Muslim Women Reservation Bill : लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर बहस के दौरान मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण देने की मांग पर गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता। जानिए पूरी खबर।

Muslim Women Reservation Bill : मुस्लिम महिला आरक्षण को लेकर संसद में गरमाई बहस
महिला आरक्षण विधेयक 2026 को लेकर लोकसभा में जोरदार बहस देखने को मिली। इस दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने मुस्लिम महिलाओं और ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण का मुद्दा उठाया, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
Muslim Women Reservation Bill : अमित शाह का स्पष्ट रुख
गृह मंत्री अमित शाह ने इस मांग पर सीधा जवाब देते हुए कहा कि भारतीय संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सरकार किसी भी ऐसी व्यवस्था को स्वीकार नहीं करेगी जो संविधान के खिलाफ हो।
Muslim Women Reservation Bill : अखिलेश यादव का सवाल

अखिलेश यादव ने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि मुस्लिम महिलाओं को अलग से आरक्षण क्यों नहीं दिया जा सकता? उन्होंने पूछा कि क्या मुस्लिम महिलाओं को महिला नहीं माना जाएगा? इस पर सदन में कुछ समय के लिए माहौल काफी गर्म हो गया।
Muslim Women Reservation Bill : शाह का तंज
अमित शाह ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि अगर समाजवादी पार्टी चाहती है, तो वह अपने सभी टिकट मुस्लिम महिलाओं को दे सकती है, सरकार को इससे कोई आपत्ति नहीं है।
Muslim Women Reservation Bill : 2029 से लागू हो सकता है महिला आरक्षण

सरकार द्वारा पेश महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के पास होने के बाद 2029 के लोकसभा चुनाव से महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। इससे संसद में महिलाओं की भागीदारी में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।
Muslim Women Reservation Bill : परिसीमन के बाद बढ़ेंगी सीटें
सरकार ने इस दौरान सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव भी रखा है। वर्तमान 543 सीटों को बढ़ाकर करीब 850 करने की योजना है। इसमें 815 सीटें राज्यों और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होंगी। यह प्रक्रिया 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के जरिए पूरी की जाएगी।
Muslim Women Reservation Bill : क्या मुस्लिम महिलाओं को मिलेगा आरक्षण?
फिलहाल सरकार के रुख से साफ है कि मुस्लिम महिलाओं को अलग से आरक्षण देने की संभावना नहीं है, क्योंकि यह संविधान के मौजूदा प्रावधानों के खिलाफ माना जा रहा है। हालांकि, इस मुद्दे पर सियासत अभी और तेज होने के संकेत हैं।