ICSSR Research Methodology Course : काशी विद्यापीठ के आईसीएसएसआर प्रायोजित शोध पद्धति पाठ्यक्रम के प्रतिभागियों ने किया काशी भ्रमण

ICSSR Research Methodology Course : काशी विद्यापीठ में आईसीएसएसआर द्वारा प्रायोजित शोध पद्धति पाठ्यक्रम के सातवें दिन प्रतिभागियों ने फील्ड विजिट के तहत काशी के प्रमुख सांस्कृतिक व धार्मिक स्थलों का भ्रमण किया।

ICSSR Research Methodology Course : महामना मदनमोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ द्वारा आयोजित एवं भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), शिक्षा मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित “सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी शोधार्थियों के लिए शोध पद्धति और अकादमिक लेखन” विषयक दस दिवसीय शोध पद्धति पाठ्यक्रम के सातवें दिन रविवार को प्रतिभागियों ने फील्ड विजिट के तहत काशी भ्रमण किया।

ICSSR Research Methodology Course : पाठ्यक्रम निदेशक एवं महामना मदनमोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक डॉ. नागेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि इस फील्ड विजिट का उद्देश्य शोधार्थियों को मैदानी अध्ययन (Field Study) के व्यावहारिक अनुभव से जोड़ना था, जिससे वे कक्षा में अर्जित सैद्धांतिक ज्ञान को वास्तविक सामाजिक-सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में समझ सकें। फील्ड विजिट के दौरान प्रतिभागियों ने काशी की प्राचीन सांस्कृतिक, धार्मिक एवं बौद्धिक विरासत को नजदीक से जाना। भ्रमण के क्रम में शोधार्थियों ने सारनाथ में बौद्ध दर्शन एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझा, वहीं गंगा घाटों पर काशी की सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक निरंतरता का अवलोकन किया।

ICSSR Research Methodology Course : इसके साथ ही प्रतिभागियों ने काशी विश्वनाथ मंदिर में भारतीय धार्मिक परंपराओं, बाबा कीनाराम आश्रम में अघोर परंपरा एवं लोक संस्कृति, तथा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में आधुनिक शिक्षा एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय को समझने का प्रयास किया।
डॉ. नागेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि इस तरह की फील्ड विजिट शोधार्थियों में अनुसंधान दृष्टि, आलोचनात्मक सोच और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति गहरी समझ विकसित करती है। प्रतिभागियों ने भी इस अनुभव को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि काशी भ्रमण से उन्हें अपने शोध विषयों को नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर मिला।

ICSSR Research Methodology Course : कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने काशी विद्यापीठ एवं आईसीएसएसआर के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पाठ्यक्रम उनके अकादमिक एवं शोध जीवन में मील का पत्थर साबित होगा।

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