India China Trade Deficit : भारत–चीन व्यापार घाटा क्यों बढ़ रहा है? क्या यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है?

India China Trade Deficit : भारत और चीन के बीच व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। जानिए इसके पीछे की वजहें, आंकड़े और यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कितना खतरनाक साबित हो सकता है।

India China Trade Deficit : भारत–चीन व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर पर

भारत और चीन के बीच व्यापार एक बार फिर सुर्खियों में है। ताजा चीनी कस्टम्स डेटा के मुताबिक, साल 2025 में दोनों देशों के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 155.62 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। हालांकि व्यापार बढ़ना सामान्य तौर पर सकारात्मक संकेत माना जाता है, लेकिन इस बार तस्वीर का दूसरा पहलू ज्यादा चिंताजनक है। भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा बढ़कर 116.12 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया है, जो 2023 के बाद दूसरी बार 100 बिलियन डॉलर के पार गया है।

India China Trade Deficit : आंकड़ों में समझें पूरा खेल

2025 में भारत का चीन को निर्यात: 19.75 बिलियन डॉलर

सालाना बढ़ोतरी: 9.7% (करीब 5.5 बिलियन डॉलर)
2025 में चीन का भारत को निर्यात: 135.87 बिलियन डॉलर
सालाना बढ़ोतरी: 12.8%
कुल व्यापार: 155.62 बिलियन डॉलर
व्यापार घाटा: 116.12 बिलियन डॉलर
इससे पहले 2024 में व्यापार घाटा 99.21 बिलियन डॉलर था, जब भारत ने चीन से 113.45 बिलियन डॉलर का आयात किया था, जबकि निर्यात सिर्फ 14.25 बिलियन डॉलर रहा।

India China Trade Deficit : क्यों बढ़ रहा है भारत का चीन के साथ व्यापार?

  1. अमेरिका द्वारा टैरिफ दबाव
    अमेरिका ने जब भारत पर कुछ टैरिफ लगाए, तो भारत ने वैकल्पिक बाजारों और सप्लाई चेन की तलाश शुरू की। इस प्रक्रिया में चीन के साथ व्यापार फिर से तेज हुआ।
  2. चीन के सस्ते उत्पाद
    इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा कच्चा माल, मशीनरी, सोलर इक्विपमेंट जैसे सेक्टर्स में भारत चीन पर काफी निर्भर है। सस्ते दामों के कारण भारतीय बाजार में चीनी उत्पादों की मांग बनी रहती है।
  3. चीन की एक्सपोर्ट रणनीति
    अमेरिका ने चीन पर भारी टैरिफ लगाए, जिससे उसका अमेरिकी बाजार में निर्यात घटा। इसकी भरपाई के लिए चीन ने भारत समेत अन्य देशों में अपना निर्यात बढ़ा दिया।

India China Trade Deficit : व्यापार घाटा क्या होता है?

जब कोई देश निर्यात (Exports) से ज्यादा आयात (Imports) करता है, तो उसे व्यापार घाटा (Trade Deficit) कहते हैं। CRISIL जैसी रेटिंग एजेंसियों के मुताबिक, अगर यह घाटा लगातार बढ़े तो घरेलू उद्योग कमजोर होते हैं। नई नौकरियों के अवसर घटते हैं। विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है। रुपये की कीमत पर नकारात्मक असर पड़ता है।

India China Trade Deficit : क्या भारत की इकोनॉमी को खोखला कर देगा यह घाटा?

विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक बढ़ता व्यापार घाटा खतरनाक साबित हो सकता है, खासकर तब जब देश ज्यादा उपभोग (Consumption) करे लेकिन उत्पादन (Production) उतना न बढ़े। चीन के सस्ते उत्पाद भारतीय बाजार में घरेलू निर्माताओं के लिए चुनौती बन रहे हैं। इससे Make in India जैसी पहलों पर भी दबाव पड़ सकता है।

India China Trade Deficit : आगे की राह क्या?

भारत के लिए जरूरी है कि चीन पर आयात निर्भरता घटाई जाए। घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिले। हाई-वैल्यू एक्सपोर्ट (टेक्नोलॉजी, फार्मा, इंजीनियरिंग गुड्स) को मजबूत किया जाए। भारत–चीन व्यापार का बढ़ना अपने आप में बुरा नहीं है, लेकिन एकतरफा आयात और रिकॉर्ड व्यापार घाटा भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चेतावनी है। अगर समय रहते संतुलन नहीं बनाया गया, तो यह घाटा भविष्य में आर्थिक दबाव का बड़ा कारण बन सकता है।

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