PM Modi Appeal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल बचाने, वर्क फ्रॉम होम अपनाने, एक साल तक सोना न खरीदने और विदेशी यात्राएं टालने की अपील की है। जानिए इसके पीछे विदेशी मुद्रा भंडार, बढ़ते व्यापार घाटे और वैश्विक संकट से जुड़ा पूरा आर्थिक गणित।

PM Modi Appeal: वर्क फ्रॉम होम से लेकर सोना न खरीदने तक… PM मोदी क्यों कर रहे देश से ये बड़ी अपील? जानिए इसके आर्थिक और राष्ट्रीय मायने
PM Modi Appeal: नई दिल्ली। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देशवासियों से ऐसी अपील की है, जो केवल आर्थिक सलाह नहीं बल्कि आने वाले समय की बड़ी चुनौतियों का संकेत भी मानी जा रही है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से पेट्रोल-डीजल बचाने, सार्वजनिक परिवहन अपनाने, गैर-जरूरी विदेश यात्राएं टालने, एक साल तक सोना न खरीदने और मेड-इन-इंडिया उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि “देशभक्ति सिर्फ सीमा पर जान देना नहीं, बल्कि संकट के समय जिम्मेदारी से जीना भी देशभक्ति है।” उनकी यह अपील ऐसे समय आई है जब भारत पर बढ़ते आयात बिल, कमजोर होते रुपए और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव जैसी चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं।
PM Modi Appeal: पेट्रोल-डीजल बचाने पर क्यों जोर?
प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से मेट्रो, बस, कारपूल और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) अपनाने की अपील की। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण भारत की तेल आयात पर निर्भरता है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। ऐसे में यदि देश के भीतर ईंधन की खपत कम होती है तो सरकार का आयात बिल भी कम होगा और विदेशी मुद्रा की बचत होगी।

PM Modi Appeal: वर्क फ्रॉम होम से कैसे बचेगा अरबों का ईंधन?
प्रधानमंत्री ने कॉर्पोरेट कंपनियों से दोबारा वर्क फ्रॉम होम मॉडल अपनाने पर विचार करने को कहा। दरअसल, रोजाना लाखों लोग ऑफिस आने-जाने में पेट्रोल और डीजल खर्च करते हैं। अगर कंपनियां सप्ताह में कुछ दिन भी कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दें तो ट्रैफिक कम होगा, ईंधन की खपत घटेगी और तेल आयात का बोझ भी कम पड़ेगा। कोविड काल में यह मॉडल पहले ही प्रभावी साबित हो चुका है।
PM Modi Appeal: विदेश यात्रा टालने की अपील क्यों?
प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों से गैर-जरूरी विदेश यात्राएं, विदेशी छुट्टियां और डेस्टिनेशन वेडिंग्स टालने की अपील की। इसकी सबसे बड़ी वजह विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ता दबाव है। डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर हो रहा है और 85 के स्तर से गिरकर 93 तक पहुंच गया है। विदेश यात्रा में भारी मात्रा में डॉलर खर्च होते हैं। यदि लोग घरेलू पर्यटन और भारत में ही आयोजन को प्राथमिकता दें तो विदेशी मुद्रा की बचत संभव होगी।
PM Modi Appeal: एक साल तक सोना न खरीदने की अपील के पीछे क्या है गणित?

प्रधानमंत्री मोदी की सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाली अपील रही—“एक साल तक सोना मत खरीदो।” भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड इंपोर्टर है। देश हर साल करीब 59 अरब डॉलर यानी लगभग पांच लाख करोड़ रुपये का सोना विदेशों से खरीदता है। सिर्फ अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच भारत ने 26.51 अरब डॉलर का सोना आयात किया। दिवाली और शादी के सीजन में अक्टूबर 2025 में सोने का आयात 200 प्रतिशत तक बढ़ गया, जिससे भारत का व्यापार घाटा रिकॉर्ड 41.68 अरब डॉलर तक पहुंच गया। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार जब सोने का आयात बढ़ता है तो डॉलर की मांग भी बढ़ती है। इससे रुपया कमजोर होता है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है। यही वजह है कि सरकार फिलहाल सोने की खरीदारी कम करने की अपील कर रही है।
PM Modi Appeal: मेड इन इंडिया पर क्यों दिया जा रहा जोर?
प्रधानमंत्री ने लोगों से स्थानीय और भारतीय उत्पाद खरीदने को कहा। जूते, बैग, इलेक्ट्रॉनिक्स और रोजमर्रा के सामानों में विदेशी उत्पादों पर निर्भरता कम करने की सलाह दी गई है। भारत का व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है और चीन समेत कई देशों से सस्ते उत्पादों का आयात घरेलू उद्योगों पर असर डाल रहा है। यदि लोग भारतीय उत्पाद खरीदेंगे तो आयात घटेगा, घरेलू उद्योग मजबूत होंगे और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
PM Modi Appeal: किसानों से खाद कम करने और सौर पंप अपनाने की अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों से रासायनिक खाद का इस्तेमाल 50 प्रतिशत तक कम करने, प्राकृतिक खेती अपनाने और डीजल पंप की जगह सौर पंप लगाने की अपील की। भारत अपनी जरूरत का लगभग 25 प्रतिशत यूरिया, 90 प्रतिशत फॉस्फेट और 100 प्रतिशत पोटाश विदेशों से आयात करता है। वर्ष 2023-24 में उर्वरक सब्सिडी का बोझ 1.75 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। यूरिया उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैस की जरूरत होती है, जो खुद आयात की जाती है। पश्चिम एशिया संकट के कारण गैस महंगी हुई तो खाद की लागत और सरकारी सब्सिडी दोनों बढ़ गईं। ऐसे में प्राकृतिक खेती और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देकर आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिश की जा रही है।
PM Modi Appeal: संकट से निपटने की सामूहिक रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की ये अपीलें केवल अस्थायी कदम नहीं बल्कि “आर्थिक राष्ट्रवाद” और “आत्मनिर्भर भारत” की बड़ी रणनीति का हिस्सा हैं। सरकार चाहती है कि वैश्विक संकट के दौर में देश का विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रहे, आयात कम हो और घरेलू उत्पादन मजबूत बने। आने वाले महीनों में यदि पश्चिम एशिया संकट और गहराता है तो तेल, गैस और सोने की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में सरकार नागरिकों की भागीदारी से आर्थिक दबाव कम करने की कोशिश कर रही है।