Viksit Bharat National Conference : विकसित भारत के निर्माण में शिक्षा, नवाचार और भारतीय ज्ञान परंपरा की अहम भूमिका : प्रो. ए.के. त्यागी

Viksit Bharat National Conference : विकसित भारत के निर्माण में शिक्षा, नवाचार और भारतीय ज्ञान परंपरा की अहम भूमिका : प्रो. ए.के. त्यागीमहात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विभाग द्वारा ‘विकसित भारत की संकल्पना’ विषय पर राष्ट्रीय ऑनलाइन सम्मेलन आयोजित किया गया। कुलपति प्रो. ए.के. त्यागी ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और भारतीय ज्ञान परंपरा को विकसित भारत की आधारशिला बताया।

 Viksit Bharat National Conference : प्राकृतिक चिकित्सा विभाग, चिकित्सा विज्ञान संकाय, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ द्वारा ‘विकसित भारत की संकल्पना’ विषयक राष्ट्रीय ऑनलाइन सम्मेलन आयोजित

Viksit Bharat National Conference : वाराणसी। योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विभाग, चिकित्सा विज्ञान संकाय, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ द्वारा केंद्र सरकार के गौरवमयी 12 वर्ष पूर्ण होने एवं 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत ‘विकसित भारत की संकल्पना’ विषय पर राष्ट्रीय ऑनलाइन सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में देश के विभिन्न शिक्षाविदों, विशेषज्ञों एवं शोधकर्ताओं ने विकसित भारत के निर्माण में शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की।

Viksit Bharat National Conference : कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने कहा कि विकसित भारत का निर्माण केवल आर्थिक प्रगति से नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वित विकास से संभव है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय राष्ट्र निर्माण के प्रमुख केंद्र होते हैं और युवाओं को आत्मनिर्भर, संस्कारित तथा नवाचारी बनाना वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्रहित में अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग करने का आह्वान किया।

Viksit Bharat National Conference :मुख्य अतिथि प्रो. संजय पासवान ने अपने संबोधन में कहा कि विकसित भारत का सपना युवाओं की ऊर्जा, आत्मनिर्भरता, शिक्षा और राष्ट्रभक्ति से ही साकार होगा। उन्होंने कहा कि भारत विश्व मंच पर तेजी से अपनी पहचान मजबूत कर रहा है और इस यात्रा में युवाओं की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। प्रत्येक युवा को राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

Viksit Bharat National Conference : मुख्य वक्ता प्रो. रजनीश कुमार शुक्ला ने कहा कि ज्ञान, नवाचार, भारतीय चिंतन और युवा शक्ति के समन्वय से भारत वर्ष 2047 तक विश्व के अग्रणी विकसित राष्ट्रों में अपना स्थान सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ मिलकर समाज और राष्ट्र के सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।

Viksit Bharat National Conference : विशिष्ट अतिथि प्रो. गोविंद सरण ने कहा कि भारत वैश्विक नेतृत्व की दिशा में तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है और विकसित भारत का संकल्प केवल देश के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास मॉडल विश्व के लिए उदाहरण बन रहे हैं।

Viksit Bharat National Conference : विशिष्ट अतिथि प्रो. राजेश कुमार मिश्रा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य शिक्षा, संस्कृति, अनुसंधान और सामाजिक उत्तरदायित्व के समन्वित प्रयासों से ही प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने विश्वविद्यालयों को सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्रीय विकास का प्रभावी माध्यम बताया।

Viksit Bharat National Conference : सम्मेलन में प्रो. कुमार रत्नम, प्रो. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. देवेंद्र कुमार जाटव तथा डॉ. अम्बरीश राय सहित अनेक विद्वानों ने विकसित भारत के विभिन्न आयामों पर अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने शिक्षा के आधुनिकीकरण, अनुसंधान को बढ़ावा देने, भारतीय ज्ञान प्रणाली के संरक्षण तथा युवाओं को नवाचार के लिए प्रेरित करने पर विशेष बल दिया।

Viksit Bharat National Conference : कार्यक्रम का स्वागत संबोधन कार्यक्रम संयोजक एवं चिकित्सा विज्ञान संकाय के अध्यक्ष प्रो. पीताम्बर दास ने किया। कार्यक्रम का संचालन सह-संयोजक डॉ. सुनील कुमार यादव ने किया, जबकि अंत में सह-संयोजक डॉ. सुनीता ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

राष्ट्रीय ऑनलाइन सम्मेलन में बड़ी संख्या में शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं विभिन्न संस्थानों से जुड़े 

Viksit Bharat National Conference : प्रतिभागियों ने सहभागिता की। सम्मेलन में विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शिक्षा, नवाचार, अनुसंधान और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।

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