Garba Dandiya Varanasi : वाराणसी में माहेश्वरी क्लब ने गरबा-डांडिया आयोजनों में अश्लीलता और फूहड़ता पर आपत्ति जताई। आयुष मंत्री डॉ. दयालु ने पहल का समर्थन किया। समाज ने भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और पारंपरिक मर्यादा बनाए रखने का संकल्प लिया।
Garba Dandiya Varanasi : गरबा-डांडिया सनातन आस्था के प्रतीक, इनकी मर्यादा बनाए रखना हम सभी का धर्म : डॉ. दयालु
Garba Dandiya Varanasi : माहेश्वरी समाज की सभी संस्थाओं ने लिया संकल्प, नवरात्र उत्सव में भारतीय संस्कृति और धार्मिक आस्था को देंगे प्राथमिकता
Garba Dandiya Varanasi : माहेश्वरी क्लब ने गरबा-डांडिया आयोजनों में अश्लीलता और फूहड़ता परोसने की प्रवृत्ति पर जताई आपत्ति, पारंपरिक वेशभूषा और लोक संगीत को बढ़ावा देने की अपील
Garba Dandiya Varanasi : वाराणसी, 21 अक्टूबर। नवरात्र उत्सव के दौरान आयोजित होने वाले गरबा और डांडिया कार्यक्रमों की मूल सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक आस्था और सामाजिक मर्यादा बनाए रखने की अपील की गई है। माहेश्वरी क्लब वाराणसी ने आधुनिकता के नाम पर गरबा-डांडिया आयोजनों में अश्लीलता और फूहड़ता को बढ़ावा देने की प्रवृत्ति पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि ये आयोजन केवल मनोरंजन के साधन नहीं, बल्कि भारतीय लोक परंपरा, सनातन संस्कृति और मां आदिशक्ति की आराधना से जुड़े उत्सव हैं। इनकी मूल भावना और गरिमा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
माहेश्वरी क्लब के बैनर तले समाज की सभी संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में महमूरगंज स्थित माहेश्वरी भवन में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान भगवान महेश और मां दुर्गा के चित्र पर माल्यार्पण कर धार्मिक आस्था के साथ आयोजन की शुरुआत की गई। कार्यक्रम में समाज के सदस्यों ने नवरात्र उत्सव के दौरान भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक मर्यादाओं को प्राथमिकता देने का संकल्प लिया।
Garba Dandiya Varanasi : मां आदिशक्ति की आराधना का पवित्र स्वरूप हैं गरबा-डांडिया : डॉ. दयालु
माहेश्वरी क्लब की इस पहल का समर्थन करते हुए प्रदेश के आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने कहा कि गरबा और डांडिया केवल मनोरंजन के कार्यक्रम नहीं हैं, बल्कि मां आदिशक्ति की आराधना का पवित्र स्वरूप हैं। नवरात्र के दौरान इन आयोजनों की पवित्रता और मर्यादा बनाए रखना हम सभी का धर्म है।
उन्होंने माहेश्वरी क्लब की पहल का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि गरबा-डांडिया के आयोजक पारंपरिक वेशभूषा, लोक संगीत और अनुशासन का पालन करेंगे। उन्होंने भारतीय संस्कृति और धार्मिक आस्था से जुड़े उत्सवों को उनकी मूल भावना के अनुरूप आयोजित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
Garba Dandiya Varanasi : गरबा-डांडिया हमारी सनातन संस्कृति के उत्सव, डिस्को नहीं : गौरव राठी
माहेश्वरी क्लब के प्रचारमंत्री गौरव राठी ने कहा कि गरबा और डांडिया हमारी सनातन संस्कृति से जुड़े पारंपरिक उत्सव हैं। इन्हें आधुनिकता के नाम पर अश्लीलता और फूहड़ता का माध्यम बनाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर आयोजनों की मूल भावना से हटकर प्रस्तुतियां दी जा रही हैं, जो चिंता का विषय है। माहेश्वरी समाज हमेशा से भारतीय संस्कृति और परंपराओं का संरक्षक रहा है। ऐसे में समाज की जिम्मेदारी है कि वह आने वाली पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराए और पारंपरिक उत्सवों की गरिमा बनाए रखे। गौरव राठी ने सभी आयोजकों से अपील की कि गरबा-डांडिया कार्यक्रमों में डीजे और बॉलीवुड संगीत के बजाय पारंपरिक वाद्ययंत्रों, ढोल, मंजीरा और माता के भजनों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने पारंपरिक परिधान को प्रोत्साहित करने और कार्यक्रमों में अनुशासित वातावरण बनाए रखने पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि आयोजनों में ऐसा माहौल होना चाहिए, जहां महिलाएं और युवतियां सुरक्षित तथा सम्मानजनक वातावरण में उत्सव का आनंद ले सकें।
Garba Dandiya Varanasi : पारंपरिक लोकगीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को मिले प्राथमिकता
माहेश्वरी क्लब ने सभी गरबा-डांडिया आयोजकों से अपील की कि कार्यक्रमों में पारंपरिक नृत्य, लोकगीतों और भारतीय संस्कृति से जुड़ी प्रस्तुतियों को विशेष स्थान दिया जाए। संगीत और नृत्य का चयन धार्मिक अवसर की गरिमा के अनुरूप होना चाहिए। साथ ही प्रतिभागियों के लिए सम्मानजनक वातावरण, उचित अनुशासन और सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। क्लब का कहना है कि युवाओं को भारतीय परंपराओं से जोड़ने के लिए पारंपरिक वेशभूषा, लोककला और सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं को प्रोत्साहित करना जरूरी है। इससे नई पीढ़ी मनोरंजन के साथ देश की सांस्कृतिक विविधता, लोक परंपराओं और विरासत को भी समझ सकेगी। आयोजनों को आकर्षक बनाने के साथ उनकी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना भी आवश्यक है।
Garba Dandiya Varanasi : समाज की सभी संस्थाओं ने लिया सांस्कृतिक गरिमा बनाए रखने का संकल्प
कार्यक्रम का संचालन माहेश्वरी क्लब के अध्यक्ष बालकिशन असावा ने किया। कार्यक्रम के अंत में माहेश्वरी समाज की सभी संस्थाओं के सदस्यों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि आधुनिकता को अपनाते हुए भी गरबा-डांडिया की मूल पहचान, धार्मिक भावना और सांस्कृतिक गरिमा से समझौता नहीं किया जाएगा। सदस्यों ने कहा कि गरबा-डांडिया सामूहिक उत्सव, सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं। समाज, आयोजकों और प्रतिभागियों के आपसी सहयोग से इन कार्यक्रमों को अधिक आकर्षक, सुरक्षित और संस्कारपूर्ण बनाया जा सकता है।
इस अवसर पर बालकिशन असावा, लाला चांडक, पवन धूत, गौरव राठी, रेखा सोमानी, अलका बाहेती, मांगीलाल सारडा, पीयूष लखानी, शुभम साबू, आनंद झंवर, जीतू चांडक, विनोद भूतड़ा, जतिन मूंदड़ा, शुभम पेड़ीवाल, यश गट्टाणी, राकेश कचोलिया, केशव बाहेती, वत्सल माहेश्वरी और पूजा कोठारी सहित समाज की सहयोगी संस्थाओं के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।