Agnikarma Workshop Varanasi : वाराणसी में विश्व आयुर्वेद परिषद ने अग्निकर्म पर कार्यशाला और चर्मरोग पर व्याख्यान आयोजित किया। प्रदेशभर के चिकित्सकों ने 30 रोगियों पर प्रत्यक्ष कर्माभ्यास किया और विशेषज्ञों से उपचार संबंधी जानकारी प्राप्त की।
Agnikarma Workshop Varanasi : विश्व आयुर्वेद परिषद ने अग्निकर्म पर आयोजित की कार्यशाला, चर्मरोग के उपचार पर भी हुआ मंथन
Agnikarma Workshop Varanasi : राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय में प्रदेशभर से पहुंचे चिकित्सकों ने किया प्रत्यक्ष कर्माभ्यास, विशेषज्ञों ने साझा की उपचार संबंधी जानकारी
Agnikarma Workshop Varanasi : वाराणसी। विश्व आयुर्वेद परिषद की वाराणसी महानगर इकाई की ओर से राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, वाराणसी के चरक सभागार में अग्निकर्म पर कार्यशाला एवं चर्मरोग विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आयुर्वेद की पारंपरिक उपचार पद्धतियों, अग्निकर्म की व्यावहारिक प्रक्रिया तथा चर्मरोगों के उपचार में औषधियों के प्रयोग पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए चिकित्सकों ने प्रतिभाग किया और विशेषज्ञों से उपचार संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
Agnikarma Workshop Varanasi : कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान धन्वंतरि की वंदना के साथ हुआ। इसकी अध्यक्षता राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डीके मौर्य ने की। विश्व आयुर्वेद परिषद के वाराणसी महानगर अध्यक्ष प्रो. राकेश मोहन ने कार्यक्रम की विषयवस्तु पर प्रकाश डालते हुए अग्निकर्म एवं चर्मरोग चिकित्सा के व्यावहारिक और शैक्षणिक महत्व को रेखांकित किया। महानगर सचिव डॉ. उमाकांत श्रीवास्तव ने स्वागत भाषण दिया। मुख्य अतिथि डॉ. अरविंद कुमार, डीओ वाराणसी, ने आयोजन की सराहना करते हुए इस प्रकार की कार्यशालाओं को चिकित्सकों के ज्ञान एवं कौशल के विकास के लिए उपयोगी बताया।
Agnikarma Workshop Varanasi : विश्व आयुर्वेद परिषद के प्रांत अध्यक्ष प्रो. विजय राय ने परिषद की गतिविधियों, उद्देश्यों और आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार में उसकी भूमिका के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रचना निगम ने किया, जबकि डॉ. देवानंद ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
Agnikarma Workshop Varanasi : अग्निकर्म पर विशेषज्ञ व्याख्यान, 30 रोगियों पर किया गया व्यावहारिक अभ्यास
कार्यशाला के प्रथम सत्र में डॉ. मृगांक शेखर ने अग्निकर्म विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने इस पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के सिद्धांतों और इसके व्यावहारिक पक्षों की जानकारी दी। सत्र में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए चिकित्सकों ने लगभग 30 रोगियों पर प्रत्यक्ष कर्माभ्यास के माध्यम से अग्निकर्म की प्रक्रिया को समझा।
इस दौरान चिकित्सकों को विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में उपचार की प्रक्रिया का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य चिकित्सकों को अग्निकर्म के सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ उसकी व्यावहारिक बारीकियों से परिचित कराना रहा।
Agnikarma Workshop Varanasi : चर्मरोगों के उपचार पर प्रो. शांतनु मिश्रा ने दी जानकारी
द्वितीय सत्र में प्रो. शांतनु मिश्रा ने चर्मरोग विषय पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने विभिन्न प्रकार के चर्मरोगों के उपचार में औषधियों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए एकल एवं मिश्रित औषधियों के प्रयोग के बारे में जानकारी दी। उन्होंने चिकित्सकों को रोग की प्रकृति के अनुसार उपचार पद्धति और औषधियों के चयन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया। इस सत्र में उपस्थित चिकित्सकों को चर्मरोगों के उपचार से संबंधित व्यावहारिक जानकारी प्राप्त हुई। विशेषज्ञों ने आयुर्वेदिक चिकित्सा के क्षेत्र में निरंतर अध्ययन, अनुभव साझा करने और चिकित्सकीय कौशल को विकसित करने के महत्व पर भी जोर दिया।
Agnikarma Workshop Varanasi : कई विशेषज्ञ एवं चिकित्सक रहे उपस्थित
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से प्रो. अजय शर्मा, प्रमुख, शल्य विभाग; प्रो. संजय पांडेय, प्रमुख, रसशास्त्र विभाग; डॉ. आरपी सिंह, डॉ. सुभाष श्रीवास्तव, वैद्य उमेश दत्त पाठक, वैद्य वीरेंद्र कुमार वर्मा, डॉ. अनुभा श्रीवास्तव और डॉ. मनीष मिश्रा उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त बस्ती से आए पूर्व डीओ डॉ. वीके श्रीवास्तव एवं डॉ. रुचि तिवारी ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
Agnikarma Workshop Varanasi : कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित रसशास्त्र के सिद्ध ज्ञाता परम श्रद्धेय स्वर्गीय प्रो. सिद्धिनंदन मिश्रा को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया और आयुर्वेद के क्षेत्र में उनके योगदान को स्मरण किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। कार्यशाला को आयुर्वेद के चिकित्सकों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान, पारंपरिक उपचार पद्धतियों के व्यावहारिक प्रशिक्षण तथा चर्मरोग चिकित्सा संबंधी जानकारी साझा करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा गया।