Maa Kalaratri Temple Varanasi : शारदीय नवरात्रि 2026- मां कालरात्रि का दर्शन, काशी की कालिका गली में है मंदिर

Maa Kalaratri Temple Varanasi : शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जा रही है। जानें काशी के कालिका गली स्थित मां कालरात्रि मंदिर का महत्व, दर्शन और पौराणिक मान्यताएं।

Maa Kalaratri Temple Varanasi : शारदीय नवरात्रि का सातवां दिन मां कालरात्रि को समर्पित, काशी की कालिका गली में विराजती हैं माता

Maa Kalaratri Temple Varanasi : वाराणसी। शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन शनिवार को देवी दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जा रही है। धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में मां कालरात्रि के दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र स्थित कालिका गली में मां कालरात्रि का प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर देर रात से ही मंदिर में भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। श्रद्धालु माता को नारियल, चुनरी, भोग, प्रसाद और श्रृंगार की सामग्री अर्पित कर सुख-समृद्धि एवं मंगलमय जीवन की कामना कर रहे हैं।

Maa Kalaratri Temple Varanasi : मां कालरात्रि की पूजा का विशेष महत्व

नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों में मां कालरात्रि सातवीं शक्ति हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां का यह स्वरूप दुष्टों का संहार करने वाला और अपने भक्तों को भय से मुक्ति दिलाने वाला है। उनका स्वरूप भले ही अत्यंत विकराल और रौद्र दिखाई देता है, लेकिन वे अपने भक्तों के प्रति कल्याणकारी और शुभ फल प्रदान करने वाली मानी जाती हैं। इसी कारण उन्हें ‘शुभंकरी’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि मां कालरात्रि की आराधना से भय, नकारात्मकता और बाधाओं से मुक्ति की कामना की जाती है। भक्त पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से उनकी पूजा करते हैं। नवरात्रि के सातवें दिन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ और मंत्र-जाप भी किया जाता है।

Maa Kalaratri Temple Varanasi : चंड-मुंड और रक्तबीज के संहार से जुड़ा है स्वरूप

पौराणिक कथाओं में मां कालरात्रि के स्वरूप को दुष्ट शक्तियों के विनाश से जोड़कर देखा जाता है। देवी के इस उग्र रूप को असुरों के संहार और धर्म की रक्षा का प्रतीक माना गया है। धार्मिक आख्यानों के अनुसार, देवी ने चंड और मुंड जैसे असुरों का वध किया था। इसी प्रसंग के कारण उनके एक स्वरूप को चामुंडा नाम से भी जाना जाता है। रक्तबीज के संहार की कथा भी देवी के उग्र रूप और उनकी अद्भुत शक्ति का वर्णन करती है। मान्यता है कि मां ने दुष्ट शक्तियों का अंत कर देवताओं और संसार को उनके आतंक से मुक्ति दिलाई। मां कालरात्रि का स्वरूप इस संदेश का प्रतीक है कि बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः सत्य और धर्म की विजय होती है।

Maa Kalaratri Temple Varanasi : काशी की कालिका गली में विराजती हैं मां कालरात्रि

काशी में मां कालरात्रि का मंदिर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र की कालिका गली में स्थित है। नवरात्रि के दौरान यहां दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। सप्तमी के अवसर पर भक्त माता के दरबार में नारियल, चुनरी, फूल, प्रसाद और श्रृंगार सामग्री चढ़ाकर आशीर्वाद मांगते हैं।

धार्मिक नगरी काशी में नवरात्रि का पर्व विशेष उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। नौ दिनों तक देवी दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। सप्तमी तिथि पर मां कालरात्रि की आराधना के साथ भक्त शक्ति, साहस, सुरक्षा और कल्याण की कामना करते हैं। मां कालरात्रि का यह स्वरूप श्रद्धालुओं को बुराई के विरुद्ध खड़े होने और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

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