RBI Repo Rate Cut : RBI ने रेपो रेट में 25 bps की कटौती कर इसे 5.25% कर दिया है। इससे लोन सस्ते होंगे और EMI में कमी आएगी। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था ‘गोल्डीलॉक्स जोन’ में प्रवेश कर रही है। जानें पूरी खबर।
RBI Repo Rate Cut : RBI ने फिर घटाई रेपो रेट — EMI होगी कम, लोन होंगे सस्ते

RBI Repo Rate Cut : रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) ने शुक्रवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट (bps) की कटौती कर दी। इस निर्णय के बाद रेपो रेट 5.5% से घटकर 5.25% पर आ गया है। इसकी घोषणा RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने की। रेपो रेट में कटौती का सीधा फायदा आम लोगों को मिलेगा क्योंकि इससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन जैसे सभी प्रकार के ऋण सस्ते हो जाएंगे। इसके चलते EMI में भी कमी आएगी और उपभोक्ताओं का वित्तीय बोझ कम होगा।
RBI Repo Rate Cut : इस साल अब तक कितनी हुई कटौती

RBI ने फरवरी से जून 2025 के बीच रेपो रेट में कुल 100 bps की कटौती की थी। इससे रेपो रेट 6.5% से घटकर 5.5% आ गया था। अगस्त और अक्टूबर की बैठकों में दरों को स्थिर रखा गया, लेकिन अब दिसंबर में RBI ने एक बार फिर कटौती कर रेपो रेट को 5.25% कर दिया है।
RBI Repo Rate Cut : गोल्डीलॉक्स जोन में पहुंच रही है भारतीय अर्थव्यवस्था
पॉलिसी ऐलान के दौरान गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, “अक्टूबर 2025 से महंगाई में लगातार कमी देखने को मिली है। वर्तमान ग्रोथ और इंफ्लेशन के आंकड़े दर्शाते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था एक दुर्लभ ‘गोल्डीलॉक्स पीरियड’ में प्रवेश कर रही है। विकास दर मजबूत है और महंगाई नियंत्रण में है।”

RBI Repo Rate Cut : क्या होता है गोल्डीलॉक्स
अर्थशास्त्र में गोल्डीलॉक्स जोन उस स्थिति को कहते हैं जब महंगाई नियंत्रित रहे, आर्थिक विकास स्थिर और संतुलित गति से बढ़ता रहे, अर्थव्यवस्था तेज भी न दौड़े कि महंगाई बढ़ जाए और इतनी धीमी भी न हो कि मंदी आने लगे। यह शब्द बच्चों की कहानी ‘गोल्डीलॉक्स एंड द थ्री बेयर्स’ से लिया गया है, जिसमें गोल्डीलॉक्स ऐसा दलिया खाती है जो न ज्यादा गर्म होता है और न ज्यादा ठंडा — बिल्कुल संतुलित। भारत की अर्थव्यवस्था भी इसी संतुलन वाली स्थिति का अनुभव कर रही है।
RBI Repo Rate Cut : रेपो रेट कम होने से क्या होगा फायदा
लोन सस्ते होंगे, होम लोन, कार लोन, एजुकेशन लोन की EMI में कमी, उपभोक्ताओं के हाथ में अधिक बचत, रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर में मांग बढ़ सकती है। कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था में लिक्विडिटी बढ़ेगी।

RBI Repo Rate Cut : क्या होता है रेपो रेट
रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर RBI देश के बैंकों को लोन देता है। अगर यह दर बढ़ती है तो बैंकों के लिए लोन महंगा हो जाता है और वे भी ग्राहकों को महंगे ब्याज पर लोन देते हैं। इसी तरह, रेपो रेट कम होता है तो बैंकों को सस्ता फंड मिलता है और लोन पर ब्याज कम कर दिया जाता है।
RBI Repo Rate Cut : RBI आमतौर पर रेपो रेट तब बढ़ाता है जब महंगाई बढ़ रही हो, बाजार में अत्यधिक लिक्विडिटी हो और जब आर्थिक विकास को गति देनी हो, तो वह इसे कम करता है। RBI के इस फैसले से आम जनता, उद्योग जगत और रियल एस्टेट क्षेत्र को बड़ी राहत मिलने वाली है। ब्याज दरों में कमी से खरीदारी क्षमता बढ़ेगी और आर्थिक गतिविधियों को नई मजबूती मिलेगी।