Research Methodology Workshop : शोधार्थियों को शोध विषय की प्रासंगिकता समझना अत्यंत आवश्यक : प्रो. गोविन्द जी पाण्डेय

Research Methodology Workshop : वाराणसी में आईसीएसएसआर प्रायोजित शोध पद्धति पाठ्यक्रम के आठवें दिन प्रो. गोविन्द जी पाण्डेय ने शोध विषय की प्रासंगिकता, डिजिटल डेटा प्रबंधन और शोध नैतिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।

Research Methodology Workshop : महामना मदनमोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ द्वारा आयोजित एवं भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर), शिक्षा मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित ‘सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी शोधार्थियों के लिए शोध पद्धति और अकादमिक लेखन’ विषयक दस दिवसीय शोध पद्धति पाठ्यक्रम के आठवें दिन शोध डेटा प्रबंधन, डिजिटल उपकरण, आईसीटी एवं शोध तथा सॉफ्टवेयर के उपयोग और अभ्यास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन व्याख्यान आयोजित किया गया।

Research Methodology Workshop : डॉ. भगवान दास केन्द्रीय पुस्तकालय के समिति कक्ष में आयोजित कार्यशाला के प्रथम सत्र में बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. गोविन्द जी पाण्डेय ने कहा कि शोधार्थियों के लिए सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम अपने शोध विषय के अर्थ, उद्देश्य और उसकी सामाजिक व अकादमिक प्रासंगिकता को समझना है। उन्होंने कहा कि विषय की स्पष्ट समझ के बिना शोध न तो गुणवत्तापूर्ण हो सकता है और न ही समाज के लिए उपयोगी सिद्ध होता है।
प्रो. पाण्डेय ने बताया कि पहले शोध के लिए डेटा पारंपरिक तरीकों से एकत्र किया जाता था, जिसमें अत्यधिक समय और श्रम लगता था, जबकि वर्तमान डिजिटल युग में अनेक आधुनिक सॉफ्टवेयर और डिजिटल टूल्स उपलब्ध हैं, जो शोधार्थियों को त्वरित और सटीक डेटा उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने इंडक्टिव डेटा की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह अवलोकन आधारित डेटा सिद्धांत निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

Research Methodology Workshop : डिजिटल डेटा प्रबंधन पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज डेटा के संग्रहण, निर्माण और साझा करने की प्रक्रिया में बदलाव आवश्यक हो गया है। शोधार्थियों को एनालॉग और डिजिटल डेटा के बीच अंतर समझना चाहिए। हालांकि दोनों का शोध में अपना महत्व है, लेकिन डिजिटल डेटा विश्लेषण, संग्रहण और साझा करने की दृष्टि से अधिक प्रभावी और सरल है।

उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शोधार्थियों में अध्ययन के प्रति ललक में कमी आई है, जिससे शोध की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। ऐसे में शोध में नैतिक मूल्यों का पालन करना पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है। प्रो. पाण्डेय ने यह भी बताया कि वर्तमान समय में ऐसे सॉफ्टवेयर उपलब्ध हैं, जो लेखन की भाषा और शैली का विश्लेषण कर यह पहचान कर सकते हैं कि सामग्री एआई की सहायता से लिखी गई है।

Research Methodology Workshop : द्वितीय सत्र में प्रबंधन अध्ययन संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रो. अनुराग सिंह ने डेटा विश्लेषण पर व्याख्यान देते हुए बताया कि डेटा एनालिसिस मुख्यतः दो प्रकार का होता है— क्वालिटेटिव एनालिसिस और क्वांटिटेटिव एनालिसिस। उन्होंने कहा कि सटीक विश्लेषण के लिए सुव्यवस्थित और संगठित डेटा, सही प्रक्रिया और उच्च स्तर की सटीकता अत्यंत आवश्यक है।

प्रो. सिंह ने कहा कि आधुनिक समय में शोध और निर्णय-निर्माण के लिए डेटा को विभिन्न सॉफ्टवेयर और विश्लेषणात्मक उपकरणों से जोड़ना अनिवार्य हो गया है। उन्होंने एसपीएसएस, एसईएम जैसे सॉफ्टवेयर के उपयोग और उनके व्यावहारिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। साथ ही यह भी कहा कि तकनीक के बढ़ते उपयोग के बीच मानवीय दृष्टिकोण, डेटा और सॉफ्टवेयर के बीच संतुलन बनाना आज की सबसे बड़ी चुनौती और आवश्यकता है।

कार्यक्रम की विषय प्रस्तावना एवं स्वागत पाठ्यक्रम निदेशक एवं संस्थान के निदेशक डॉ. नागेन्द्र कुमार सिंह ने किया, जबकि संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अमित कुमार सिंह द्वारा किया गया।

Research Methodology Workshop : इस अवसर पर डॉ. श्रीराम त्रिपाठी, डॉ. प्रभा शंकर मिश्र, डॉ. मनोहर लाल, डॉ. चन्द्रशील पाण्डेय, अरविंद मिश्र, गुरु प्रकाश सिंह, देवेन्द्र गिरि, गणेश राय, आकाश सिंह, सपना तिवारी, डाली विश्वकर्मा, अतुल उपाध्याय, पुलकित, स्तुति, समर, मनीष, हर्ष सहित अनेक शोधार्थी उपस्थित रहे।

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