Election Commission SSR 2026: SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग ने यूपी, मणिपुर, पंजाब समेत 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SSR की घोषणा की। 1 जनवरी 2027 होगी पात्रता तिथि। जानें पूरी खबर।
Election Commission SSR 2026: SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, यूपी-मणिपुर समेत 17 राज्यों में होगा वोटर लिस्ट का SSR; 1 जनवरी 2027 होगी पात्रता तिथि
Election Commission SSR 2026: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच निर्वाचन आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) की घोषणा की है। इस प्रक्रिया में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर समेत कई राज्य शामिल हैं। आयोग ने संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र भेजकर पुनरीक्षण की जानकारी दी है। इसके लिए 1 जनवरी 2027 को पात्रता तिथि निर्धारित किया गया है।
इस कदम को आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना तथा पात्र नागरिकों को मतदान का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए सूची में शामिल करना है।
Election Commission SSR 2026: 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में होगा SSR
निर्वाचन आयोग के अनुसार, विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की प्रक्रिया जिन 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगी, उनमें शामिल हैं:
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
असम
बिहार
छत्तीसगढ़
गोवा
गुजरात
केरल
लक्षद्वीप
मध्य प्रदेश
मणिपुर
पुडुचेरी
पंजाब
राजस्थान
तमिलनाडु
उत्तर प्रदेश
उत्तराखंड
पश्चिम बंगाल
Election Commission SSR 2026: आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया चल रही है या हाल ही में पूरी हुई है, वहां SSR का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा। ऐसे में संबंधित क्षेत्रों में आगे की प्रक्रिया और समय-सारिणी को लेकर आयोग की अलग घोषणा महत्वपूर्ण होगी।
Election Commission SSR 2026: क्या है SSR और क्यों कराया जा रहा है?
विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण यानी SSR मतदाता सूची को अद्यतन करने की एक प्रक्रिया है। इसके माध्यम से पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में जोड़ने, पहले से दर्ज विवरणों में सुधार करने और आवश्यक संशोधन करने पर जोर दिया जाता है। निर्वाचन आयोग के मुताबिक, इस प्रक्रिया का प्रमुख उद्देश्य युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना है। इसके साथ ही मतदाताओं के नाम, पते और अन्य विवरणों में जरूरी सुधार कर सूची को अधिक सटीक बनाया जाता है। मतदाता सूची में नाम दर्ज होना मतदान करने के लिए जरूरी है। इसलिए पात्र नागरिकों के नाम समय पर सूची में शामिल करना और गलतियों को दूर करना चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Election Commission SSR 2026: यूपी समेत पांच राज्यों में 2027 में
विधानसभा चुनाव
SSR की घोषणा ऐसे समय हुई है, जब कई राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। उत्तर प्रदेश, मणिपुर, गोवा, पंजाब और उत्तराखंड में 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में मतदाता सूची का समय पर अद्यतन होना चुनावी तैयारियों का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त हो रहा है। वहीं, मणिपुर की 60 सदस्यीय विधानसभा, गोवा की 40 सदस्यीय विधानसभा, पंजाब की 117 सदस्यीय विधानसभा और उत्तराखंड की 70 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल मार्च 2027 में अलग-अलग तारीखों पर समाप्त होगा। इन राज्यों में चुनाव से पहले मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना जरूरी होगा, ताकि पात्र मतदाता मतदान से वंचित न रहें और सूची में दर्ज गलतियों को समय रहते ठीक किया जा सके।
Election Commission SSR 2026: चुनाव आयोग को चुनाव कराने का क्या है अधिकार?
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची तैयार करने और उसके पुनरीक्षण से संबंधित अधिकार प्राप्त हैं। वहीं, विधानसभा चुनावों के समय निर्धारण और संचालन के लिए संवैधानिक एवं वैधानिक प्रावधान लागू होते हैं। कानूनी प्रावधानों के अनुसार, किसी विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव कराने की व्यवस्था की जा सकती है। चुनाव की तारीखों और कार्यक्रम का औपचारिक ऐलान निर्वाचन आयोग अपने अधिकार क्षेत्र के तहत करता है।
Election Commission SSR 2026: SIR को लेकर विपक्ष के सवाल, आयोग पर उठ रहे आरोप
दूसरी ओर, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद भी जारी है। विपक्षी दलों और इंडिया गठबंधन से जुड़े नेताओं ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं को लेकर निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया में गड़बड़ियों की आशंका है। इसे लेकर विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किए जाने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाए जाने की खबरें सामने आई हैं।
Election Commission SSR 2026: हालांकि, विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों और निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया के संबंध में उठाए गए सवालों को अलग-अलग तथ्यों के आधार पर देखना जरूरी है। SSR की घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक बहस तेज है।
Election Commission SSR 2026: युवाओं और नए मतदाताओं के लिए अहम प्रक्रिया
17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रस्तावित SSR के दौरान पात्रता तिथि के आधार पर मतदाता सूची को अद्यतन करने पर ध्यान दिया जाएगा। खासतौर पर उन युवाओं के लिए यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी, जो पहली बार मतदान करने के पात्र बन रहे हैं। आयोग की ओर से राज्यों के लिए विस्तृत कार्यक्रम जारी होने के बाद मतदाता सूची में नाम जोड़ने, विवरण सुधारने और अन्य आवश्यक संशोधनों की समय-सीमा स्पष्ट होगी। ऐसे में पात्र नागरिकों को आयोग की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखनी चाहिए, ताकि वे समय रहते मतदाता सूची में अपना नाम और विवरण जांच सकें।
Election Commission SSR 2026: SIR को लेकर जारी विवाद के बीच निर्वाचन आयोग का 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SSR कराने का फैसला महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश समेत पांच चुनावी राज्यों में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में मतदाता सूची का अद्यतन होना चुनावी तैयारियों और पात्र मतदाताओं की भागीदारी के लिहाज से अहम रहेगा।