Rangbhari Ekadashi 2026 : रंगभरी एकादशी 2026- 27 फरवरी को निकलेगी बाबा विश्वनाथ की भव्य पालकी, 24 से शुरू होंगी गौरा के गौने की मंगल रस्में

Rangbhari Ekadashi 2026 : रंगभरी एकादशी 2026 पर 27 फरवरी को बाबा विश्वनाथ की भव्य पालकी यात्रा निकलेगी। 24 फरवरी से माता गौरा के गौने की पारंपरिक रस्में शुरू होंगी। जानें काशी की इस अनूठी परंपरा का पूरा कार्यक्रम और पालकी मार्ग।

Rangbhari Ekadashi 2026 : रंगभरी एकादशी 2026: 27 फरवरी को निकलेगी बाबा विश्वनाथ की भव्य पालकी, 24 से शुरू होंगी गौरा के गौने की मंगल रस्में

Rangbhari Ekadashi 2026 : वाराणसी। महाशिवरात्रि के पावन पर्व के उपरांत काशी में अब शिव-विवाह परंपरा का सबसे भावनात्मक और सांस्कृतिक अध्याय शुरू होने जा रहा है। 27 फरवरी को रंगभरी (अमला) एकादशी पर बाबा विश्वनाथ की भव्य पालकी यात्रा निकलेगी। इससे पहले 24 फरवरी से माता गौरा के गौने की पारंपरिक रस्मों का शुभारंभ होगा। टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास गौरा-सदनिका में आयोजित पत्रकार वार्ता में महंत पं. वाचस्पति तिवारी ने बताया कि काशी की प्राचीन परंपरा के अनुसार नौ गौरी और नौ दुर्गा के आव्हान मंत्रों से अभिमंत्रित हल्दी माता गौरा को अर्पित की जाएगी। लोकमान्यता के अनुसार माता गौरा को काशी की बेटी माना जाता है और उसी भाव से विवाहोपरांत गौने की रस्में निभाई जाती हैं।

Rangbhari Ekadashi 2026 : 24 फरवरी: तेल-हल्दी की रस्म से होगा शुभारंभ

24 फरवरी को शाम 6:45 बजे महंत आवास में माता गौरा की तेल-हल्दी की रस्म संपन्न होगी। इससे पूर्व काशी के प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर में विशेष वैदिक अनुष्ठान कर हल्दी को अभिमंत्रित किया जाएगा। 11 वैदिक ब्राह्मणों के मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और घंटानाद के बीच गौरा की प्रतिमा को हल्दी अर्पित की जाएगी। गौनहारिनों की टोली मंगलगीत और सोहर गाकर पूरे वातावरण को भक्तिमय बनाएगी।

Rangbhari Ekadashi 2026 : 25 फरवरी- पालकी पूजन और षोडशी श्रृंगार

25 फरवरी को दोपहर 3 बजे बाबा की पारंपरिक पालकी का विधिवत पूजन होगा। पालकी की सजावट और रंग-रोगन का कार्य पहले ही पूर्ण किया जा चुका है। शाम 6:30 बजे माता गौरा का दिव्य षोडशी श्रृंगार किया जाएगा। उन्हें काशी शैली के रेशमी वस्त्र, स्वर्णाभूषण, पुष्पमालाएं और चंदन-रोली से अलंकृत किया जाएगा। महंत आवास इस दिन गौरा के मायके का रूप ले लेता है, जहां पारंपरिक सजावट और पारिवारिक माहौल का सृजन होता है।

Rangbhari Ekadashi 2026 : 26 फरवरी- गौरा-सदनिका पहुंचेंगे बाबा विश्वनाथ

26 फरवरी को शाम 6:30 बजे बाबा विश्वनाथ का प्रतीकात्मक आगमन गौरा-सदनिका में होगा। यह आयोजन उस लोक परंपरा का प्रतीक है, जब वर पक्ष दुल्हन को विदा कराने मायके पहुंचता है। इस अवसर पर बाबा विशेष राजसी परिधान और ‘देव किरीट’ धारण करेंगे। यह किरीट काशी के विख्यात शिल्पी नंदलाल अरोड़ा द्वारा तैयार किया जा रहा है, जबकि राजसी वस्त्र दशाश्वमेध क्षेत्र के पारंपरिक कारीगर विनोद मास्टर द्वारा बनाए गए हैं, जो इस परंपरा की चौथी पीढ़ी से जुड़े हैं।

Rangbhari Ekadashi 2026 : 27 फरवरी- रंगभरी एकादशी पर निकलेगी भव्य पालकी यात्रा

27 फरवरी को रंगभरी एकादशी का मुख्य आयोजन होगा।

ब्रह्ममुहूर्त में बाबा, माता गौरा और प्रथमेश का विशेष पूजन

सुबह 7 बजे भोग-श्रृंगार

सुबह 9 बजे से श्रद्धालुओं के लिए दर्शन

दोपहर 12:30 बजे भोग आरती

शाम 5 बजे बाबा विश्वनाथ की भव्य पालकी यात्रा मंदिर से प्रस्थान करेगी। नगर अबीर-गुलाल और पुष्पवर्षा से बाबा और गौरा का स्वागत करेगा।

Rangbhari Ekadashi 2026 : पालकी यात्रा का पारंपरिक मार्ग

पालकी यात्रा टेढ़ीनीम महंत आवास से प्रारंभ होकर नवग्रह मंदिर, विश्वनाथ गली, साक्षी विनायक, ढुंढिराज गणेश और अन्नपूर्णा मंदिर होते हुए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचेगी। मंदिर में गर्भगृह के दक्षिण द्वार से प्रवेश कर बाबा की चल प्रतिमा को विराजमान कराया जाएगा। शयन आरती के बाद पालकी पुनः महंत आवास लौटेगी।

Rangbhari Ekadashi 2026 : ‘शिवांजलि’ से गूंजेगा काशी का लोक-संगीत

गौना महोत्सव के दौरान महंत आवास में ‘शिवांजलि’ कार्यक्रम आयोजित होगा। पुनित पागल के संयोजन में लोक एवं सुगम संगीत की प्रस्तुतियां होंगी। काशी की पारंपरिक भक्ति धुनें आयोजन को सांस्कृतिक ऊंचाई प्रदान करेंगी।

Rangbhari Ekadashi 2026 : काशी की जीवंत सांस्कृतिक विरासत का उत्सव

रंगभरी एकादशी और गौरा का गौना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, लोकजीवन और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उत्सव है। गौनहारिनों के मंगलगीत, ब्राह्मणों के वैदिक मंत्र और श्रद्धालुओं की सहभागिता काशी की सदियों पुरानी परंपरा को जीवित रखती है। रंगभरी एकादशी 2026 पर काशी एक बार फिर शिव-भक्ति, रंग और उल्लास में सराबोर नजर आएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *