FSSAI New Labeling Rules: FSSAI ने डेयरी उत्पादों की लेबलिंग को लेकर नए नियमों का मसौदा तैयार किया है। जानें एनालॉग पनीर क्या है और प्रस्तावित नियमों से ग्राहकों को क्या फायदा होगा।
FSSAI New Labeling Rules: मिलावटखोरों पर कसेगा शिकंजा! असली और एनालॉग पनीर की होगी साफ पहचान, FSSAI ला रहा नया लेबलिंग नियम
FSSAI New Labeling Rules: नई दिल्ली: बाजार में पनीर, दूध, मक्खन और मावा जैसे डेयरी उत्पाद खरीदने वाले उपभोक्ताओं के लिए अहम खबर है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने डेयरी उत्पादों की पहचान और लेबलिंग को लेकर नए नियमों का मसौदा तैयार किया है। प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य ऐसे उत्पादों की पहचान को स्पष्ट करना है, जिनमें दूध या दूध से प्राप्त सामग्री के बजाय वनस्पति तेल, स्टार्च या अन्य गैर-डेयरी
सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है।
FSSAI New Labeling Rules: इन उत्पादों को आम तौर पर एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट कहा जाता है। FSSAI के प्रस्ताव का फोकस यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ता को पैकेज देखकर यह स्पष्ट हो सके कि वह पारंपरिक दूध से बना डेयरी उत्पाद खरीद रहा है या किसी अन्य सामग्री से तैयार विकल्प।
FSSAI New Labeling Rules: ‘पनीर’ नाम के इस्तेमाल पर लग सकती है रोक
प्रस्तावित नियमों के तहत ऐसे उत्पादों को उनकी वास्तविक प्रकृति और पहचान के अनुरूप नाम और लेबल के साथ बाजार में पेश करना होगा। यदि किसी उत्पाद में दूध से प्राप्त सामग्री के स्थान पर गैर-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है, तो उसे इस तरह प्रस्तुत करने पर रोक लग सकती है जिससे ग्राहक उसे पारंपरिक डेयरी पनीर समझे।
खास तौर पर ‘पनीर’ जैसे डेयरी उत्पादों के नाम के इस्तेमाल को लेकर नियमों में स्पष्टता लाई जा सकती है। यदि कोई उत्पाद वनस्पति तेल, स्टार्च या अन्य गैर-डेयरी सामग्री से तैयार किया गया है, तो उसकी पैकेजिंग और मार्केटिंग में उसकी वास्तविक पहचान को स्पष्ट करना जरूरी हो सकता है।
FSSAI New Labeling Rules: क्या है एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट?
एनालॉग डेयरी उत्पाद ऐसे खाद्य उत्पाद होते हैं जिन्हें डेयरी उत्पादों के समान रूप, बनावट या उपयोग के लिए तैयार किया जाता है, लेकिन उनमें दूध या दूध से प्राप्त सामग्री के स्थान पर अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है।
उदाहरण के तौर पर किसी पनीर जैसे उत्पाद में दूध के बजाय वनस्पति वसा, स्टार्च या अन्य गैर-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। देखने में ऐसा उत्पाद पारंपरिक पनीर जैसा लग सकता है, लेकिन उसकी सामग्री अलग होती है। यही वजह है कि प्रस्तावित लेबलिंग नियमों में उत्पाद की वास्तविक पहचान को प्रमुखता देने पर जोर दिया जा रहा है।
FSSAI New Labeling Rules: ग्राहकों को कैसे होगा फायदा?
नए नियमों का सबसे बड़ा उद्देश्य उपभोक्ताओं को सही और स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराना है। मौजूदा समय में ग्राहक कई बार केवल उत्पाद के रंग, आकार, पैकिंग या नाम के आधार पर खरीदारी कर लेते हैं। यदि लेबल पर यह स्पष्ट रूप से बताया जाए कि उत्पाद में दूध से प्राप्त सामग्री का इस्तेमाल हुआ है या नहीं, तो ग्राहक अपनी जरूरत और पसंद के अनुसार फैसला कर सकेंगे। इससे उन उपभोक्ताओं के लिए भी जानकारी अधिक स्पष्ट हो सकती है जो विशेष रूप से पारंपरिक दूध से बने डेयरी उत्पाद खरीदना चाहते हैं।
FSSAI New Labeling Rules: पैकेजिंग और मार्केटिंग में हो सकता है बदलाव
प्रस्तावित नियम लागू होने के बाद संबंधित खाद्य कारोबारियों को अपने उत्पादों की पैकेजिंग, लेबल, नाम और मार्केटिंग सामग्री में बदलाव करना पड़ सकता है।
ऐसे उत्पाद जिनकी पहचान वर्तमान में डेयरी उत्पादों से मिलती-जुलती है, उन्हें अपनी वास्तविक सामग्री और प्रकृति को स्पष्ट तरीके से प्रदर्शित करना पड़ सकता है। इससे बाजार में डेयरी और गैर-डेयरी विकल्पों के बीच अंतर अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।
FSSAI New Labeling Rules: पहले से बिक रहे उत्पाद भी दायरे में आ सकते हैं
प्रस्तावित नियमों का प्रभाव केवल भविष्य में लॉन्च होने वाले उत्पादों तक सीमित नहीं रह सकता। लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन के तहत पहले से बाजार में बिक रहे कुछ उत्पाद भी नए प्रावधानों के दायरे में आ सकते हैं।
ऐसी स्थिति में संबंधित कंपनियों और खाद्य कारोबारियों को अपने उत्पादों की लेबलिंग और मार्केटिंग की समीक्षा करनी पड़ सकती है और जरूरत पड़ने पर निर्धारित बदलाव करने पड़ सकते हैं।
FSSAI New Labeling Rules: FSSAI ने 60 दिनों में मांगे सुझाव
FSSAI ने प्रस्तावित नियमों को लेकर संबंधित हितधारकों, खाद्य उद्योग और आम लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। इसके लिए 60 दिनों की अवधि निर्धारित की गई है।
इस दौरान प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम नियम जारी किए जा सकते हैं। इसलिए फिलहाल इसे अंतिम नियम नहीं माना जाना चाहिए।
FSSAI New Labeling Rules: अभी प्रस्तावित मसौदा है, अंतिम नियम का इंतजार
महत्वपूर्ण बात यह है कि FSSAI का यह कदम फिलहाल प्रस्तावित मसौदे के स्तर पर है। अंतिम नियम जारी होने के बाद ही यह पूरी तरह स्पष्ट होगा कि एनालॉग डेयरी उत्पादों की पैकेजिंग, लेबलिंग और मार्केटिंग के लिए कौन-कौन से प्रावधान लागू होंगे और ‘पनीर’ जैसे डेयरी नामों के इस्तेमाल को लेकर अंतिम व्यवस्था क्या होगी।