Rangbhari Ekadashi Kashi : रंगभरी एकादशी पर काशी में बाबा विश्वनाथ माता गौरा का गौना कराकर विश्वनाथ धाम लौटे। डमरू-शंखनाद और हर-हर महादेव के जयघोष के बीच काशी में चार दिवसीय होली उत्सव की शुरुआत हुई।
Rangbhari Ekadashi : माता गौरा को विदा कर काशीपुराधिपति लौटे विश्वनाथ धाम, अनूठे रंगोत्सव की साक्षी बनी काशी

Rangbhari Ekadashi Kashi : वाराणसी। धर्मनगरी काशी में शुक्रवार की शाम रंगभरी एकादशी का पावन पर्व उल्लास, आस्था और परंपरा के अद्भुत संगम के रूप में मनाया गया। डमरू की गूंज, शंखनाद और हर-हर महादेव के जयघोष के बीच काशीपुराधिपति भगवान Kashi Vishwanath माता गौरा का गौना कराकर भव्य शोभायात्रा के साथ विश्वनाथ धाम लौटे। पूरा शहर अबीर-गुलाल के रंगों में सराबोर नजर आया। काशी की गलियां शिवमय हो उठीं और भक्तों ने अपने आराध्य के साथ होली खेलकर चार दिवसीय रंगोत्सव का आगाज़ किया।

Rangbhari Ekadashi Kashi : टेढ़ीनीम से उठी बाबा की पालकी
रंगभरी एकादशी के अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत स्वर्गीय डॉ. कुलपति तिवारी के टेढ़ीनीम स्थित आवास से तय समय पर बाबा की भव्य पालकी उठी। पालकी के दर्शन मात्र को श्रद्धालु लालायित दिखे। पालकी यात्रा के दौरान जगह-जगह पुष्पवर्षा की गई। भक्तों ने गुलाल उड़ाकर और ढोल-नगाड़ों की थाप पर नृत्य कर बाबा की अगवानी की। वातावरण ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गुंजायमान रहा।

Rangbhari Ekadashi Kashi : ब्रह्म मुहूर्त में पंचामृत स्नान और षोडशोपचार पूजन
प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में माता गौरा की चल पंचबदन रजत प्रतिमा का पंचगव्य और पंचामृत स्नान कराया गया। इसके पश्चात दुग्धाभिषेक की दिव्य परंपरा संपन्न हुई।सुबह 5 बजे से साढ़े 8 बजे तक 11 वैदिक ब्राह्मणों ने विधिवत षोडशोपचार पूजन किया। फलाहार का भोग लगाकर महाआरती संपन्न हुई। इसके बाद पूर्वाह्न साढ़े ग्यारह बजे भोग आरती के उपरांत श्रद्धालुओं के लिए दर्शन प्रारंभ हुए। चल प्रतिमाओं का राजसी श्रृंगार विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

Rangbhari Ekadashi Kashi : गौना की परंपरा और होली का शुभारंभ
काशी की मान्यता के अनुसार, रंगभरी एकादशी के दिन बाबा विश्वनाथ गौना के नेग में काशीवासियों को होली खेलने की अनुमति देते हैं। यही कारण है कि इस दिन से काशी में होली का उत्सव अपने चरम की ओर बढ़ने लगता है। बाबा के गौना उत्सव में काशीवासी सबसे पहले अपने आराध्य भगवान शिव और माता पार्वती के साथ अबीर-गुलाल की होली खेलते हैं। इसके बाद ही आम जनमानस होली की मस्ती में डूबता है।
Rangbhari Ekadashi Kashi : चार दिवसीय होली उत्सव की शुरुआत

रंगभरी एकादशी के साथ ही काशी में चार दिवसीय विशेष होली महोत्सव का शुभारंभ हो गया है। मठों, मंदिरों और घाटों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन-कीर्तन और फाग गीतों की धूम रहेगी। गुलाल की उड़ती रंगत, ढोल की थाप और भक्तों का उत्साह काशी को एक आध्यात्मिक रंगोत्सव में परिवर्तित कर देता है।
Rangbhari Ekadashi Kashi : आध्यात्म और उत्सव का अद्भुत संगम
रंगभरी एकादशी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि काशी की जीवंत परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। यह वह क्षण होता है जब भक्ति और उत्सव एक साथ दिखाई देते हैं—जहां भगवान स्वयं अपने भक्तों के साथ रंगों में सराबोर होते हैं। धर्मनगरी काशी एक बार फिर इस अद्भुत परंपरा की साक्षी बनी और विश्वनाथ धाम लौटते बाबा के दर्शन से श्रद्धालुओं का हृदय भावविभोर हो उठा।