Russia Iran Cheap Oil China : वैश्विक तेल बाजार में बदलाव- ट्रंप की धमकियों के बीच रूस-ईरान का सस्ता तेल खरीदकर चीन हो रहा मालामाल

Russia Iran Cheap Oil China : यूक्रेन युद्ध और ट्रंप की चेतावनियों के बीच भारत ने रूसी तेल आयात घटाया, जबकि चीन रूस और ईरान से सस्ता तेल खरीदकर अपने भंडार बढ़ा रहा है। जानें कैसे बदल रहा है वैश्विक ऊर्जा बाजार का संतुलन।

Russia Iran Cheap Oil China : यूक्रेन युद्ध के बीच बदला वैश्विक तेल समीकरण

यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर भारत ने अमेरिकी दबाव और संभावित प्रतिबंधों के जोखिम को देखते हुए रूस से कच्चे तेल की खरीद में कमी की है, वहीं चीन इस मौके को रणनीतिक अवसर में बदल रहा है। ऊर्जा रिसर्च फर्म Rystad Energy के अनुसार, जनवरी की तुलना में भारत का रूसी तेल आयात लगभग 40% घटकर करीब 6 लाख बैरल प्रतिदिन तक आ सकता है। यह गिरावट एशियाई बाजार में रूसी तेल की मांग को प्रभावित कर रही है।

Russia Iran Cheap Oil China : चीन ने उठाया सस्ते तेल का फायदा

भारत की दूरी से बने खाली स्थान का फायदा चीन उठा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस का Urals ग्रेड तेल आईसीई ब्रेंट से लगभग 12 डॉलर प्रति बैरल कम कीमत पर बिक रहा है। वहीं ईरान का Iranian Light भी वैश्विक बेंचमार्क से करीब 11 डॉलर प्रति बैरल नीचे उपलब्ध है। इससे चीनी रिफाइनरियों को भारी लाभ मिल रहा है। हालांकि चीन की निजी रिफाइनरियां (टीपॉट रिफाइनर्स) सीमित क्षमता और सरकारी आयात कोटा से बंधी हैं, फिर भी वे अधिकतम खरीद करने की कोशिश कर रही हैं।

Russia Iran Cheap Oil China : रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा आयात

वेसल ट्रैकिंग डेटा के अनुसार फरवरी के पहले 18 दिनों में चीन के बंदरगाहों पर रूसी तेल की आवक बढ़कर 2.09 मिलियन बैरल प्रतिदिन पहुंच गई, जो जनवरी की तुलना में 20% अधिक और दिसंबर से लगभग दोगुनी है। डेटा एनालिटिक्स फर्म Kpler के मुताबिक, इस वर्ष अब तक ईरान से चीन को लगभग 1.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल निर्यात हुआ है। हालांकि यह पिछले वर्ष की समान अवधि से करीब 12% कम है, फिर भी मात्रा काफी बड़ी है। समुद्र में तैरते टैंकरों में ईरानी तेल का भंडार भी बढ़कर लगभग 48 मिलियन बैरल तक पहुंच गया है, जो फरवरी की शुरुआत में 33 मिलियन बैरल था।

Russia Iran Cheap Oil China : भारत पर अमेरिकी दबाव और रणनीतिक संतुलन

विश्लेषकों का मानना है कि यदि भारत लंबे समय तक रूसी तेल से दूरी बनाए रखता है, तो उसे मध्य-पूर्वी देशों पर अधिक निर्भर होना पड़ेगा। इससे आयात लागत और चालू खाते के संतुलन पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, चीन कम कीमत पर तेल खरीदकर अपने रणनीतिक भंडार मजबूत कर रहा है, जिससे भविष्य में उसे ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बढ़त मिल सकती है।

Russia Iran Cheap Oil China : वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दीर्घकालिक असर

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव सिर्फ अस्थायी नहीं हो सकता। इसके संभावित प्रभाव: एशियाई ऊर्जा बाजार का नया संतुलन, वैश्विक तेल कीमतों में अस्थिरता, शिपिंग रूट्स में बदलाव, रूस-चीन ऊर्जा साझेदारी मजबूत,ईरान की आर्थिक स्थिति में सुधार। यदि यह ट्रेंड जारी रहता है, तो वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरणों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

Russia Iran Cheap Oil China : ट्रंप की चेतावनियों और पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच जहां भारत सावधानी की नीति अपना रहा है, वहीं चीन रणनीतिक लाभ उठाते हुए रूस और ईरान से सस्ता तेल खरीदकर अपने ऊर्जा भंडार मजबूत कर रहा है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत फिर से रूसी तेल आयात बढ़ाता है या एशियाई ऊर्जा बाजार में चीन की पकड़ और मजबूत होती है।

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