United Nations Army Rules: क्या संयुक्त राष्ट्र किसी देश में युद्ध रोकने के लिए अपनी सेना भेज सकता है? जानें UN चार्टर के नियम, सिक्योरिटी काउंसिल की भूमिका, वीटो पावर और पीसकीपिंग मिशन कैसे काम करते हैं।
United Nations Army Rules: मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच उठा सवाल
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा सवाल सामने आता है कि क्या संयुक्त राष्ट्र (United Nations) किसी भी देश में युद्ध रोकने के लिए अपनी सेना भेज सकता है। हाल के दिनों में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव और मिसाइल हमलों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या यूएन सीधे सैन्य हस्तक्षेप कर सकता है। असल में संयुक्त राष्ट्र के पास युद्ध रोकने के लिए सैन्य हस्तक्षेप का अधिकार तो है, लेकिन इसकी प्रक्रिया बेहद जटिल है और यह पूरी तरह UN चार्टर और सुरक्षा परिषद (Security Council) के नियमों के तहत ही संभव होता है।

United Nations Army Rules: संयुक्त राष्ट्र के पास अपनी स्थायी सेना नहीं
दुनिया की कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के विपरीत संयुक्त राष्ट्र के पास अपनी स्थायी सेना (Standing Army) नहीं होती। जब भी यूएन किसी शांति मिशन या सैन्य अभियान का फैसला करता है, तब सदस्य देश अपनी इच्छा से सैनिक, पुलिस और उपकरण उपलब्ध कराते हैं। भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल और कई यूरोपीय देश यूएन पीसकीपिंग मिशन में सैनिक भेजने वाले प्रमुख देशों में शामिल हैं। इन सैनिकों को अक्सर ब्लू हेलमेट (Blue Helmets) कहा जाता है और वे संयुक्त राष्ट्र के झंडे के तहत काम करते हैं।
United Nations Army Rules: सिक्योरिटी काउंसिल की मंजूरी जरूरी

किसी भी संघर्ष क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र की सेना भेजने के लिए यूएन सिक्योरिटी काउंसिल की मंजूरी सबसे जरूरी शर्त होती है। सिक्योरिटी काउंसिल में कुल 15 सदस्य देश होते हैं। इनमें से 5 स्थायी सदस्य (Permanent Members) हैं: अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम। किसी भी सैन्य कार्रवाई को मंजूरी देने के लिए कम से कम 9 देशों का समर्थन जरूरी होता है। इसके साथ ही पांच स्थायी सदस्यों में से किसी भी देश को वीटो का अधिकार होता है। अगर इनमें से कोई भी देश वीटो कर देता है, तो प्रस्ताव तुरंत खारिज हो जाता है और संयुक्त राष्ट्र सेना नहीं भेज सकता।
United Nations Army Rules: UN चार्टर के आर्टिकल क्या कहते हैं
संयुक्त राष्ट्र का सैन्य हस्तक्षेप UN Charter के Chapter VII के तहत तय होता है। इसमें कई महत्वपूर्ण आर्टिकल शामिल हैं।
आर्टिकल 39
यह सिक्योरिटी काउंसिल को यह तय करने का अधिकार देता है कि कोई स्थिति विश्व शांति के लिए खतरा है या नहीं।
आर्टिकल 42
अगर आर्थिक प्रतिबंध, कूटनीतिक दबाव जैसे उपाय विफल हो जाएं, तो यह आर्टिकल हवाई, समुद्री या जमीनी सैन्य कार्रवाई की अनुमति देता है।
आर्टिकल 51
यह आर्टिकल किसी भी देश को आत्मरक्षा (Self Defense) का अधिकार देता है, जब तक कि सिक्योरिटी काउंसिल स्थिति को संभालने के लिए कदम नहीं उठाती।
United Nations Army Rules: पीसकीपिंग और मिलिट्री इंटरवेंशन में अंतर
संयुक्त राष्ट्र आमतौर पर दो तरीकों से सैन्य कर्मियों को तैनात करता है।
- पीसकीपिंग मिशन
यह सबसे आम तरीका है। इसे आमतौर पर सीजफायर या शांति समझौते के बाद तैनात किया जाता है। दोनों पक्षों की सहमति जरूरी होती है। मिशन का काम होता है। युद्धविराम की निगरानी, नागरिकों की सुरक्षा, शांति समझौते को लागू कराना। - पीस एनफोर्समेंट मिशन
यह ज्यादा आक्रामक सैन्य कार्रवाई होती है। यह UN Charter Chapter VII के तहत होता है। इसमें शामिल देशों की सहमति जरूरी नहीं होती। सिक्योरिटी काउंसिल शांति बहाल करने के लिए बल प्रयोग की अनुमति दे सकती है

United Nations Army Rules: दुनिया में कई जगह चल रहे हैं यूएन मिशन
आज भी दुनिया के कई देशों में संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन चल रहे हैं। इनमें अफ्रीका और मिडिल ईस्ट के कई संघर्ष क्षेत्र शामिल हैं। भारत लंबे समय से यूएन पीसकीपिंग मिशनों में सबसे बड़ा योगदान देने वाले देशों में शामिल रहा है।
United Nations Army Rules: संयुक्त राष्ट्र के पास अपनी स्थायी सेना नहीं होती, लेकिन वह सदस्य देशों के सैनिकों की मदद से युद्धग्रस्त क्षेत्रों में शांति मिशन चला सकता है। हालांकि इसके लिए सिक्योरिटी काउंसिल की मंजूरी और जटिल अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया जरूरी होती है।