AI in Higher Education : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धि की उपयोगिता विषयक छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हुआ। कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने शिक्षण, शोध और शैक्षणिक प्रशासन में एआई की उपयोगिता बताई।
AI in Higher Education : उच्च शिक्षा में एआई शिक्षण-अधिगम और शोध की गुणवत्ता बढ़ाने का महत्वपूर्ण उपकरण : प्रो. ए.के. त्यागी
AI in Higher Education : काशी विद्यापीठ में ‘उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धि की उपयोगिता’ विषयक छह दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम आयोजित
AI in Higher Education : वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र की ओर से ‘उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धि (एआई) की उपयोगिता’ विषयक छह दिवसीय संकाय संवर्धन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग, शिक्षण-अधिगम को प्रभावी बनाने, शोध कार्यों में सहायता तथा शैक्षणिक प्रशासन में इसकी उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की गई।
AI in Higher Education : कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब केवल एक तकनीकी साधन नहीं रह गई है, बल्कि यह शिक्षण-अधिगम की गुणवत्ता, शोध की प्रभावशीलता और शैक्षणिक प्रशासन को अधिक दक्ष बनाने वाला महत्वपूर्ण उपकरण बन रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षक एआई का उपयोग अपनी शिक्षण-पद्धति के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि उसके प्रभावी सहयोगी के रूप में कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि एआई की सहायता से शिक्षक अपनी कक्षाओं के लिए पाठ-योजना, विषयानुकूल शिक्षण सामग्री, प्रश्न-पत्र, बहुविकल्पीय प्रश्न, प्रस्तुतीकरण तथा विद्यार्थियों की अलग-अलग अधिगम आवश्यकताओं के अनुरूप गतिविधियां तैयार कर सकते हैं। इससे शिक्षकों को विद्यार्थियों की जरूरतों के अनुसार शिक्षण सामग्री विकसित करने में सुविधा मिल सकती है।
AI in Higher Education : शोध कार्य में भी एआई की महत्वपूर्ण भूमिका
प्रो. त्यागी ने कहा कि शोध के क्षेत्र में भी एआई का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इसके माध्यम से शोधकर्ता साहित्य खोजने, शोध-विचार विकसित करने, आंकड़ों को व्यवस्थित करने और उनके विश्लेषण तथा शोध-लेखन जैसे कार्यों में सहायता प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मूल्यांकन के क्षेत्र में भी एआई विद्यार्थियों के उत्तरों के विश्लेषण और त्वरित प्रतिपुष्टि देने में उपयोगी हो सकती है।
हालांकि, उन्होंने एआई के उपयोग के साथ जुड़ी जिम्मेदारियों पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों और विद्यार्थियों को एआई से तैयार सामग्री की सत्यता की जांच, शैक्षणिक ईमानदारी, साहित्यिक चोरी, डेटा की गोपनीयता और एआई के नैतिक उपयोग के प्रति जागरूक किया जाना आवश्यक है। तकनीक का उपयोग तभी अधिक प्रभावी होगा, जब उसके साथ मानवीय विवेक और शैक्षणिक मूल्यों को भी महत्व दिया जाए।
AI in Higher Education : एआई को विवेकपूर्ण और नैतिक तरीके से उपयोग करने पर जोर
मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र के निदेशक प्रो. रमाकान्त सिंह ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को केवल एआई तकनीक का इस्तेमाल करना सिखाना नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षकों में यह क्षमता विकसित करना है कि वे एआई का विवेकपूर्ण, नैतिक और शैक्षिक उद्देश्यों के अनुरूप उपयोग कर सकें।
उन्होंने कहा कि एआई के प्रभावी प्रयोग से शिक्षण प्रक्रिया को अधिक रोचक और उपयोगी बनाया जा सकता है। साथ ही शोध कार्यों और विद्यार्थियों के अधिगम अनुभव को भी अधिक प्रभावी बनाने में इसका उपयोग किया जा सकता है।
AI in Higher Education : विशेषज्ञों ने दिया एआई के व्यावहारिक उपयोग का प्रशिक्षण
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में भौतिकी विभाग, पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय, भटिंडा के डॉ. अभिषेक कुमार सोनी ने व्याख्यान दिया और उच्च शिक्षा में एआई के व्यावहारिक उपयोग से संबंधित जानकारी साझा की। द्वितीय सत्र में एनसीईआरटी, नई दिल्ली के प्रो. शिरीष पाल सिंह ने अपने व्याख्यान के माध्यम से प्रतिभागियों को एआई के विभिन्न उपयोगों और इसकी संभावनाओं से परिचित कराया।
AI in Higher Education : कार्यक्रम का संचालन दीपशिखा श्रीवास्तव ने किया। दीपक मिश्र ने धन्यवाद ज्ञापित किया। तकनीकी सहयोग डॉ. विनय सिंह एवं अनुपम मिश्रा ने प्रदान किया। कार्यक्रम में शिक्षकों ने उच्च शिक्षा में एआई के वर्तमान और संभावित उपयोगों को लेकर विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त की।