Kashi Vishwanath Mahashivratri Initiative : महाशिवरात्रि 2026 पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा 63 देश-विदेश के मंदिरों से पावन प्रसाद मंगवाकर भगवान विश्वेश्वर को अर्पित किया गया। यह पहल ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और वैश्विक आध्यात्मिक एकता का सशक्त संदेश देती है।
Kashi Vishwanath Mahashivratri Initiative : काशी से उठा वैश्विक आध्यात्मिक एकता का स्वर

महाशिवरात्रि के परम पावन अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा एक अद्वितीय एवं अभिनव आध्यात्मिक पहल का शुभारंभ किया गया। इस पहल के अंतर्गत भगवान श्री विश्वेश्वर महादेव के श्रीचरणों में देश-विदेश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों, सिद्धपीठों, शक्तिपीठों तथा प्राचीन तीर्थस्थलों से पावन प्रसाद, पूजित वस्त्र, रज, पवित्र जल एवं श्रद्धा-उपहार अर्पित किए गए। यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि समस्त सनातन समाज को एक सूत्र में पिरोने की दिशा में ऐतिहासिक कदम भी मानी जा रही है।
Kashi Vishwanath Mahashivratri Initiative : 63 मंदिरों से पहुँची पावन भेंट
काशी विश्वनाथ धाम में अब तक देश-विदेश के कुल 63 प्रमुख मंदिरों से पावन प्रसाद एवं भेंट प्राप्त हो चुकी हैं। इन प्रसादों में शामिल रहे, पवित्र तीर्थों का जल, पूजित वस्त्र एवं चंदन, विभिन्न धामों की रज, विशेष नैवेद्य एवं प्रसाद। मंदिर प्रशासन द्वारा इन सभी पावन अर्पणों में से विधि-विधानपूर्वक अंश ग्रहण कर भगवान श्री विश्वेश्वर की मध्याह्न भोग आरती में समर्पित किया गया। इसके पश्चात यह प्रसाद धाम में उपस्थित श्रद्धालुओं के मध्य वितरित किया गया, जिससे विभिन्न तीर्थों की पावन भावना काशी में साकार रूप से अनुभव की गई।

Kashi Vishwanath Mahashivratri Initiative : “वसुधैव कुटुम्बकम्” का जीवंत उदाहरण
इस पहल का मूल उद्देश्य “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को मूर्त रूप देना है। जब देश-विदेश के तीर्थस्थलों से प्राप्त पावन अर्पण बाबा विश्वनाथ के श्रीचरणों में समर्पित हुए, तब यह दृश्य वैश्विक आध्यात्मिक एकात्मता का प्रतीक बन गया। धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह परंपरा सनातन संस्कृति की एकजुटता को सुदृढ़ करेगी। विभिन्न धामों के बीच आध्यात्मिक संवाद को बढ़ाएगी।तीर्थों के सांस्कृतिक समन्वय का नया अध्याय खोलेगी।
Kashi Vishwanath Mahashivratri Initiative : महाशिवरात्रि पर आध्यात्मिक संगम

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर प्रारंभ हुई यह परंपरा राष्ट्र एवं विश्व के विविध तीर्थस्थलों को एक आध्यात्मिक सूत्र में संगठित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी। काशी, जो स्वयं मोक्षदायिनी नगरी मानी जाती है, अब वैश्विक स्तर पर सनातन एकात्मता का केंद्र बनती दिख रही है। वाराणसी से उठी यह पहल भविष्य में और भी अधिक मंदिरों एवं तीर्थस्थलों को इस आध्यात्मिक अभियान से जोड़ने की दिशा में प्रेरित करेगी।
Kashi Vishwanath Mahashivratri Initiative : महाशिवरात्रि 2026 पर आरंभ की गई यह अभिनव पहल केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि सनातन परंपरा की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं भावनात्मक एकता का सशक्त प्रतीक बनकर उभर रही है। 63 मंदिरों से प्राप्त पावन प्रसाद के माध्यम से काशी ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि जब आस्था जुड़ती है, तो सीमाएं स्वतः मिट जाती हैं।