलों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दो-तिहाई बहुमत हासिल किया है। 126 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी ने अकेले 82 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं सहयोगी दल असम गण परिषद (AGP) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) ने 10-10 सीटें जीतीं। इस तरह एनडीए गठबंधन ने कुल 102 सीटों के साथ विपक्ष को करारी शिकस्त दी।
Himanta Biswa Sarma Assam CM : राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जीत हिमंता बिस्वा सरमा की मजबूत संगठन क्षमता, आक्रामक चुनावी रणनीति और जमीनी पकड़ का परिणाम है। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने विकास, सुरक्षा और क्षेत्रीय अस्मिता को प्रमुख मुद्दा बनाया था।
Himanta Biswa Sarma Assam CM : छात्र राजनीति से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

हिमंता बिस्वा सरमा का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। 1990 के दशक में उन्होंने ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) के सक्रिय नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस के जरिए मुख्यधारा की राजनीति में कदम रखा। साल 2001 में जालुकबारी विधानसभा सीट से पहली बार विधायक बनने के बाद वे तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के करीबी नेताओं में गिने जाने लगे। स्वास्थ्य, शिक्षा और वित्त जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने प्रशासनिक दक्षता का मजबूत उदाहरण पेश किया। इसी दौरान उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा ढांचे को मजबूत करने के कई फैसले लिए।
Himanta Biswa Sarma Assam CM : कांग्रेस छोड़ BJP में आए, बने पूर्वोत्तर राजनीति के ‘चाणक्य’
साल 2015 में कांग्रेस नेतृत्व से मतभेद के बाद हिमंता बिस्वा सरमा ने पार्टी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया। बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्हें नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (NEDA) का संयोजक बनाया गया। इसके बाद उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों में बीजेपी के विस्तार में अहम भूमिका निभाई। मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय और असम में बीजेपी गठबंधन की सरकार बनाने में उनकी रणनीति को निर्णायक माना गया। राजनीतिक गलियारों में उन्हें पूर्वोत्तर राजनीति का ‘चाणक्य’ भी कहा जाने लगा। बीजेपी के लिए पूर्वोत्तर में संगठन विस्तार का श्रेय काफी हद तक उन्हें दिया जाता है।
Himanta Biswa Sarma Assam CM : दूसरी पारी में होंगी बड़ी चुनौतियां
साल 2021 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद हिमंता बिस्वा सरमा ने कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और निवेश के क्षेत्र में कई बड़े फैसले लिए थे। अब दूसरी बार सत्ता संभालते हुए उनके सामने विकास की गति को और तेज करने की चुनौती होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, नई सरकार के सामने रोजगार, उद्योग निवेश, बाढ़ प्रबंधन और पूर्वोत्तर राज्यों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। इसके अलावा बीजेपी नेतृत्व पूर्वोत्तर में अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत करने की रणनीति पर भी काम करेगा। 12 मई को होने वाला शपथ ग्रहण समारोह असम की राजनीति के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।