Sir Mark Tully death : बीबीसी के पूर्व पत्रकार सर मार्क टली का निधन, 90 वर्ष की उम्र में दिल्ली में ली अंतिम सांस

Sir Mark Tully death : बीबीसी के पूर्व भारत ब्यूरो चीफ और वरिष्ठ पत्रकार सर मार्क टली का 90 वर्ष की उम्र में दिल्ली में निधन हो गया। उन्होंने इंदिरा गांधी की हत्या, आपातकाल, भुट्टो की फांसी और अयोध्या जैसी ऐतिहासिक घटनाओं की रिपोर्टिंग की थी।

Sir Mark Tully death : भारत में बीबीसी के पूर्व ब्यूरो चीफ और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित वरिष्ठ पत्रकार सर मार्क टली का रविवार को 90 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने नई दिल्ली में अंतिम सांस ली। उनके निधन की पुष्टि बीबीसी के पूर्व वरिष्ठ पत्रकार सतीश जैकब ने की है। सर मार्क टली उन चुनिंदा विदेशी पत्रकारों में शामिल थे, जिन्होंने भारत को सिर्फ रिपोर्ट नहीं किया बल्कि भारत को जिया, समझा और उसकी भाषा-संस्कृति को अपनाया।

Sir Mark Tully death : ऐतिहासिक घटनाओं के चश्मदीद गवाह थे मार्क टली

मार्क टली ने अपने लंबे पत्रकारिता करियर में कई ऐतिहासिक घटनाओं की ग्राउंड रिपोर्टिंग की। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो के मुकदमे और फांसी, प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या, भारत में आपातकाल (Emergency), अयोध्या विवाद और बाबरी ढांचा विध्वंस की रिपोर्टिंग की। उनकी रिपोर्टिंग को निष्पक्षता, गहराई और साहस का प्रतीक माना जाता है।

Sir Mark Tully death : बीबीसी से जुड़ाव और चार दशकों का सफर

मार्क टली 1964 में बीबीसी से जुड़े थे। 1972 से 1994 तक बीबीसी के दिल्ली ब्यूरो चीफ रहे। लगभग चार दशकों तक बीबीसी के साथ कार्य किया। भारत और दक्षिण एशिया की राजनीति, समाज और संस्कृति पर उनकी रिपोर्टिंग विश्वसनीय मानी जाती रही। बीबीसी से अलग होने के बाद भी वे स्वतंत्र पत्रकार और लेखक के रूप में सक्रिय रहे।

Sir Mark Tully death : “घमंड पत्रकारिता का सबसे बड़ा पाप है”

2009 के एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था,“मैं यह नहीं कह सकता कि मेरा करियर सिर्फ मेरी मेहनत का नतीजा है, इसमें किस्मत और ईश्वर का भी हाथ रहा।” उन्होंने हमेशा घमंड से दूर रहने की सलाह दी और कहा कि भुट्टो की फांसी मेरी स्टोरी नहीं थी, वह भुट्टो की स्टोरी थी।

Sir Mark Tully death : कलकत्ता में जन्म, भारत से गहरा रिश्ता

जन्म: कलकत्ता (अब कोलकाता)
पढ़ाई: दार्जिलिंग स्कूल, ट्रिनिटी हॉल, कैम्ब्रिज
विषय: इतिहास और थियोलॉजी
भारत में बिताया बचपन और जीवन का बड़ा हिस्सा। उनकी मां का जन्म वर्तमान बांग्लादेश के ऑकेरा जंक्शन में हुआ था।

Sir Mark Tully death : हिंदी प्रेम और बचपन की टीस

मार्क टली को बचपन में हिंदी और बंगाली सीखने से रोका गया था। उन्होंने बताया था कि एक बार हिंदी बोलने पर आया ने उन्हें थप्पड़ मार दिया था। बाद में उन्होंने हिंदी अखबार पढ़कर और लिखकर भाषा सीखी। उन्हें इस बात का दुख रहता था कि जब मैं हिंदी में बात करता हूं, लोग अंग्रेजी में जवाब देते हैं, यह भारत के लिए शर्म की बात है।

Sir Mark Tully death : आपातकाल और ‘जासूस’ कहे जाने का किस्सा

आपातकाल के दौरान तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री विद्याचरण शुक्ला ने उनसे पूछा था कि “आपको खबरें कौन देता है?” जब मार्क टली ने कहा कि पत्रकार और आकाशवाणी, तो मंत्री ने उन्हें जासूस तक कह दिया और सवाल किया, “अगर आप जासूस नहीं हैं तो हिंदी क्यों सीखी?”

Sir Mark Tully death : संजय गांधी और इंदिरा गांधी पर बेबाक राय

संजय गांधी को उन्होंने सख्त मिजाज और “डंडे के जोर पर सुधार” में विश्वास रखने वाला बताया। इंदिरा गांधी के बारे में कहा कि कभी वे दोस्ताना होती थीं, तो कभी बेहद रूखी। उन्होंने आपातकाल के दौरान बीबीसी की कुछ रिपोर्ट्स को बाद में भ्रम और अफवाह भी स्वीकार किया था।

Sir Mark Tully death : अयोध्या रिपोर्टिंग: ग्राउंड से भेजी थी खबर

अयोध्या में ढांचा गिराए जाने के समय मार्क टली मौके पर मौजूद थे। अयोध्या से खबर भेजना संभव नहीं हुआ। फैजाबाद जाकर स्टोरी ट्रांसमिट की। बीबीसी ने सबसे पहले तोड़फोड़ की खबर दी। बाद में उन्हें अयोध्या और फैजाबाद में घेर भी लिया गया था।

Sir Mark Tully death : लेखन और सम्मान

मार्क टली की प्रमुख किताबें:

No Full Stops in India
India’s Unending Journey
Non-Stop India
The Lives of Jesus

सम्मान:

2002 में नाइटहुड
2005 में पद्म भूषण

Sir Mark Tully death : पत्रकारिता का एक युग समाप्त

सर मार्क टली का निधन न सिर्फ पत्रकारिता जगत बल्कि भारत-विदेश संबंधों के एक संवेदनशील, ईमानदार और साहसी अध्याय का अंत है। वे हमेशा एक ऐसे विदेशी पत्रकार के रूप में याद किए जाएंगे, जिसने भारत को बाहर से नहीं, अंदर से देखा।

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