Varanasi cash seizure : वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन पर चेकिंग के दौरान संदिग्ध यात्री से 16 लाख रुपये नकद बरामद। वैध दस्तावेज न मिलने पर आयकर विभाग ने जांच शुरू की।

Varanasi cash seizure : वाराणसी के कैंट रेलवे स्टेशन पर मंगलवार को सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता हाथ लगी, जब संयुक्त चेकिंग अभियान के दौरान एक संदिग्ध यात्री के पास से करीब 16 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। इस कार्रवाई के बाद पूरे स्टेशन परिसर में हड़कंप मच गया।
Varanasi cash seizure : प्लेटफॉर्म 8-9 पर पकड़ा गया संदिग्ध

मिली जानकारी के अनुसार, 21 अप्रैल 2026 को रेलवे स्टेशन पर जीआरपी (Government Railway Police) और आरपीएफ (Railway Protection Force) की टीम नियमित जांच अभियान चला रही थी। इसी दौरान प्लेटफॉर्म नंबर 8 और 9 के बीच एक व्यक्ति संदिग्ध स्थिति में खड़ा मिला। जब सुरक्षा कर्मियों ने उसकी तलाशी ली, तो उसके ट्रॉली बैग और पिट्ठू बैग से भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई, जिसकी कुल कीमत लगभग 16 लाख रुपये आंकी गई।
Varanasi cash seizure : आरोपी की पहचान और दावा

पूछताछ में आरोपी की पहचान रवि गुलाटी, निवासी तिलहर (शाहजहांपुर) के रूप में हुई है। उसने दावा किया कि वह कॉस्मेटिक का कारोबार करता है और यह रकम पुराने व कटे-फटे नोट बदलवाने के लिए लेकर आया था। हालांकि, जांच के दौरान वह इस रकम से संबंधित कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका, जिससे संदेह और गहरा गया।
Varanasi cash seizure : जांच में सामने आई नई बातें

रेलवे पुलिस के अनुसार, शुरुआत में आरोपी ने बनारस आने से इनकार किया, लेकिन जब उसकी लोकेशन हिस्ट्री की जांच की गई तो पता चला कि वह पहले भी कई बार वाराणसी आ चुका है। इस खुलासे के बाद मामले को और गंभीर मानते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
Varanasi cash seizure : आयकर विभाग को सौंपी गई जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए जीआरपी और आरपीएफ ने इस केस को आयकर विभाग (Income Tax Department) को सौंप दिया है। अधिकारियों का मानना है कि यह मामला टैक्स चोरी, हवाला या किसी अन्य अवैध गतिविधि से जुड़ा हो सकता है। बताया जा रहा है कि आरोपी बेगमपुरा ट्रेन से शाहजहांपुर लौटने की तैयारी में था, तभी उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
Varanasi cash seizure : पैसे की जांच जारी
फिलहाल आयकर विभाग और पुलिस यह पता लगाने में जुटे हैं कि यह रकम किसकी है, इसे कहां ले जाया जा रहा था और इसके पीछे की असली मंशा क्या थी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह मामला टैक्स चोरी का है या किसी बड़े नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।