Kashi Vidyapith Tree Plantation : वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में पं. दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती की पूर्व संध्या पर सेवा संकल्प अभियान के तहत वृक्षारोपण हुआ। कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने पौधों के संरक्षण और संवर्धन को भी जिम्मेदारी बताया।
Kashi Vidyapith Tree Plantation : सिर्फ वृक्षारोपण नहीं, पौधों का संरक्षण और संवर्धन भी हमारी जिम्मेदारी – प्रो. आनन्द कुमार त्यागी
Kashi Vidyapith Tree Plantation : पं. दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती की पूर्व संध्या पर ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत काशी विद्यापीठ में वृक्षारोपण
Kashi Vidyapith Tree Plantation : वाराणसी। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती की पूर्व संध्या पर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ के तत्वावधान में गुरुवार को विश्वविद्यालय परिसर में ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत आयोजित कार्यक्रम में विश्वविद्यालय परिवार के शिक्षकों एवं अन्य सदस्यों ने विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए और उनके संरक्षण एवं नियमित देखभाल का संकल्प लिया।
Kashi Vidyapith Tree Plantation : कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने कहा कि वृक्षारोपण केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। लगाए गए पौधों का संरक्षण और उनका संवर्धन करना भी हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में वृक्षों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। बढ़ता प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और लगातार घटता हरित क्षेत्र पूरी मानवता के सामने गंभीर चुनौती बनकर उभर रहे हैं। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
Kashi Vidyapith Tree Plantation : एकात्म मानववाद में प्रकृति के साथ संतुलन का विचार
कुलपति प्रो. त्यागी ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का चिंतन मानव, समाज और प्रकृति के बीच संतुलित संबंध की भावना को मजबूत करता है। उनके एकात्म मानववाद के दर्शन में व्यक्ति को समाज और प्रकृति से अलग करके नहीं देखा गया है। इसलिए उनकी जयंती की पूर्व संध्या पर आयोजित यह वृक्षारोपण कार्यक्रम उनके विचारों को व्यवहार में उतारने की दिशा में एक सार्थक पहल है।
उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार का आह्वान किया कि परिसर में लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल को भी अपनी जिम्मेदारी का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि पौधे लगाने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि वे सुरक्षित रहें और विकसित होकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें।
Kashi Vidyapith Tree Plantation : पर्यावरण संरक्षण सामाजिक उत्तरदायित्व : डॉ. सुनीता पाण्डेय
पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ के निदेशक प्रो. कृष्ण कुमार सिंह ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जीवन और चिंतन समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने की प्रेरणा देता है। उनके विचारों से प्रेरणा लेकर समाज के व्यापक हित में कार्य करने की आवश्यकता है। विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. सुनीता पाण्डेय ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण सामाजिक उत्तरदायित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्वस्थ पर्यावरण के बिना समावेशी और सतत विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।
Kashi Vidyapith Tree Plantation : शोध पीठ की उप निदेशक प्रो. शेफाली वर्मा ठकराल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी अथवा संस्थागत कार्यक्रम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे जनभागीदारी का विषय बनाया जाना चाहिए। जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति पर्यावरण संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी समझेगा, तभी इसके प्रभावी परिणाम सामने आएंगे। शोध पीठ की उप निदेशक डॉ. उर्जस्विता सिंह ने कहा कि वृक्षारोपण वर्तमान पीढ़ी के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण निवेश है। लगाए गए पौधों का संरक्षण आने वाले समय में पर्यावरण को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
Kashi Vidyapith Tree Plantation : नगर निगम ने किया पौधों और ट्री गार्ड का प्रबंधन
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया। विश्वविद्यालय के शिक्षकगण एवं अन्य सदस्यों ने पौधरोपण में सहभागिता की तथा लगाए गए पौधों के संरक्षण और नियमित देखभाल का संकल्प लिया। वृक्षारोपण कार्यक्रम के संयोजन के साथ ट्री गार्ड एवं विभिन्न प्रकार के पौधों का प्रबंधन वाराणसी नगर निगम द्वारा महापौर अशोक तिवारी के निर्देशन में किया गया।
Kashi Vidyapith Tree Plantation : कार्यक्रम में कुलानुशासक डॉ. अम्बरीष राय, प्रभारी अभियंत्रण प्रो. राकेश कुमार तिवारी, संकायाध्यक्ष छात्र कल्याण प्रो. राजेश कुमार मिश्रा, प्रो. नंदिनी सिंह, डॉ. अनिल, डॉ. सतीश, डॉ. आनंद सिंह, राजेश राय, डॉ. अश्विनी सिंह सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं अन्य सदस्य उपस्थित रहे।