AI in Education and Judiciary : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के विधि विभाग में स्थापना दिवस एवं पुरातन छात्र समागम हुआ। AI के शिक्षा और न्याय व्यवस्था में उपयोग, निजता और प्रमाणिकता पर चर्चा हुई।
AI in Education and Judiciary : शैक्षिक जगत से लेकर न्यायालयी व्यवस्था तक AI ला रहा बदलाव : प्रो. आनन्द कुमार त्यागी
AI in Education and Judiciary : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के विधि विभाग में स्थापना दिवस समारोह एवं पुरातन छात्र समागम, AI के उपयोग और संभावनाओं पर हुआ मंथन
AI in Education and Judiciary : वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के विधि विभाग में शुक्रवार को स्थापना दिवस समारोह एवं पुरातन छात्र समागम का आयोजन किया गया। समारोह में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence-AI) के बढ़ते प्रभाव, शिक्षा एवं न्याय व्यवस्था में इसके उपयोग तथा इससे जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम में शिक्षकों, न्यायविदों, पुरातन छात्रों और विद्यार्थियों ने सहभागिता की।
AI in Education and Judiciary : समारोह की अध्यक्षता करते हुए महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के भविष्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि AI समाज के विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से परिवर्तन ला रहा है। विशेष रूप से शैक्षिक जगत के साथ-साथ न्यायालयी व्यवस्था को भी यह तकनीक सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग ज्ञान और कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ-साथ जिम्मेदारी और सावधानी के साथ किया जाना आवश्यक है।
AI in Education and Judiciary : न्याय व्यवस्था में AI के उपयोग पर सावधानी जरूरी
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इलाहाबाद उच्च न्यायालय, प्रयागराज के न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने अनेक उदाहरणों और प्रसंगों के माध्यम से बताया कि AI का प्रभाव न्याय व्यवस्था सहित विभिन्न क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहा है।
AI in Education and Judiciary : न्यायमूर्ति गिरि ने निजता (Privacy) से जुड़े पहलुओं पर विशेष जोर दिया। उन्होंने भारतीय न्याय व्यवस्था में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग को लेकर सावधानी बरतने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि न्यायिक कार्यों में AI से प्राप्त सूचनाओं और परिणामों का इस्तेमाल पर्याप्त जांच-पड़ताल तथा प्रमाणिकता सुनिश्चित करने के बाद ही किया जाना चाहिए। तकनीक से प्राप्त जानकारी को अंतिम सत्य मानने के बजाय उसकी विश्वसनीयता और स्रोत की जांच आवश्यक है।
AI in Education and Judiciary : डीप लर्निंग और मशीन लर्निंग की दी जानकारी
विशिष्ट अतिथि प्रो. राखी गर्ग, प्रभारी, कम्प्यूटर विभाग, महिला महाविद्यालय, बीएचयू ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता की तकनीकी बारीकियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने डीप लर्निंग और मशीन लर्निंग की कार्यप्रणाली को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि आज लगभग प्रत्येक क्षेत्र के लिए AI आधारित टूल उपलब्ध हैं। इनका सही तरीके से इस्तेमाल करके कम समय में बड़ी मात्रा में सूचनाओं का एकत्रीकरण, विश्लेषण और व्यवस्थित अध्ययन किया जा सकता है। इससे किसी विषय पर निष्कर्ष तक पहुंचने में भी सहायता मिलती है।
AI in Education and Judiciary : प्रो. राखी गर्ग ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से भारत में विधि के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने विभिन्न AI टूल के उदाहरण देते हुए सुवास, अनुवाद और जैमिनी जैसे टूल के उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को AI की संभावनाओं के साथ-साथ उसके जिम्मेदार और विवेकपूर्ण इस्तेमाल के प्रति भी जागरूक किया।
AI in Education and Judiciary : पुरातन छात्रों को स्मृति चिह्न देकर किया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान विधि विभाग के पुरातन छात्र समागम का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर विभाग से जुड़े पुराने विद्यार्थियों को स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में डॉ. पूजा सिंह, डॉ. धीरेन्द्र कुमार सिंह, डॉ. हंसराज, डॉ. शशांक चन्देल, डॉ. विशाल राय, डॉ. हिमांशु गिरि, डॉ. आश्रया दुब, डॉ. आलोक राय, डॉ. कलीम अख्तर, डॉ. अतुल कुमार पाल और डॉ. कुलदीप यादव शामिल रहे।
AI in Education and Judiciary : कार्यक्रम का स्वागत विभागाध्यक्ष एवं संकायाध्यक्ष प्रो. रंजन कुमार तथा डॉ. शिल्पी गुप्ता ने किया। संचालन कृतिका पाण्डेय ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. हंसराज ने किया।
AI in Education and Judiciary : इस अवसर पर प्रो. संजय, प्रो. अमिता सिंह, छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष प्रो. राजेश कुमार मिश्र सहित विभाग के शिक्षक, विद्यार्थी, पुरातन छात्र एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।