Indian Knowledge Tradition : वाराणसी में भारतीय भाषा समागम-2026 में भारतीय ज्ञान परंपरा, भारतीय भाषाओं और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर जोर दिया गया। मुकुल कानिटकर ने इसे शाश्वत ज्ञान के साक्षात्कार की परंपरा बताया।
Indian Knowledge Tradition : भारतीय ज्ञान परंपरा शाश्वत ज्ञान के साक्षात्कार की परंपरा : मुकुल कानिटकर
Indian Knowledge Tradition : भारतीय भाषाएं वैश्विक ज्ञान-शक्ति बनें, काशी से उठा ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के सेतु का संदेश
Indian Knowledge Tradition : वाराणसी। हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर महामना मदन मोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ एवं हिन्दुस्थान समाचार बहुभाषी न्यूज एजेंसी के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को ‘भारतीय ज्ञान परंपरा, क्षेत्रीय भाषाएं और समृद्ध भारत’ विषय पर भारतीय भाषा समागम-2026 का आयोजन किया गया। काशी विद्यापीठ के गांधी अध्ययन पीठ सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान, शिक्षा, तकनीक और शोध से जोड़ने तथा भारतीय भाषाओं को वैश्विक ज्ञान-विमर्श की प्रभावी शक्ति बनाने पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
Indian Knowledge Tradition : शाश्वत ज्ञान के साक्षात्कार की परंपरा है भारतीय ज्ञान परंपरा
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रचार टोली के सदस्य मुकुल कानिटकर ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा किसी नई चीज की निर्मिति नहीं, बल्कि शाश्वत ज्ञान के साक्षात्कार की परंपरा है। उन्होंने कहा कि विविधता में एकत्व को पहचानना ज्ञान है, जबकि उस एक सत्य के विशेष रूप को समझना विज्ञान है। उन्होंने न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के उदाहरण के माध्यम से कहा कि न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण को बनाया नहीं, बल्कि प्रकृति में पहले से विद्यमान गुरुत्व के नियम का साक्षात्कार किया।
Indian Knowledge Tradition : इसी प्रकार भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकृति, जीवन और अस्तित्व में पहले से मौजूद सत्य को समझने और उसे समाज के कल्याण से जोड़ने की परंपरा रही है। कानिटकर ने कहा कि भारत की सभी भाषाएं केवल क्षेत्रीय भाषाएं नहीं, बल्कि अखिल भारतीय भाषाएं हैं। भाषा बदल सकती है, लेकिन भाव नहीं बदलता। भाषा व्यक्ति को ‘मैं’ से ‘हम’ की यात्रा कराती है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए काशी को इस ज्ञानधारा का महत्वपूर्ण केंद्र बताया।
Indian Knowledge Tradition : प्राचीन और आधुनिक ज्ञान के बीच संवाद का पुल जरूरी
मुख्य अतिथि हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कहा कि भारत के पुरातन ज्ञान और आधुनिक ज्ञान के बीच एक दीवार खड़ी हो गई है। इस दीवार को तोड़कर दोनों के बीच संवाद का पुल बनाना होगा। उन्होंने कहा कि भारत को हजारों वर्ष पीछे जाकर बैठने की जरूरत नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि प्राचीन भारतीय ज्ञान को वर्तमान विज्ञान, शिक्षा और शोध से जोड़ा जाए। काशी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। जिस प्रकार काशी में भौतिक विकास के लिए कॉरिडोर बने हैं, उसी प्रकार ज्ञान के क्षेत्र में भी एक ज्ञान कॉरिडोर बनाने की जरूरत है।
Indian Knowledge Tradition : डॉ. अग्निहोत्री ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को केवल दर्शन और अध्यात्म तक सीमित करना उचित नहीं है। भारत ने गणित, रसायन विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, चिकित्सा और खगोल विज्ञान सहित अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण ज्ञान अर्जित किया है। संस्कृत की प्राचीन पांडुलिपियों और आधुनिक विषयों के विशेषज्ञों के बीच संवाद स्थापित करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि अंग्रेजी में बोलने वाले व्यक्ति को विद्वान और अपनी भारतीय भाषा में बोलने वाले व्यक्ति को कमतर समझने की मानसिकता बदलनी होगी। भारतीय भाषाएं ज्ञान, विज्ञान और सांस्कृतिक परंपरा की महत्वपूर्ण वाहक हैं।
Indian Knowledge Tradition : काशी भारतीय भाषाओं का तीर्थ : पद्मूनारायण द्विवेदी
विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश के राज्य सूचना आयुक्त पद्मूनारायण द्विवेदी ने कहा कि काशी भारतीय भाषाओं की जननी और संस्कृत व्याकरण एवं साहित्य की समृद्ध परंपरा की केंद्रभूमि रही है। भारतेंदु हरिश्चंद्र जैसे साहित्यकारों की कर्मभूमि रही काशी वास्तव में भारतीय भाषाओं का तीर्थ है।
उन्होंने कहा कि काशी में विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों का संगम दिखाई देता है। भारतीय ज्ञान परंपरा के विकास और संरक्षण में काशी की भूमिका सदियों से महत्वपूर्ण रही है और आने वाले समय में भी यह ज्ञान परंपरा का प्रमुख केंद्र बन सकती है।
Indian Knowledge Tradition : भारतीय भाषाएं सांस्कृतिक पहचान की आधारशिला : नीलकंठ तिवारी
वाराणसी शहर दक्षिणी के विधायक एवं उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री नीलकंठ तिवारी ने कहा कि काशी विश्व की अद्वितीय आध्यात्मिक और ज्ञान नगरी है। देश के विकास में भारतीय भाषाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ये भाषाएं केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान की आधारशिला हैं। उन्होंने काशी की ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि शंकराचार्य को भी ज्ञान की प्राप्ति काशी के घाटों पर हुई थी। इसलिए भारतीय ज्ञान परंपरा और भारतीय भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए काशी का योगदान विशेष महत्व रखता है।
Indian Knowledge Tradition : चेतना और आत्मचिंतन पर जोर
विशिष्ट अतिथि केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थान, सारनाथ के कुलपति भिक्षु प्रो. (डॉ.) वंगछुग दोर्जे नेगी ने भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल भाव को ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ से जोड़ते हुए कहा कि हमें बाहरी आवरण के बजाय चेतना और चित्त पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा व्यक्ति के भीतर चेतना के विकास और आत्मचिंतन पर विशेष जोर देती है। किसी परंपरा को प्रमाणिक रूप से स्थापित होने के लिए उसे प्रमाणिकता, आत्मविश्लेषण और सम्यकता जैसी कसौटियों पर खरा उतरना आवश्यक है। इन्हीं आधारों पर किसी विचार और ज्ञान को वास्तविक परंपरा का स्वरूप प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग होने पर शब्दों का महत्व सीमित हो सकता है, लेकिन संयुक्त होने पर वे अपने अस्तित्व को प्राप्त करते हैं। भारतीय भाषाओं और ज्ञान परंपरा को भी इसी समन्वय की दृष्टि से देखने की आवश्यकता है।
Indian Knowledge Tradition : 15 भाषाओं में समाचार उपलब्ध करा रहा हिन्दुस्थान समाचार
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हिन्दुस्थान समाचार समूह के अध्यक्ष अरविंद भालचंद्र मार्डीकर ने कहा कि हिन्दुस्थान समाचार एक साथ 15 भाषाओं में समाचार उपलब्ध कराने वाली विश्व की एकमात्र बहुभाषी न्यूज एजेंसी है। संस्था की लगभग आठ दशक की यात्रा भारतीय भाषाओं में विश्वसनीय सूचना पहुंचाने की प्रतिबद्धता से जुड़ी रही है।
उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं में देश की ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक अनुभव सुरक्षित हैं। हिन्दुस्थान समाचार अब भारत से आगे वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। रूसी समाचार एजेंसी के साथ कार्य शुरू किया गया है, जबकि जापानी समाचार एजेंसी के साथ बातचीत चल रही है।
Indian Knowledge Tradition : 19 भाषा विद्वान सम्मानित
कार्यक्रम का स्वागत मुख्य समन्वयक एवं क्षेत्रीय संपादक डा. राजेश तिवारी ने किया। इस अवसर पर विभिन्न भारतीय भाषाओं के 19 भाषा विद्वानों को सम्मानित किया गया। साथ ही ‘युगवार्ता’ और ‘नवोत्थान’ पत्रिका का लोकार्पण भी किया गया।
Indian Knowledge Tradition : कार्यक्रम का संचालन हिन्दुस्थान समाचार के संपादक जितेंद्र तिवारी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन महामना मदन मोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक डॉ. नागेन्द्र कुमार सिंह ने किया। भारतीय भाषा समागम-2026 का संदेश स्पष्ट रहा कि भारतीय भाषाओं और ज्ञान परंपरा को केवल अतीत की विरासत के रूप में देखने के बजाय उन्हें आधुनिक विज्ञान, तकनीक, शिक्षा और शोध से जोड़कर समृद्ध भारत और वैश्विक ज्ञान-शक्ति के निर्माण का आधार बनाया जाए।