Abe Memorial Corridor Varanasi : वाराणसी के रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आबे मेमोरियल कॉरिडोर का लोकार्पण हुआ। सीएम योगी ने मोदी-शिंजो आबे की दोस्ती, भारत-जापान संबंधों और भविष्य की साझेदारी पर बात की।
Abe Memorial Corridor Varanasi : काशी में ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का लोकार्पण, सीएम योगी बोले- पद बदले, लेकिन मोदी-आबे की दोस्ती नहीं बदली
Abe Memorial Corridor Varanasi : वाराणसी। भारत-जापान मैत्री और जापान के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत शिंजो आबे की स्मृति को समर्पित ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का बुधवार को वाराणसी स्थित रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में लोकार्पण किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापान की पूर्व प्रथम महिला और शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे के साथ कॉरिडोर का अनावरण किया। इस दौरान भारत-जापान संबंधों, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिंजो आबे की दोस्ती तथा दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को याद किया गया। समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिंजो आबे के बीच संबंध केवल राजनीतिक या कूटनीतिक प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं थे। दोनों नेताओं के बीच गहरा व्यक्तिगत विश्वास और आत्मीयता थी। उन्होंने कहा कि समय के साथ दोनों नेताओं के पद बदलते रहे, लेकिन मोदी और आबे की दोस्ती नहीं बदली।
Abe Memorial Corridor Varanasi : मोदी के संवैधानिक सफर के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष आयोजन
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी ने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। संवैधानिक पद पर उनकी यात्रा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर शिंजो आबे की स्मृति में काशी में इस कॉरिडोर का लोकार्पण विशेष महत्व रखता है। उन्होंने इसे उत्तर प्रदेश और भारत की जनता की ओर से शिंजो आबे को श्रद्धांजलि बताते हुए कहा कि आबे मेमोरियल कॉरिडोर भारत-जापान मित्रता और दोनों नेताओं के बीच मजबूत संबंधों की स्थायी स्मृति के रूप में काम करेगा।
Abe Memorial Corridor Varanasi : रुद्राक्ष बना भारत-जापान मैत्री का प्रतीक
सीएम योगी ने कहा कि जापान ने काशी को रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर के रूप में महत्वपूर्ण सौगात दी है। अब इसी परिसर में शिंजो आबे की स्मृतियों को स्थायी रूप दिया गया है। उन्होंने कहा कि रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर भारत और जापान के बीच सहयोग, संस्कृति और मैत्री का महत्वपूर्ण प्रतीक है।
Abe Memorial Corridor Varanasi : 2007 में हुई थी मोदी-आबे की पहली महत्वपूर्ण मुलाकात
मुख्यमंत्री ने नरेंद्र मोदी और शिंजो आबे के संबंधों की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2007 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी जापान गए थे, जहां उनकी शिंजो आबे से मुलाकात हुई। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच संबंध लगातार मजबूत होते गए और आगे चलकर भारत-जापान संबंधों को भी नई दिशा मिली।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में काशी और क्योटो के बीच पार्टनर सिटी सहयोग को आगे बढ़ाया गया। इसके तहत विरासत संरक्षण, संस्कृति और शहरी विकास के क्षेत्रों में सहयोग की रूपरेखा तैयार हुई।
Abe Memorial Corridor Varanasi : 2015 में काशी आए थे शिंजो आबे
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि दिसंबर 2015 में शिंजो आबे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वाराणसी आए थे। इस दौरान दोनों नेताओं ने दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती में हिस्सा लिया था। यह यात्रा भारत-जापान संबंधों के साथ-साथ काशी की वैश्विक पहचान के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रही। इसके बाद वर्ष 2017 में अहमदाबाद में नरेंद्र मोदी और शिंजो आबे ने मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना की आधारशिला रखी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों नेताओं के व्यक्तिगत संबंधों का असर दोनों देशों के रणनीतिक और आर्थिक सहयोग पर भी दिखाई दिया।
Abe Memorial Corridor Varanasi : ‘यह सिर्फ प्रोटोकॉल नहीं, गहरा व्यक्तिगत रिश्ता था’
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत ने शिंजो आबे को वर्ष 2021 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया था। जुलाई 2022 में शिंजो आबे की हत्या के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सितंबर 2022 में उनके राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने टोक्यो पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह घटनाक्रम बताता है कि मोदी और आबे के बीच संबंध महज औपचारिक कूटनीतिक रिश्ते नहीं थे, बल्कि दोनों नेताओं के बीच गहरा व्यक्तिगत जुड़ाव था। उन्होंने भारत-जापान संबंधों को विश्वास और साझा मूल्यों पर आधारित साझेदारी बताते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्ते सिर्फ व्यापार और आर्थिक हितों तक सीमित नहीं हैं। संस्कृति, लोकतांत्रिक मूल्यों, तकनीक और आपसी विश्वास ने इस साझेदारी को व्यापक आधार दिया है।
Abe Memorial Corridor Varanasi : सेमीकंडक्टर से AI तक पहुंची भारत-जापान साझेदारी
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भारत-जापान सहयोग अब पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे भविष्य के महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि जापान के पास अत्याधुनिक तकनीक और लंबे औद्योगिक अनुभव की ताकत है, जबकि भारत के पास बड़ा बाजार, युवा कार्यबल और विशाल प्रतिभा है। दोनों देशों की क्षमताएं एक-दूसरे की पूरक हैं।
योगी ने बताया कि उत्तर प्रदेश भी जापानी कंपनियों के साथ निवेश और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा दे रहा है। प्रदेश और जापानी कंपनियों के बीच करीब 90 हजार करोड़ रुपये के एमओयू और निवेश प्रस्तावों पर चर्चा और समझौते हुए हैं।
Abe Memorial Corridor Varanasi : नोएडा के पास जापानी सिटी विकसित करने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़े क्षेत्र में करीब 500 एकड़ भूमि पर जापानी सिटी विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जापान की प्रिसिजन इंजीनियरिंग, तकनीकी दक्षता और उत्तर प्रदेश के बड़े बाजार, बेहतर कनेक्टिविटी तथा विकसित हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर का संयोजन भविष्य में निवेश के नए अवसर पैदा कर सकता है।
Abe Memorial Corridor Varanasi : ‘जापान की आस्था का रास्ता यूपी से होकर गुजरता है’
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश और जापान के बीच संबंध केवल आर्थिक या कूटनीतिक नहीं हैं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी दोनों के बीच गहरा जुड़ाव है। उन्होंने सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, कौशाम्बी और संकिसा जैसे बौद्ध तीर्थस्थलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन स्थलों का जापान के लोगों और बौद्ध अनुयायियों के लिए विशेष महत्व है। मुख्यमंत्री ने काशी और क्योटो को दो प्राचीन सभ्यताओं की आत्मा बताते हुए कहा कि दोनों शहरों ने अपनी विरासत को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक विकास का रास्ता दिखाया है।
Abe Memorial Corridor Varanasi : 2027 में भारत-जापान संबंधों के 75 वर्ष
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2027 में भारत और जापान के राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होंगे। ऐसे महत्वपूर्ण पड़ाव से पहले काशी में आबे मेमोरियल कॉरिडोर का लोकार्पण दोनों देशों की मित्रता और दीर्घकालिक साझेदारी का महत्वपूर्ण प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह कॉरिडोर आने वाली पीढ़ियों को भारत-जापान संबंधों और शिंजो आबे के योगदान की याद दिलाता रहेगा।
Abe Memorial Corridor Varanasi : पति शिंजो आबे को याद कर भावुक हुईं अकी आबे
समारोह के दौरान शिंजो आबे की पत्नी और जापान की पूर्व प्रथम महिला अकी आबे अपने पति को याद करते हुए भावुक हो गईं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिंजो आबे के बीच रहे गहरे आत्मीय संबंधों का उल्लेख किया।
अकी आबे ने कहा कि वर्ष 2015 में वाराणसी की यात्रा के बाद शिंजो आबे ने उन्हें काशी और गंगा आरती से जुड़े अपने अनुभव बताए थे। तभी से उनके मन में स्वयं वाराणसी आने की इच्छा थी। उन्होंने कहा कि पति की स्मृति में काशी में बने इस कॉरिडोर से जुड़ना उनके लिए भावनात्मक क्षण है। अकी आबे ने रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर की वास्तुकला और उसके डिजाइन की भी सराहना की तथा इसे भारत-जापान सांस्कृतिक संबंधों का सुंदर प्रतीक बताया।
Abe Memorial Corridor Varanasi : अकी आबे को भेंट किया गुलाबी मीनाकारी स्मृति चिह्न
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अकी आबे को वाराणसी की प्रसिद्ध गुलाबी मीनाकारी से निर्मित स्मृति चिह्न भेंट किया। समारोह में प्रदेश सरकार के मंत्री, स्थानीय जनप्रतिनिधि, अधिकारी और जापानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य मौजूद रहे। आबे मेमोरियल कॉरिडोर का लोकार्पण ऐसे समय हुआ है, जब भारत और जापान अपने संबंधों को आर्थिक, तकनीकी, सांस्कृतिक और रणनीतिक स्तर पर और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। काशी में शिंजो आबे की स्मृति को समर्पित यह स्थान दोनों देशों की दोस्ती की एक स्थायी निशानी के रूप में देखा जा रहा है।