Ganga Water Level in Varanasi : वाराणसी में गंगा का जलस्तर 67.58 मीटर पहुंच गया है। 84 घाटों का संपर्क प्रभावित है, मणिकर्णिका तक पानी पहुंचा और 46 राहत शिविर अलर्ट किए गए हैं।

Ganga Water Level in Varanasi : काशी में गंगा का रौद्र रूप! तेजी से बढ़ रहा जलस्तर, 84 घाटों का संपर्क टूटा, गांवों तक मंडराया बाढ़ का खतरा
Ganga Water Level in Varanasi : वाराणसी। काशी में गंगा का जलस्तर लगातार तेजी से बढ़ रहा है। बुधवार सुबह नदी का जलस्तर 67.58 मीटर तक पहुंच गया। करीब 2 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पानी बढ़ने के कारण वाराणसी के गंगा घाटों पर हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। कई घाटों का आपसी संपर्क टूट गया है और निचले हिस्से पानी में डूबने लगे हैं। मणिकर्णिका घाट की सीढ़ियों तक गंगा का पानी पहुंच गया है, जबकि हरिश्चंद्र घाट पर अंतिम संस्कार की व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। बढ़ते जलस्तर ने अब सिर्फ घाटों तक ही चिंता सीमित नहीं रखी है। गंगा के किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में भी बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। प्रशासन ने संभावित स्थिति को देखते हुए जिले के 46 राहत शिविरों को अलर्ट मोड पर रखा है। जलपुलिस और एनडीआरएफ की टीमें घाटों, नदी किनारे के क्षेत्रों और संभावित बाढ़ प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी कर रही हैं।
Ganga Water Level in Varanasi : 84 घाटों का संपर्क प्रभावित

गंगा का पानी लगातार ऊपर आने से काशी के घाटों की तस्वीर बदलने लगी है। कई घाटों के बीच बने संपर्क मार्ग पानी में डूब गए हैं। इससे एक घाट से दूसरे घाट तक पैदल पहुंचना मुश्किल हो गया है। निचले हिस्सों में पानी भरने के कारण स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित हुई है। प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की जा रही है कि वे नदी के किनारे और जलमग्न क्षेत्रों में जाने से बचें। नाव संचालन और घाटों पर आवाजाही को लेकर भी सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष नजर रखी जा रही है।
Ganga Water Level in Varanasi : मणिकर्णिका घाट तक पहुंचा पानी, हरिश्चंद्र घाट पर अंतिम संस्कार प्रभावित
जलस्तर बढ़ने का सबसे ज्यादा असर निचले घाटों पर दिखाई दे रहा है। मणिकर्णिका घाट की सीढ़ियों तक गंगा का पानी पहुंच गया है। वहीं हरिश्चंद्र घाट पर भी सीढ़ियों के ऊपर अंतिम संस्कार की व्यवस्था करनी पड़ रही है। गंगा का पानी इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले घंटों में घाटों के और हिस्से जलमग्न हो सकते हैं। इसके मद्देनजर प्रशासन और घाटों से जुड़े कर्मचारियों को सतर्क रखा गया है।
Ganga Water Level in Varanasi : मंगलवार रात से लगातार बढ़ रहा जलस्तर
मंगलवार रात करीब 8 बजे गंगा का जलस्तर 67.22 मीटर दर्ज किया गया था। इसके बाद बुधवार सुबह तक जलस्तर बढ़कर 67.58 मीटर पहुंच गया। यानी कुछ ही घंटों में नदी का पानी लगातार ऊपर आया। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के मुताबिक मंगलवार रात गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से करीब साढ़े तीन मीटर और खतरे के निशान से लगभग चार मीटर नीचे था। हालांकि जिस तेजी से पानी बढ़ रहा है, उसने तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
Ganga Water Level in Varanasi : अगले 36 घंटे अहम, प्रयागराज में स्थिर हुआ जलस्तर
प्रशासन और जल विशेषज्ञों की नजर अब अगले 36 घंटों पर है। प्रयागराज में गंगा का जलस्तर स्थिर होने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि वाराणसी में भी पानी बढ़ने की रफ्तार आने वाले समय में कम हो सकती है। हालांकि यह स्थिति पूरी तरह मौसम और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में होने वाली बारिश पर निर्भर करेगी। यदि तेज बारिश नहीं हुई और पड़ोसी राज्यों से गंगा-यमुना में अतिरिक्त पानी नहीं आया तो वाराणसी में जलस्तर स्थिर होने की संभावना है। इसके बावजूद प्रशासन किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
Ganga Water Level in Varanasi : वरुणा नदी के किनारे बसे इलाकों में बढ़ी चिंता

गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ इसका असर वरुणा नदी के किनारे बसे निचले इलाकों पर भी पड़ने की आशंका बढ़ गई है। गंगा और वरुणा के जलस्तर में बढ़ोतरी की स्थिति में निचले क्षेत्रों में जलभराव की समस्या गंभीर हो सकती है। इसी वजह से प्रशासन ने संभावित संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। राहत और बचाव से जुड़े दलों को भी सक्रिय रखा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।
Ganga Water Level in Varanasi : चिरईगांव में गंगा ने शुरू किया कटान
गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर चिरईगांव क्षेत्र में भी दिखाई देने लगा है। ढाब क्षेत्र में गंगा ने कटान शुरू कर दिया है। इससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर गंगा इसी रफ्तार से बढ़ती रही तो बुधवार रात या गुरुवार सुबह तक आसपास के करीब आधा दर्जन गांवों में सब्जियों की खड़ी फसलें पानी में डूब सकती हैं। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। बाढ़ का असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहने की चिंता है। क्षेत्र में दूध उत्पादन और पशुपालन से जुड़े लोगों को भी नुकसान की आशंका है। ग्रामीण लगातार नदी के जलस्तर और कटान की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
Ganga Water Level in Varanasi : 46 राहत शिविर अलर्ट, जरूरत पड़ने पर होगा सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट
संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने जिले में 46 राहत शिविरों को अलर्ट कर दिया है। जरूरत पड़ने पर बाढ़ प्रभावित लोगों को इन शिविरों में पहुंचाया जा सकेगा। राहत सामग्री, बचाव दल और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता की भी समीक्षा की जा रही है। प्रशासन का फोकस खासतौर पर नदी किनारे बसे निचले इलाकों और उन गांवों पर है, जहां पानी बढ़ने की स्थिति में सबसे पहले असर पड़ सकता है।
Ganga Water Level in Varanasi : एनडीआरएफ और जलपुलिस की लगातार गश्त
गंगा में बढ़ते पानी को देखते हुए जलपुलिस और एनडीआरएफ की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं। घाटों के अलावा नदी के किनारे बसे इलाकों और संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भी निगरानी बढ़ाई गई है। लोगों को नदी के पास जाने, गहरे पानी में उतरने और जलमग्न रास्तों से गुजरने से बचने की सलाह दी जा रही है। प्रशासन की कोशिश है कि जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी की स्थिति में किसी भी तरह की जनहानि को रोका जा सके।
Ganga Water Level in Varanasi : ‘काशी वंदन’ कार्यक्रम भी स्थगित
गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर काशी के दैनिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर भी पड़ने लगा है। नमो घाट पर आयोजित होने वाला दैनिक सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘काशी वंदन’ फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। घाटों पर सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कार्यक्रम को रोकने का फैसला लिया गया है। जलस्तर सामान्य होने और परिस्थितियां अनुकूल होने के बाद कार्यक्रम फिर शुरू किए जाने की संभावना है।
Ganga Water Level in Varanasi : तटवर्ती इलाकों में बढ़ी बेचैनी
गंगा का पानी लगातार बढ़ने से वाराणसी के तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। लोग नदी के जलस्तर पर नजर रख रहे हैं और संभावित खतरे को देखते हुए जरूरी सामान सुरक्षित स्थानों पर रखने लगे हैं। फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर ऊपरी क्षेत्रों में तेज बारिश हुई या गंगा-यमुना में अतिरिक्त पानी आया तो वाराणसी में जलस्तर और तेजी से बढ़ सकता है। ऐसे में अगले 24 से 36 घंटे काशी और आसपास के तटवर्ती इलाकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।