Live-in relationship sexual assault law India : 15 साल के लिव-इन या शादीशुदा रिश्ते के बाद यौन उत्पीड़न का आरोप कितना सही है? सुप्रीम कोर्ट के ताजा रुख के आधार पर जानिए सहमति, धोखे और कानून की पूरी सच्चाई।

Live-in relationship sexual assault law India : 15 साल तक साथ रहने के बाद क्या कोई महिला अपने पार्टनर या पति पर यौन उत्पीड़न (रेप) का आरोप लगा सकती है? यह सवाल हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद चर्चा के केंद्र में है। अदालत ने एक मामले में तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि इतने लंबे समय तक आपसी सहमति से साथ रहने के बाद अचानक रेप का आरोप लगाना आसान नहीं है।
Live-in relationship sexual assault law India : अदालत का सख्त रुख
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने सुनवाई के दौरान पूछा कि जब दो लोग 15 साल तक साथ रहे, उनके बीच संबंध बने और यहां तक कि बच्चा भी हुआ, तो फिर बाद में इसे यौन उत्पीड़न कैसे कहा जा सकता है? कोर्ट ने साफ संकेत दिया कि हर ब्रेकअप को आपराधिक मामला नहीं बनाया जा सकता और कानून का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।

Live-in relationship sexual assault law India : लिव-इन रिलेशनशिप पर कानून की स्थिति
भारत में लिव-इन रिलेशनशिप को अपराध नहीं माना जाता। यह दो बालिगों के बीच आपसी सहमति का रिश्ता है। हालांकि इसके लिए कोई अलग कानून नहीं है, लेकिन अदालतें ऐसे रिश्तों को “मैरिज-लाइक रिलेशनशिप” मानती हैं, खासकर जब यह लंबे समय तक चला हो। ऐसे मामलों में अगर रिश्ता टूटता है, तो हर बार आपराधिक केस बनना जरूरी नहीं होता।
Live-in relationship sexual assault law India : सहमति (Consent) सबसे बड़ा फैक्टर
कानून में सबसे अहम भूमिका “सहमति” की होती है। अगर संबंध आपसी सहमति से बने हैं, तो बाद में उन्हें रेप नहीं कहा जा सकता। लेकिन अगर महिला यह साबित कर दे कि शुरुआत से ही उसे शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए गए, तो मामला आपराधिक बन सकता है। कोर्ट इस बात की जांच करती है कि क्या धोखा शुरू से था या रिश्ता बाद में बिगड़ा।
Live-in relationship sexual assault law India : क्या पत्नी पति पर यौन उत्पीड़न का केस कर सकती है?

पत्नी के मामले में कानून थोड़ा अलग और जटिल है। भारत में “वैवाहिक बलात्कार” (Marital Rape) अभी भी पूरी तरह से अपराध की श्रेणी में स्पष्ट रूप से शामिल नहीं है, लेकिन पत्नी घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 के तहत शिकायत कर सकती है। अगर पति जबरन संबंध बनाता है, तो इसे क्रूरता और यौन हिंसा के रूप में देखा जा सकता है। महिला अपनी इच्छा के खिलाफ संबंध से इनकार करने का अधिकार रखती है।
Live-in relationship sexual assault law India : धोखे और सहमति के बीच की पतली रेखा
लिव-इन मामलों में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि:
क्या संबंध सहमति से थे?
या शादी का झूठा वादा करके बनाए गए थे?
अगर रिश्ता लंबे समय तक चला है, तो अदालत आमतौर पर मानती है कि सहमति मौजूद थी। ऐसे में अचानक लगाए गए आरोपों को साबित करना कठिन हो जाता है।
Live-in relationship sexual assault law India : सुप्रीम कोर्ट का रुख साफ है। लंबे समय तक चले रिश्ते में सहमति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हर असफल रिश्ता अपराध नहीं होता। लेकिन अगर शुरुआत से धोखा या जबरदस्ती साबित हो जाए, तो कानून सख्ती से कार्रवाई करता है। हर मामला अपने तथ्यों और सबूतों पर निर्भर करता है, इसलिए अंतिम फैसला अदालत ही करती है।