Dhammachakkappavattana Day Sarnath 2026 : सारनाथ में धम्मचक्कप्पवत्तन दिवस श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि भगवान बुद्ध का मध्यम मार्ग विश्व शांति और मानव कल्याण का आधार है। जानें कार्यक्रम की प्रमुख बातें।

Dhammachakkappavattana Day Sarnath 2026 : वाराणसी। भगवान बुद्ध की प्रथम धर्मदेशना की पावन स्मृति में आषाढ़ पूर्णिमा के अवसर पर बुधवार को सारनाथ स्थित केंद्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान (CIHTS) परिसर में धम्मचक्कप्पवत्तन (धर्मचक्र प्रवर्तन) दिवस श्रद्धा, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाया गया। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (IBC), नई दिल्ली एवं केंद्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर देश-विदेश से आए बौद्ध भिक्षुओं, विद्वानों, शोधार्थियों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। पूरे परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों, बुद्ध वंदना और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भगवान बुद्ध के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
Dhammachakkappavattana Day Sarnath 2026 : भगवान बुद्ध का मध्यम मार्ग आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रासंगिक
मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि भगवान बुद्ध का मध्यम मार्ग केवल भारत के लिए ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व के लिए शांति, करुणा, सह-अस्तित्व और मानव कल्याण का मार्ग है। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया विभिन्न प्रकार के संघर्षों और चुनौतियों का सामना कर रही है, ऐसे समय में बुद्ध के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध का जीवन हमें सत्य, अहिंसा, संयम और करुणा का संदेश देता है। यदि समाज उनके बताए मार्ग पर चले तो वैश्विक शांति और सामाजिक समरसता की स्थापना संभव है।
Dhammachakkappavattana Day Sarnath 2026 : बुद्ध से जुड़े स्थलों के विकास पर सरकार की विशेष प्राथमिकता

डिप्टी सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार तथा उत्तर प्रदेश की डबल इंजन सरकार भगवान बुद्ध से जुड़े ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों के संरक्षण, विकास और सौंदर्यीकरण के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, संकिसा और कौशांबी जैसे बौद्ध तीर्थों को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।
Dhammachakkappavattana Day Sarnath 2026 : बौद्ध पर्यटन को मिलेगा और बढ़ावा
अपने संबोधन में केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार बौद्ध पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं पर कार्य कर रही है। धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों को सरकारी स्तर पर सहयोग दिया जा रहा है, जिससे प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान मिल रही है। उन्होंने कहा कि सारनाथ केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि पूरी मानवता को शांति और करुणा का संदेश देने वाला आध्यात्मिक केंद्र है।
Dhammachakkappavattana Day Sarnath 2026 : स्वागत संबोधन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कार्यक्रम का शुभारंभ अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के महासचिव शार्त्से खेंसुर जंगचुप चोएडेन रिनपोछे के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने भगवान बुद्ध के उपदेशों की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्व में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए करुणा और अहिंसा के सिद्धांतों को अपनाना आवश्यक है। इसके बाद केंद्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान के विद्यार्थियों ने भगवान बुद्ध के जीवन, उनके ज्ञान प्राप्ति, प्रथम उपदेश तथा मानव कल्याण के संदेश पर आधारित आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
Dhammachakkappavattana Day Sarnath 2026 : आषाढ़ पूर्णिमा और धम्मचक्कप्पवत्तन दिवस का महत्व
कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि बौद्ध परंपरा में आषाढ़ पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि ज्ञान प्राप्ति के सात सप्ताह बाद भगवान बुद्ध ने इसी दिन सारनाथ में अपने पांच पूर्व साथियों को पहला उपदेश दिया था। इसी घटना को धम्मचक्कप्पवत्तन अर्थात धर्मचक्र प्रवर्तन कहा जाता है। पाली भाषा में इसे धम्मचक्कप्पवत्तन सुत्त तथा संस्कृत में धर्मचक्र प्रवर्तन सूत्र कहा जाता है। यही वह ऐतिहासिक क्षण था जब भगवान बुद्ध ने मानवता के कल्याण के लिए अपने ज्ञान का प्रथम प्रसार किया और बौद्ध संघ की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ।
Dhammachakkappavattana Day Sarnath 2026 : देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु
धम्मचक्कप्पवत्तन दिवस के अवसर पर भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा श्रीलंका, थाईलैंड, म्यांमार, भूटान, नेपाल और अन्य देशों से जुड़े बौद्ध अनुयायी एवं विद्वान भी कार्यक्रम में शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने भगवान बुद्ध के संदेशों को आत्मसात करने का संकल्प लिया और विश्व शांति, सद्भाव तथा मानव कल्याण की कामना की। धार्मिक आयोजन के साथ-साथ यह कार्यक्रम भारत की समृद्ध बौद्ध विरासत और सारनाथ की वैश्विक पहचान को और मजबूत करने वाला साबित हुआ।