Indian Stock Market Crash : रिलायंस से लेकर HDFC बैंक तक दबाव… बाजार में अचानक क्यों आई बड़ी गिरावट?

Indian Stock Market Crash : भारतीय शेयर बाजार में अचानक बड़ी गिरावट, रिलायंस और HDFC बैंक समेत हैवीवेट शेयरों में बिकवाली से सेंसेक्स 1236 अंक टूटा। जानें गिरावट की पूरी वजह, वैश्विक संकेत और निवेशकों के लिए क्या है सलाह।

Indian Stock Market Crash : Mumbai- भारतीय शेयर बाजार में तीन दिनों की लगातार तेजी के बाद गुरुवार को अचानक तेज गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में मजबूती दिखाने के बावजूद दोपहर बाद बैंकिंग, ऑटो, मेटल और एफएमसीजी सेक्टरों में तेज बिकवाली ने बाजार की दिशा बदल दी। बीएसई सेंसेक्स 1400 अंकों तक फिसल गया और अंत में 1236 अंक (1.48%) की गिरावट के साथ 82,498 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 करीब 400 अंक (1.55%) टूटकर 25,454 के स्तर पर बंद हुआ। इस गिरावट से निवेशकों को लगभग 7.55 लाख करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ और बीएसई का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन घटकर करीब 464 लाख करोड़ रुपये रह गया।

Indian Stock Market Crash : हैवीवेट शेयरों में बिकवाली से बढ़ा दबाव

Reliance Industries, HDFC Bank, ICICI Bank, Kotak Mahindra Bank, Larsen & Toubro, Hindustan Unilever और ITC Limited जैसे दिग्गज शेयरों में जोरदार बिकवाली देखी गई। ये सभी कंपनियां सूचकांकों में भारी वेटेज रखती हैं, इसलिए इनमें आई गिरावट का सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी पर पड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे बाजार में दबाव और बढ़ गया।

Indian Stock Market Crash : आईटी सेक्टर ने दिया सीमित सहारा

Infosys और Tata Consultancy Services (TCS) के शेयरों में हल्की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि आईटी सेक्टर की यह मजबूती बाजार को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं रही। बैंकिंग और एफएमसीजी शेयरों की कमजोरी ने आईटी की बढ़त को दबा दिया।

Indian Stock Market Crash : वैश्विक संकेतों का मिला-जुला असर

एशियाई बाजारों में सकारात्मक संकेत मिले। दक्षिण कोरिया का KOSPI करीब 3% चढ़ा, जबकि जापान का Nikkei 225 1% बढ़ा। अमेरिकी बाजार भी पिछले सत्र में मजबूती के साथ बंद हुए थे, लेकिन घरेलू बाजार पर इसका सीमित प्रभाव पड़ा। निवेशकों की नजर फिलहाल वैश्विक ब्याज दरों, महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव पर टिकी हुई है।

Indian Stock Market Crash : कच्चे तेल की कीमतों में तेजी

ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.37% बढ़कर 70.61 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से भारत जैसे आयात-निर्भर देश में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। इससे कंपनियों की लागत बढ़ती है और मुनाफे पर असर पड़ता है, जिसका नकारात्मक प्रभाव शेयर बाजार पर दिखता है।

Indian Stock Market Crash : एफआईआई और डीआईआई का रुख

विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) ने 1,154.34 करोड़ रुपये की खरीदारी की। घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) ने 440.34 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। हालांकि खरीदारी के बावजूद बाजार में गिरावट यह दर्शाती है कि व्यापक स्तर पर बिकवाली और जोखिम से दूरी का माहौल बना हुआ है।

Indian Stock Market Crash : निवेशकों के लिए क्या संकेत?

बाजार में वोलैटिलिटी बनी रह सकती है। कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक संकेतों और संस्थागत निवेशकों के फ्लो पर नजर रखना जरूरी है। शॉर्ट टर्म निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है। लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में चरणबद्ध निवेश का अवसर बन सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा गिरावट घबराने की नहीं बल्कि रणनीतिक निवेश की मांग करती है।

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